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Bihar News: कमला नदी का गहरा पानी बना काल! सात बच्चे डूबे, चार बचाए गए, तीन की मौत

Mon, 17 Aug 2026 11:31 AM IST
पूर्णिया ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कटिहार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कटिहार Published by: पूर्णिया ब्यूरो Updated Mon, 17 Aug 2026 11:31 AM IST
सार

कटिहार के फलका थाना क्षेत्र में सावन की तीसरी सोमवारी पर कमला नदी में नहाने के दौरान सात बच्चे गहरे पानी में डूब गए। ग्रामीणों ने चार बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया, जबकि तीन बच्चों की मौत हो गई। करीब आधे घंटे बाद बच्चों को नदी से बाहर निकालकर कोढ़ा अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने तीनों को मृत घोषित कर दिया।

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7 Children Drown in Kamla River While Bathing, 3 Dead
शोकाकुल परिजन - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बिहार के कटिहार जिले के फलका थाना क्षेत्र में सावन की तीसरी सोमवारी पर दर्दनाक हादसा हो गया। जल भरने और नहाने के दौरान कमला नदी में सात बच्चे अचानक गहरे पानी में चले गए। हादसे में तीन बच्चों की डूबने से मौत हो गई, जबकि ग्रामीणों ने किसी तरह चार बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। घटना के बाद नदी किनारे चीख-पुकार मच गई और तीन बच्चों की मौत की खबर मिलते ही उनके परिवारों में कोहराम मच गया।

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जलस्तर बढ़ने से गहरे पानी में चले गए बच्चे

मृत बच्चों के चाचा राजीव साह ने बताया कि हर साल सावन की सोमवारी पर श्रद्धालु कमला नदी से जल भरकर स्थानीय शिव मंदिर में पूजा-अर्चना करते हैं। पिछले दो सोमवार के दौरान नदी में पानी कम था, लेकिन इस बार जलस्तर बढ़ा हुआ था। इसी दौरान बच्चे नदी में नहाने लगे। अचानक उनका पैर फिसल गया और वे नदी के गहरे हिस्से में चले गए। देखते ही देखते सात बच्चे डूबने लगे। बच्चों को डूबता देखकर ग्रामीणों ने तुरंत नदी में उतरकर बचाव अभियान शुरू किया। काफी मशक्कत के बाद चार बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया, लेकिन तीन बच्चों को नहीं बचाया जा सका।

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ग्रामीणों ने सुरक्षा व्यवस्था पर उठाए सवाल

हादसे के बाद ग्रामीणों ने नदी घाट पर सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं होने का आरोप लगाया। ग्रामीण राजेश कुमार ने बताया कि सावन की सोमवारी पर यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं, लेकिन घाट पर सुरक्षा कर्मियों, गोताखोरों या बैरिकेडिंग की पर्याप्त व्यवस्था नहीं की गई थी। वहीं, संजय मंडल ने कहा कि जलस्तर बढ़ने के बाद नदी का गहरा हिस्सा बेहद खतरनाक हो गया था। इसके बावजूद बच्चों और श्रद्धालुओं को उस तरफ जाने से रोकने के लिए कोई प्रभावी व्यवस्था नहीं की गई थी।

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गोताखोर और बैरिकेडिंग की व्यवस्था की मांग

ग्रामीण मुकेश कुमार ने प्रशासन से धार्मिक अवसरों पर नदी घाटों की सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि ऐसे मौकों पर घाटों पर पर्याप्त संख्या में गोताखोरों की तैनाती और बैरिकेडिंग की व्यवस्था होनी चाहिए, ताकि इस तरह के हादसों को रोका जा सके।

करीब आधे घंटे बाद बच्चों को पानी से निकाला गया

बताया जा रहा है कि बच्चों के नदी में डूबने के करीब आधे घंटे बाद उन्हें पानी से बाहर निकाला जा सका। इसके बाद सभी बच्चों को इलाज के लिए कोढ़ा अस्पताल ले जाया गया। वहां डॉक्टरों ने जांच के बाद तीन बच्चों को मृत घोषित कर दिया। हादसे के बाद मृत बच्चों के घरों में मातम पसरा हुआ है। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। सावन की सोमवारी पर हुई इस दर्दनाक घटना से पूरे इलाके में शोक का माहौल है।

 

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