Bihar News : जांबाज कमांडर कैप्टन स्वाति रावल से मुलाकात, कोरोना काल के उस ऑपरेशन इटली की अनसुनी कहानियां
Bihar : दिल में कश्मकश जरुर थी। तनाव को दूर छोड़कर हजारों फीट ऊपर आसमान में थी। कोरोना काल की विभीषिका में फंसे 263 भारतीय छात्रों की जिंदगी का सवाल बार-बार मुझे डराने की कोशिश कर रहा था, लेकिन मैंने डर का दरवाजा हमेशा के लिए बंद कर दिया था।
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साल 2020 में जब पूरी दुनिया कोरोना महामारी के खौफ से कांप रही थी, तब एयर इंडिया की जांबाज महिला पायलट कैप्टन स्वाति रावल ने अपनी जान की परवाह न करते हुए 263 भारतीय छात्रों को इटली से सुरक्षित वतन वापस लाकर एक नया इतिहास रचा था।
अमर उजाला : जब आपको पहली बार पता चला कि आपको कोरोना की विभीषिका में इटली जाकर 263 भारतीय छात्रों को एयरलिफ्ट करना है, तो एक पायलट और एक मां के तौर पर आपके मन में पहला विचार क्या आया था?
कैप्टन स्वाति रावल : बचपन से मेरी इच्छा थी कि मैं देश के लिए कुछ करूं। मुझे एयरफ़ोर्स पायलट बनना था, फाइटर उड़ाना था। लाइसेंस मिलने के बाद एयर india में मेरी जॉब लगी। जब मुझे इटली से 263 भारतीय छात्रों को भारत लाने का मौका मिला तो मैंने बिना किसी से कुछ पूछे हां कर दी। फिर बाद में मैंने अपने पति और माता-पिता को इस बात की जानकारी दी। मुझे ख़ुशी इस बात की हुई कि मैं चाहती थी कि मेरी नियमित जॉब से अलग हटकर कुछ अच्छा करने का मौका मिल रहा है तो मैं ना नहीं कर सकी। मुझसे इटली जाने के पूछा गया तो मैंने बस इतना ही सोचा कि अगर मैं कोरोना से पीड़ित हो जाउंगी तो मुझे अस्पताल में भर्ती होना पड़ेगा। उस समय मेरी बेटी काफी छोटी थी। उस समय इस बात की कश्मकश जरुर थी कि मुझे यह करना चाहिए या नहीं करना चाहिए, लेकिन इसमें मेरे पति का किरदार काफी सराहनीय है, जिन्होंने मुझे हर कदम पर साथ दिया और कहा कि तुम जो करना चाहो वह करो मैं तुम्हरे साथ हूं। और इसी साथ ने मेरे उत्साह को कई गुना अधिक बढ़ा दिया जिस वजह से मैंने कुछ अलग करने की चाहता में इस चुनौती को स्वीकार कर लिया।
अमर उजाला : एक कमर्शियल पायलट के सामने आसमान में कई बार अचानक आपातकालीन स्थितियां आ जाती हैं। ऐसी परिस्थितियों में खुद को शांत रखकर तुरंत सही फैसला लेने का आपका क्या मंत्र है?
कैप्टन स्वाति रावल : जहाज बहुत बढ़िया चीज है, क्यों कि यह बात उसको नहीं पता होता है कि उसे महिला चला रही है या पुरुष। मैंने इसे उसी तरह नियंत्रित करती हूं जैसे करना चाहिए। यह रिसर्च में पाया गया है कि जब तनाव की स्थिति में आपातकालीन स्थिति में खुद पर नियंत्रित रखने की जब बात आती है तब महिला पुरुषों कि अपेक्षा महिलाएं ज्यादा अच्छा से कर लेती हैं। हमें इस बात का पूरा ख्याल रखना होता है कि जब मैं जहाज उड़ा रही होती हूं और उस समय कोई आपातकालीन स्थिति हो जाती है तो मुझे उन विषम परिस्थितियों पर कैसे नियन्त्रण किया जा सकता है। इसके लिए हमें बहुत अच्छी तरह से ट्रेनिंग दी जाती है। आपने जिस आपातकालीन परिस्थियों की बात पूछी, इसके लिए विशेष ट्रेनिंग दी जाती है।
अमर उजाला : स्वाति रावल का डर पर काबू पाने और खुद को शांत रखने का व्यक्तिगत मंत्र क्या है?
कैप्टन स्वाति रावल : मूल मंत्र यह है कि आप जिस काम को करें उसे पूरे दिल से करें। दूसरी बात यह कि आप जिस काम को करें उसके बारे में आपको पूरी तरह से पता हो।अगर आप गाड़ी चला रहे हैं और आपको सभी चीजों की जानकारी नहीं है तो फिर आपको डर लगेगा।लेकिन अगर आपको गाड़ी चलाने से लेकर उससे जुडी हर बात अगर अच्छी तरह से आपको पता है तो आप बहुत अच्छी तरह से गाड़ी चला सकते हैं। बस यही मूलमंत्र जहाज का भी है। आपका अनुभव, आपका आत्मविश्वास और जो आपको जिस बात कि जानकारी होनी चाहिए उसमें आप सौ फीसदी माहिर हों तो आप बहुत बढ़िया कर सकते हैं।
अमर उजाला : इस मुकाम तक पहुंचने के लिए आपको अपने शुरुआती दिनों में किस तरह की चुनौतियों और रूढ़िवादिता का सामना करना पड़ा?
कैप्टन स्वाति रावल : इस संबंध में मैं बहुत ही भाग्यशाली रही हूं क्यों कि मेरे पिता जी ने कभी मुझे इसके लिए न रोका और न टोका। उन्होंने कभी ऐसा नहीं कहा कि यह मत करो। इसके बाद जब मेरी शादी हुई तब मैंने अपने पति से कहा था कि मैं नौकरी छोडूंगी नहीं। दुर्भाग्य से मेरे सास ससुर अब इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन मेरे पति ने मेरा भरपूर साथ दिया है। जब मैं 5 दिनों के लिए जाती थी तो वह हमेशा घर पर रहे। उन्होंने घर का ख्याल रखा, हमारे बच्चों का ख्याल रखा। मेरे बेटे के लिए उन्होंने मां जैसे दूध पिलाने के अलावे उन्होंने सबकुछ किया है। जब मैं ट्रेनिंग के लिए गई थी तब मेरा बेटा बहुत छोटा था और इन्होने 8 महीने तक घर में मेरे बेटे का ख्याल रखा था।
(इसी दौरान कैप्टन स्वाति रावल के पति अजीत कुमार भी वहां पहुंचे)
अजीत कुमार - हमने एक दूसरे को काफी सपोर्ट किया है।
अमर उजाला : प्यार की शुरुआत कहाँ से हुई थी?
अजीत कुमार - पहली मुलाक़ात दिल्ली में हुई। मैं दिल्ली में रहता था और स्वाति मुंबई में। बातचीत की शुरुआत ऑनलाइन हुई, फिर मुलाक़ात ऑफलाइन हुई। इसके बाद पाया कि इनपर भी दवाब था, और मेरी भी उम्र शादी के लायक हो गई थी, इसलिए हमदोनों ने शादी के पवित्र बंधन में बंध जाने का निर्णय लिया। अब हमदोनों एक दूसरे को समझते हुए जिंदगी का मजा ले रहे हैं।
कैप्टन स्वाति रावल : आज मैं जहां नौकरी करती हूं वहां पुरुष भी काम करते हैं, लेकिन मेरे पति ने कभी इस तरह के सवाल मुझसे नहीं पूछे, यह सबसे बड़ा सपोर्ट है। अगर मैं कभी उनसे पूछती हूं कि क्या मैं यह करूँ तो वह स्पष्ट रूप से कहते हैं कि इसमें तुम मुझसे क्यों पूछ रही हो? तुमको जो अच्छा लगता है वह करो। यह सपोर्ट बल देता हैं मुझे आगे बढ़ाने में। यह आसान नहीं है लेकिन इसे मैं भगवान् का आशीर्वाद समझती हूं कि मुझे ऐसा इंसान पति के रूप में मिले हैं जो मेरा इतना ख्याल रखते हैं। पहले मेरे पिता ने मुझे सपोर्ट किया और अब पति कर रहे हैं। शाहरुख़ खान का एक Dialogue है न कि दिल से अगर कुछ मांगो तो उसे पूरा करने में पूरी कायनात लग जाती है।
अमर उजाला : आज देश की हजारों बेटियां आपको अपना रोल मॉडल मानती हैं और आसमान छूने का सपना देखती हैं। उन युवा लड़कियों को आप क्या सलाह देना चाहेंगी जो एविएशन में अपना करियर बनाना चाहती हैं?
कैप्टन स्वाति रावल : जजों हमारी नयी पिशी है उन्हें मैं दो चीजें बताना चाहती हूं। जब वह युवा होते हैं तो उनको ऐसा लगता है कि मुझे सबकुछ पता है, लेकिन जब उनको इस बात का एहसास होता है कि वाकई में उनको कुछ पता नहीं होता है, तब तक बहुत देर हो चुकी होती है। इसलिए आप दो बातें करें। पहला यह कि आप जो भी करें उसे पूरे दिल दिमाग से करें। मन से अपनी पढाई पूरी करें। और ऐसे काम का चयन करें जो आपका सपना है या जो आपका शौक है।जब आपका शौक आपका काम बन जाएगा तो आपका काम आपको काम नहीं लगेगा।और जो काम आप सौ फीसदी दिल से करेंगे उसमें आप हमेशा खुश रहेंगे।जब आप खुस रहेंगे तो आपके आसपास रहने वाले भी खुश रहेंगे। जब आप अपना काम दिल से करेंगे तो आपका विकास होने से कोई नहीं रोक सकता। दूसरी बात यह कि आज सोशल मीडिया की धूम है, जिसमें या तो आप अपना समय बर्बाद कर सकते हैं या फिर उससे आप कुछ सीख कर अपने जीवन को चमकदार बना सकते हैं।जब भी आपको ऐसा लगे कि आपकी जिंदगी में कोई दिक्कत आ रही है तो आपके माता-पिता, भाई - बहन और परिवार के लोग आपका साथ देते हैं इसलिए उन परिस्थितियों में परिवार के साथ रहें, उनकी राय लीजिए। आप पढ़िये, मस्ती कीजिए लेकिन पहले अपना कैरियर बनाईए फिर पार्टी कीजिए।
अमर उजाला : भावुक कब होती हैं ?
कैप्टन स्वाति रावल : मैं भावुक तब होती हूं जब कोई बात मुझे दिल को छू जाती है। मैं जब कोरोना की flight लेकर वापस लौट रही थी तब मेरे बोर्डिंग पास पर लिखा था कि मुझे नहीं लगा था कि भारत वापस लौटना मुझे इतनी ख़ुशी देगी। और मैं ख़ुशी के आंसू में हूं। क्यों कि कोरोना काल में 263 भारतीय छात्र इटली में फंस गए थे। वहां की सरकार ने भारत को कहा था कि आप रेस्क्यू फ्लाइट की व्यवस्था कीजिए। इनबातों को जब मैंने पढ़ा तब मुझे जो एहसास हुआ यह जरुरी था जो मैंने किया। मेरे इस काम से किसी की जिंदगी बच पाई। इस तरह जब मैं किसी इंसान की जिंदगी के लिए कुछ पोसिटिव कर पाती हूं तब बहुत भावुक होती हूं और दूसरा जब मेरे पति मेरे लिए कुछ अच्छा करते हैं तब मैं बहुत ज्यादा भावुक हो जाती हूं।
अमर उजाला : इस सफल मिशन के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद आपसे मुलाकात की थी और आपकी सराहना की थी। उस पल का अनुभव कैसा था और प्रधानमंत्री से क्या बातचीत हुई थी?
कैप्टन स्वाति रावल : यह मेरे लिए काफी गर्व की बात है कि मेरे काम को लेकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मेरी प्रशंसा की। मैंने तो अपना काम किया था, लेकिन पूरी दुनिया ने मेरा सम्मान किया था, यह मेरे लिए बहुत बड़ी बात है। मैंने ऐसा इसलिए किया था क्यों कि मुझे अच्छा लगे। मैं यही सोचती हूं कि जब मैं भगवान के पास जाऊं तो मेरी सूची में कुछ ऐसा काम भी शामिल हो जिसको दिखा कर मैं खुद को गौरवान्वित महसूस कर सकूं। लेकिन जिस तरह से पीम मोदी के साथ-साथ पूरे देश ने मेरे काम को सराहा था मैं काफी भावुक हो गई थी। उनकी सराहना ने मेरे उत्साह को और अधिक बढ़ा दिया था।
अमर उजाला : इटली के लिए उड़ान भरने से ठीक पहले और वहां लैंड करने के बाद फ्लाइट के भीतर का माहौल कैसा था? आपके दिल में क्या चल रहा था?
कैप्टन स्वाति रावल : जब मैं इटली के लिए उड़ान भर रही थी, उस समय पूरा सन्नाटा था। उस वक्त सिर्फ मेरा ही जहाज उड़ रहा था। जब आपको ऐसा लगता है कि रारी दुनिया समत हो गई है, वैसा सन्नाटा था।जब मैंने वहां अपने जहाज को land किया तब वहां कोई नहीं था।जब यात्री जहाज पर चढने लगे उस समय एक अजीब सा गर्व महसूस हो रहा था कि जो कोई नहीं कर रहा है, उसे हम कर रहे हैं। कोरोना ने एक चीज हमसब को दिया है,कि हमारे में जो लोगों के लिए भावनाएं थी वह उनके लिए बढ़ी थी। लोग एक दूसरे के बारे में सोचना शुर कर दिए थे।मदद करना शुरू कर दिया था। हमने कोरोना में एक लड़ाई लदी जिसमें हमने अपने परिवार के कुछ लोगों को खोया भी लेकिन हमसब अब उस विषम परिस्थिति से बाहर हैं, इस बात की ख़ुशी है।
अमर उजाला : एक अंतरराष्ट्रीय पायलट की ड्यूटी के घंटे तय नहीं होते। इस बेहद व्यस्त और तनावपूर्ण शेड्यूल के बीच आप अपनी व्यक्तिगत जिंदगी और परिवार के लिए वक्त कैसे निकाल पाती हैं?
कैप्टन स्वाति रावल : यह बहुत अच्छा सवाल है। अभी मैं जिस जहाज पर हूं, उससे मैं लगभग 48 घंटों में वापस आ जाती हूं। इससे पहले मैं एयर इंडिया 777 पर थी, उस पर से मुझे घर आने में लगभग 4-5 दिन लगते थे। अभी कभी-कभी एक सप्ताह भी लग जाता है, ऐसे में मुझे मेरे पति का भरपूर सहयोग मिलता है। मुझे मेरे पति अजीत और मेरे दोनों बच्चों का प्यार और सपोर्ट मुझे अपनी जिंदगी में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करता है। हमसब पर भगवान का आशीर्वाद है और मैं कामना करती हूं कि ईश्वर का ऐसा आशीर्वाद सभी लोगों पर यूँ ही बरसता रहे। जय हिन्द।