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Bihar: पूर्णिया विश्वविद्यालय में कानूनी संकट! कुलपति को HC में हाजिरी का आदेश, स्थापना दिवस पर उठी नई मुश्किल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पूर्णिया
Published by: पूर्णिया ब्यूरो
Updated Sat, 14 Mar 2026 10:42 PM IST
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सार
पूर्णिया विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. विवेकानंद सिंह को पटना उच्च न्यायालय ने 18 मार्च को व्यक्तिगत रूप से अदालत में हाजिरी देने का आदेश दिया है। यह विवाद 2019 के पुराने मामले से जुड़ा है, जिसमें पैनल वकील की कथित लापरवाही और समय पर कानूनी सलाह न देने के कारण स्थिति गंभीर हो गई।
पूर्णिया विश्वविद्यालय
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
पूर्णिया विश्वविद्यालय के प्रशासनिक गलियारों में इन दिनों कानूनी विवाद ने हड़कंप मचा रखा है। विश्वविद्यालय के पैनल वकील की कथित लापरवाही और कार्यशैली के कारण अब सीधे कुलपति प्रो. विवेकानंद सिंह को इसका खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। पटना उच्च न्यायालय ने कुलपति को 18 मार्च को व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होने का कड़ा निर्देश दिया है।
स्थापना दिवस पर कानूनी चुनौती
विवेकानंद सिंह के अनुसार, यह विवाद वर्ष 2019 के पुराने मामले से जुड़ा है और उनके कार्यकाल से भी काफी पुराना है। दुर्भाग्यवश, 18 मार्च को ही विश्वविद्यालय का स्थापना दिवस है, जहाँ कुलपति को उत्सव की कमान संभालनी थी। लेकिन अब उन्हें कानूनी जवाबदेही तय करनी होगी। कुलपति ने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय के पैनल वकील ने मामले की संवेदनशीलता और वास्तविक स्थिति से उन्हें कभी सीधे अवगत नहीं कराया।
पैनल वकील की कार्यशैली पर सवाल
कुलपति ने पैनल वकील की कार्यक्षमता पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने बताया कि उक्त वकील के जिम्मे विश्वविद्यालय के 143 पुराने मामले लंबित थे, लेकिन इतने बड़े आंकड़े होने के बावजूद एक भी केस में सफलता नहीं मिली। वकील के उदासीन और असहयोगी रवैये के कारण विश्वविद्यालय को न केवल अदालत में फटकार झेलनी पड़ रही है, बल्कि कई प्रशासनिक कार्यों में कानूनी अड़चनें भी आ रही हैं।
पढ़ें: रात में घर से निकला युवक, सुबह खेत में मिला शव; पत्नी बोली- कर्ज मांगने वाला ही बना कातिल
हाल के दिनों में कुलपति ने कानूनी कार्यों में पारदर्शिता और गति लाने के लिए पैनल में फेरबदल किया, लेकिन पुराने वकील पर भरोसा जताते हुए उन्हें टीम में रखा गया। बावजूद इसके वकील का रवैया नहीं बदला और अंततः 13 मार्च को उन्होंने कुलसचिव को अपना इस्तीफा सौंप दिया। इस्तीफे में फरवरी 2025 से अब तक के कालखंड का विशेष उल्लेख किया गया है। विश्वविद्यालय प्रशासन इसे ऐन मौके पर मुसीबत बढ़ाकर भागने की रणनीति के रूप में देख रहा है।
विश्वविद्यालय का गौरव और नई मुश्किल
18 मार्च 2026 का दिन पूर्णिया विश्वविद्यालय के लिए गौरव का दिन होना था, जिसकी तैयारियां महीनों से चल रही थीं। लेकिन अब कुलपति को पटना हाईकोर्ट के कटघरे में खड़े होकर विश्वविद्यालय का पक्ष रखना होगा। इस घटना ने विश्वविद्यालय के विधिक प्रकोष्ठ की कार्यप्रणाली को पूरी तरह उजागर कर दिया है। अब पैनल के पुनर्गठन की मांग भी जोर पकड़ने लगी है। कुलपति ने स्पष्ट किया कि विश्वविद्यालय के कानूनी मामलों में सुधार और नए सिरे से पैनल का गठन अनिवार्य है, ताकि भविष्य में ऐसी परिस्थितियों से निपटा जा सके।
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स्थापना दिवस पर कानूनी चुनौती
विवेकानंद सिंह के अनुसार, यह विवाद वर्ष 2019 के पुराने मामले से जुड़ा है और उनके कार्यकाल से भी काफी पुराना है। दुर्भाग्यवश, 18 मार्च को ही विश्वविद्यालय का स्थापना दिवस है, जहाँ कुलपति को उत्सव की कमान संभालनी थी। लेकिन अब उन्हें कानूनी जवाबदेही तय करनी होगी। कुलपति ने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय के पैनल वकील ने मामले की संवेदनशीलता और वास्तविक स्थिति से उन्हें कभी सीधे अवगत नहीं कराया।
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पैनल वकील की कार्यशैली पर सवाल
कुलपति ने पैनल वकील की कार्यक्षमता पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने बताया कि उक्त वकील के जिम्मे विश्वविद्यालय के 143 पुराने मामले लंबित थे, लेकिन इतने बड़े आंकड़े होने के बावजूद एक भी केस में सफलता नहीं मिली। वकील के उदासीन और असहयोगी रवैये के कारण विश्वविद्यालय को न केवल अदालत में फटकार झेलनी पड़ रही है, बल्कि कई प्रशासनिक कार्यों में कानूनी अड़चनें भी आ रही हैं।
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हाल के दिनों में कुलपति ने कानूनी कार्यों में पारदर्शिता और गति लाने के लिए पैनल में फेरबदल किया, लेकिन पुराने वकील पर भरोसा जताते हुए उन्हें टीम में रखा गया। बावजूद इसके वकील का रवैया नहीं बदला और अंततः 13 मार्च को उन्होंने कुलसचिव को अपना इस्तीफा सौंप दिया। इस्तीफे में फरवरी 2025 से अब तक के कालखंड का विशेष उल्लेख किया गया है। विश्वविद्यालय प्रशासन इसे ऐन मौके पर मुसीबत बढ़ाकर भागने की रणनीति के रूप में देख रहा है।
विश्वविद्यालय का गौरव और नई मुश्किल
18 मार्च 2026 का दिन पूर्णिया विश्वविद्यालय के लिए गौरव का दिन होना था, जिसकी तैयारियां महीनों से चल रही थीं। लेकिन अब कुलपति को पटना हाईकोर्ट के कटघरे में खड़े होकर विश्वविद्यालय का पक्ष रखना होगा। इस घटना ने विश्वविद्यालय के विधिक प्रकोष्ठ की कार्यप्रणाली को पूरी तरह उजागर कर दिया है। अब पैनल के पुनर्गठन की मांग भी जोर पकड़ने लगी है। कुलपति ने स्पष्ट किया कि विश्वविद्यालय के कानूनी मामलों में सुधार और नए सिरे से पैनल का गठन अनिवार्य है, ताकि भविष्य में ऐसी परिस्थितियों से निपटा जा सके।