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Bihar News : हद है! जीवित जन प्रतिनिधि को बता दिया मृत; सरकारी दस्तावेज में गड़बड़ी की सूचना से हड़कंप
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, छपरा
Published by: सारण ब्यूरो
Updated Sun, 01 Feb 2026 11:01 PM IST
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सार
Death Declared : बिहार में आम आदमी को सरकारी दस्तावेजों में मृत घोषित करने की खबरें तो आती रही हैं, लेकिन इस बार तो सरकारी सिस्टम ने आगे बढ़कर महिला जनप्रतिनिधि को भी मृत घोषित कर दिया है।
जीवित जन प्रतिनिधि, जो मृत घोषित किए जाने के बाद से परेशान होकर फरियाद लगा रहीं।
- फोटो : अमर उजाला डिजिटल
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विस्तार
बिहार के सारण में सरकारी तंत्र की घोर लापरवाही का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने प्रशासनिक व्यवस्था की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सारण जिले के मांझी प्रखंड अंतर्गत सोनबरसा पंचायत (वार्ड संख्या-02) की निर्वाचित सदस्य अफसरी खातून को सरकारी अभिलेखों में मृत घोषित कर दिया गया है। हैरानी की बात यह है कि वह न केवल जीवित हैं, बल्कि सक्रिय रूप से अपने पद के दायित्वों का निर्वहन भी कर रही हैं।
पेंशन रुकी, दफ्तरों के चक्कर काटने पर हुआ खुलासा
इस गंभीर त्रुटि के कारण अफसरी खातून की वृद्धावस्था पेंशन रोक दी गई है। उन्होंने बताया कि यह घटना न केवल अजीबोगरीब है, बल्कि दुर्भाग्यपूर्ण भी है। पिछले वर्ष अगस्त में उन्होंने नियमानुसार केवाईसी प्रक्रिया पूरी कर जीवित होने का प्रमाण पत्र जमा कराया था, इसके बावजूद उन्हें कागजों में मृत दिखा दिया गया। जब पेंशन रुकी और उन्होंने कार्यालयों के चक्कर लगाए, तब इस बड़ी लापरवाही का खुलासा हुआ।
आधा दर्जन अन्य महिलाएं भी कागजों में मृत
पीड़ित वार्ड सदस्य ने आरोप लगाया कि यह मामला केवल उन तक सीमित नहीं है, बल्कि सोनबरसा पंचायत की लगभग आधा दर्जन अन्य जीवित महिलाओं को भी सरकारी दस्तावेजों में मृत घोषित कर दिया गया है। इसके चलते इन गरीब और वृद्ध महिलाओं की सामाजिक सुरक्षा पेंशन बंद हो गई है, जिससे उनके सामने आर्थिक संकट और मानसिक पीड़ा की स्थिति उत्पन्न हो गई है।
ग्रामीणों में आक्रोश, जांच की मांग
इस घटना को लेकर स्थानीय ग्रामीणों और पंचायत प्रतिनिधियों में भारी आक्रोश है। लोगों का कहना है कि यह अधिकारियों और कर्मियों की लापरवाही का चरम है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि इस पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच की जाए, दोषी कर्मचारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई हो और प्रभावित महिलाओं की पेंशन तत्काल बहाल की जाए। साथ ही, भविष्य में ऐसी त्रुटियों को रोकने के लिए रिकॉर्ड संधारण की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने की भी मांग की गई है।
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पेंशन रुकी, दफ्तरों के चक्कर काटने पर हुआ खुलासा
इस गंभीर त्रुटि के कारण अफसरी खातून की वृद्धावस्था पेंशन रोक दी गई है। उन्होंने बताया कि यह घटना न केवल अजीबोगरीब है, बल्कि दुर्भाग्यपूर्ण भी है। पिछले वर्ष अगस्त में उन्होंने नियमानुसार केवाईसी प्रक्रिया पूरी कर जीवित होने का प्रमाण पत्र जमा कराया था, इसके बावजूद उन्हें कागजों में मृत दिखा दिया गया। जब पेंशन रुकी और उन्होंने कार्यालयों के चक्कर लगाए, तब इस बड़ी लापरवाही का खुलासा हुआ।
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आधा दर्जन अन्य महिलाएं भी कागजों में मृत
पीड़ित वार्ड सदस्य ने आरोप लगाया कि यह मामला केवल उन तक सीमित नहीं है, बल्कि सोनबरसा पंचायत की लगभग आधा दर्जन अन्य जीवित महिलाओं को भी सरकारी दस्तावेजों में मृत घोषित कर दिया गया है। इसके चलते इन गरीब और वृद्ध महिलाओं की सामाजिक सुरक्षा पेंशन बंद हो गई है, जिससे उनके सामने आर्थिक संकट और मानसिक पीड़ा की स्थिति उत्पन्न हो गई है।
ग्रामीणों में आक्रोश, जांच की मांग
इस घटना को लेकर स्थानीय ग्रामीणों और पंचायत प्रतिनिधियों में भारी आक्रोश है। लोगों का कहना है कि यह अधिकारियों और कर्मियों की लापरवाही का चरम है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि इस पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच की जाए, दोषी कर्मचारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई हो और प्रभावित महिलाओं की पेंशन तत्काल बहाल की जाए। साथ ही, भविष्य में ऐसी त्रुटियों को रोकने के लिए रिकॉर्ड संधारण की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने की भी मांग की गई है।
