Bihar News: सिंगापुर में लालू यादव, यहां तेजस्वी मुश्किल में! विधान परिषद् उम्मीदवार चुनना बड़ी चुनौती
Vidhan Parishad Election: बिहार के सियासी गलियारे में विधान परिषद् चुनाव की सरगर्मी तेज हो गई है। नामांकन पर्चा दाखिल करने की अंतिम तारीख आठ जून तक ही है। अब तक किसी भी दल ने उम्मीदवारों ने नाम की घोषणा नहीं है। सबसे अधिक चर्चा में राजद है। यहां पर पेंच फंस गाय है। आइये जानते हैं पूरा मामला...
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विस्तार
राष्ट्रीय जनता दल के प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव सिंगापुर में हैं। पटना में उनकी पत्नी राबड़ी देवी और दोनों बेटे हैं। विधान परिषद् चुनाव का बिगुल बजे काफी दिन गुजर गए। नामांकन पर्चा दाखिल करने का समय एक से आठ जून तक है। पांच दिन बीत जाने के बाजवूद राजद की ओर से एक पद के लिए उम्मीदवारों की घोषणा नहीं की गई है। अब तक विचार विमर्श ही चल रहा है। उम्मीदवार राजद के कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी यादव को फाइनल करना है। यही चीज उनके लिए सबसे बड़ी चुनौती बन गई है। सूत्र बता रहे हैं तेजस्वी यादव के लिए पार्टी और परिवार में किसी एक को उम्मीदवार बनाना काफी मुश्किल साबित हो रहा है।
परिवार और पार्टी में से किसे चुनेंगे तेजस्वी?
राजनीतिक पंडितों का कहना है कि परिवार में विधान परिषद् भेजने को लेकर दो राय है। राबड़ी देवी अपने बड़े बेटे तेज प्रताप यादव को एमएलसी बनाना चाहती हैं। तेज प्रताप यादव एमएलसी बनने के लिए तैयार हैं लेकिन जनशक्ति जनता दल से, राजद से नहीं। वहीं दूसरी ओर लालू प्रसाद चाहते हैं कि उनकी बेटी रोहिणी आचार्य को विधान परिषद् भेजा जाए। दोनों ने अपनी चाहत तेजस्वी यादव को बता दी है। लेकिन, तेजस्वी यादव चाहते हैं राजद अपने पुराने कार्यकर्ता शिवचंद्र राम को मौका दे। ताकि दलित समाज में एक बड़ा मैसेज जाए।
अंतिम फैसला तेजस्वी यादव को ही लेना है
वरिष्ठ पत्रकार प्रवीण बागी ने कहा कि अंतिम फैसला तेजस्वी यादव को ही लेना है। लालू प्रसाद या कोई ओर तेजस्वी को सलाह दे सकते हैं। क्योंकि पार्टी तेजस्वी यादव ही चला रहे हैं। सारे फैसले भी वही ले रहे हैं। इसलिए वही तय करेंगे सबकुछ। संभावना है कि तेजस्वी शिवचंद्र राम या सुनील सिंह में से किसी एक का चयन करेंगे। दोनों नामों पर चर्चा है। सुनील सिंह राबड़ी देवी के मुंहबोले भाई है। काफी समय से राजद का झंडा बुलंद कर रहे हैं। शिवचंद्र राम बिहार सरकार में मंत्री भी रह चुके हैं। वह दलित समाज से आते हैं। ऐसे में दोनों नामों पर विचार चल रहा है।
ओवैसी की पार्टी ने तेजस्वी से क्या मांग की?
इधर, असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम ने राज्यसभा चुनाव में मदद के बदले नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव से एक एमएलसी सीट की मांग कर दी है। एआईएमआईएम के प्रदेश अध्यक्ष और विधायक अख्तरुल ईमान ने साफ तौर पर कहा कि पिछले राज्यसभा चुनाव में उनकी पार्टी ने महागठबंधन का समर्थन किया था। उन्होंने दावा किया कि उस समय तेजस्वी यादव ने वादा किया था कि भविष्य में वह एआईएमआईएम के हितों का ख्याल रखेंगे। विधायक अख्तरुल ईमान ने कहा कि अब समय आ गया है कि तेजस्वी अपना वादा पूरा करें। हमारे पास अकेले दम पर सीट जीतने के लिए पर्याप्त विधायक नहीं हैं। अगर राजद भविष्य में हमारा सहयोग चाहती है, तो उसे यह सीट हमें देनी होगी।
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राजद के दो एमएससी का कार्यकाल समाप्त हो रहा
बिहार विधान परिषद में विधानसभा कोटे की नौ सीटों पर चुनाव और एक सीट पर उपचुनाव की तारीख 18 जून को घोषित की गई है। जिन 9 सीटों पर चुनाव होना है, उनके सदस्यों का कार्यकाल इस महीने खत्म हो रहा है। वर्तमान में इनमें से छह तो एनडीए की है, बाकी तीन विपक्ष की सीटें हैं। राजद से एमएलसी सुनील सिंह और मोहम्मद फारूक का कार्यकाल खत्म हो रहा है, जबकि कांग्रेस के समीर कुमार सिंह का कार्यकाल भी खत्म हो रहा है। संख्या बल के हिसाब से राजद के पास महज एक सीट ही आएगी। इस पर उम्मीदवार तय करना तेजस्वी यादव के लिए बड़ी चुनौती बन गई है।