RJD Party: तेजस्वी यादव छात्र राष्ट्रीय जनता दल को क्यों खत्म कर रहे? नई पहचान की वजह और नफा-नुकसान समझें
Bihar News: पार्टी की स्थापना के लगभग 30 साल बाद अब छात्र राष्ट्रीय जनता दल का नाम और पहचान पूरी तरह बदल जाएगा। आज तेजस्वी यादव संगठन के नए नाम की घोषणा के साथ इसके नए लोगो का भी अनावरण करेंगे। वजह के साथ-साथ नफा-नुकसान भी समझिए।
विस्तार
राष्ट्रीय जनता दल की पहचान लालू प्रसाद यादव से है और लालू प्रसाद यादव की पहचान राष्ट्रीय जनता दल है। इसके साथ ही लालू प्रसाद यादव की बड़ी पहचान यह है कि पूरे बिहार की राजनीति में वह छात्र राजनीति से सुर्ख़ियों में आए। लेकिन, अब राष्ट्रीय जनता दल की छात्र इकाई ख़त्म हो रही है। लालू प्रसाद यादव के छोटे बेटे तेजस्वी यादव आज ही छात्र राष्ट्रीय जनता दल को समाप्त कर देंगे। उसकी जगह अब छात्र राष्ट्रीय जनता दल का नाम स्टूडेंट विंग ऑफ राष्ट्रीय जनता दल होने वाला है। अब आईये जानते हैं कि तेजस्वी यादव ने पहचान से जुड़ा यह निर्णय क्यों लिया?
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नाम बदलने का निर्णय लेने का मुख्य कारण
दरअसल छात्र राजद को अनौपचारिक रूप से लालू के बड़े बेटे तेजप्रताप वर्ष 2011 से 2025 तक चलाते आए थे। लालू प्रसाद यादव के द्वारा परिवार और पार्टी से निकाले जाने तक वह छात्र राजद की जिम्मेदारी निभाते रहे थे। इस अवधि में चाहे यूनिवर्सिटी कैंपस में चुनाव हो या पार्टी की अन्य गतिविधि छात्र राजद की राजनीति में कोई हस्तक्षेप नहीं कर पाता था। इसी मसले पर तेजप्रताप की रु तब के प्रदेश अध्यक्ष जगदानंद सिंह रु से तनातनी हो गई थी। इसलिए तेजस्वी यादव अब छात्र संगठन को अपने बड़े भाई तेजप्रताप यादव के पुराने प्रभाव से मुक्त कर अपनी नई टीम तैयार करना चाहते हैं।
ब्रांड का नाम बदलने से फायदा और नुकसान
ब्रांड का नाम बदलने से फायदा और नुकसान दोनों होता है।फायदे के तौर पर नई पहचान और आधुनिक छवि के साथ नया बाजारीकरण मिलता है। साथ ही पुराने नाम के साथ अगर कोई नकारात्मक प्रतिष्ठा जुड़ी है, तो उसे मिटाने का यह एक प्रभावी तरीका होता है। तेजस्वी यादव यही सोचकर नाम बदल रहे हैं। वहीं नाम बदलने से नुकसान की बात करें तो छात्र राजद की जगह नया नाम देने से जनता और कार्यकर्ताओं में भ्रम की स्थिति बनेगी। साथ ही नए नाम की मार्केटिंग में बहुत खर्च भी करना पड़ेगा।
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पार्टी बता रही यह वजह
राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव ने 6 मार्च को छात्र राजद की बिहार इकाई को भंग कर दिया था। इसके बाद से छात्र संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में प्रो. नवल किशोर यादव इस संगठन की जिम्मेदारी निभा रहे थे। दलील यह दी जा रही है कि जैसे भाजपा के लिए ABVP, वामपंथी दलों के लिए AISF/SFI/AISA है अन्य राष्ट्रीय दलों की तर्ज पर छात्र राजद का संगठन भी यूनिवर्सिटी कैंपस में मजबूती से उभरे। इससे पार्टी के विस्तार में मदद मिलेगी।
माई समीकरण से आगे निकलने की कोशिश
इस बड़े बदलाव के पीछे राजद की एक दूरगामी सोच यह है कि संगठन के जरिए राजद अपने परंपरागत 'माई' वोट बैंक से हटकर अन्य जातियों और वर्गों के युवाओं को पार्टी से जोड़ना चाहती है। हालांकि छात्र राजद के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रो. नवल किशोर यादव का कहना है कि नाम बदलने के पीछे एक तकनीकी और रणनीतिक कारण भी है। लिगंदोह कमेटी की सिफारिशों के मुताबिक, यूनिवर्सिटी कैंपस में किसी राजनीतिक दल के सीधे नाम के साथ राजनीति नहीं होनी चाहिए। नाम बदलने से वे छात्र भी संगठन से जुड़ सकेंगे जो राजद की विचारधारा के समर्थक तो हैं, लेकिन सीधे तौर पर किसी पार्टी के नाम से जुड़ने में झिझकते थे।
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