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Bihar News: भोजपुरी शेक्सपीयर भिखारी ठाकुर की 138वीं जयंती, भारत रत्न देने की मांग का राज्यपाल ने किया समर्थन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, छपरा
Published by: सारण ब्यूरो
Updated Thu, 18 Dec 2025 07:13 PM IST
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सार
भोजपुरी लोक कलाकार भिखारी ठाकुर की 138वीं जयंती समारोह 2025 उनके पैतृक गांव कुतुबपुर दियारा स्थित भिखारी ठाकुर आश्रम में राजकीय सम्मान के साथ मनाई गई।
राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
भोजपुरी के शेक्सपीयर कहे जाने वाले महान लोक कलाकार भिखारी ठाकुर जी की 138वीं जयंती का राजकीय समारोह 2025 उनके पैतृक गांव कुतुबपुर दियारा स्थित भिखारी ठाकुर आश्रम में आयोजित किया गया। अत्यधिक कुहासा होने के बावजूद महामहिम राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान नियत समय पर कार्यक्रम में पहुंचे और श्रद्धा सुमन अर्पित किए।
कार्यक्रम का शुभारंभ गार्ड ऑफ ऑनर से सलामी लेने के साथ हुआ, इसके बाद भिखारी ठाकुर के प्रपौत्र सुशील कुमार ठाकुर ने उनके प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर उन्हें याद किया। इसके बाद मंच पर महामहिम राज्यपाल मोहम्मद आरिफ खान, स्थानीय विधान पार्षद प्रो डॉ बीरेंद्र नारायण यादव, जिला परिषद की अध्यक्ष जयमित्रा देवी, स्थानीय विधायक सुरेंद्र राम और भिखारी ठाकुर के प्रपौत्र सुशील कुमार ठाकुर ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर राजकीय जयंती समारोह 2025 का विधिवत उद्घाटन किया। समारोह राष्ट्रगान से प्रारंभ हुआ। भिखारी ठाकुर नाट्यमंडली द्वारा उनके प्रसिद्ध नाटक गबर घीचोर का मंचन किया गया।
लोकजीवन के सच्चे प्रतिनिधि और समाज सुधारक: राज्यपाल आरीफ मोहम्मद खान
महामहिम राज्यपाल ने कहा कि भिखारी ठाकुर केवल एक नाटककार या कलाकार नहीं थे, बल्कि वे लोकजीवन के सच्चे प्रतिनिधि और समाज सुधार के प्रबल संवाहक थे। उन्होंने कहा कि भिखारी ठाकुर ने अपनी कला के माध्यम से समाज में व्याप्त कुरीतियों, असमानता, शोषण और अन्याय के विरुद्ध आवाज बुलंद की। उनके नाटक और गीत आम जनमानस की पीड़ा, संघर्ष और आकांक्षाओं को अभिव्यक्त करते हैं। नारी सम्मान, सामाजिक न्याय और मानवीय मूल्यों को उन्होंने अपनी रचनाओं का केंद्र बनाया।
ये भी पढ़ें- Bihar: थावे दुर्गा मंदिर में बड़ी चोरी, मां के आभूषण और लॉकर से लाखों की नकदी ले उड़े चोर; सुरक्षा पर उठे सवाल
'लोक कलाकारों की विरासत को संरक्षित करना हमारी सामूहिक जिम्मेदारी'
राज्यपाल ने कहा कि भिखारी ठाकुर ने भोजपुरी भाषा और लोक संस्कृति को नई पहचान दी। उनकी रचनाएं आज भी प्रासंगिक हैं और समाज को आत्ममंथन के लिए प्रेरित करती हैं। उन्होंने नई पीढ़ी को भिखारी ठाकुर के जीवन, संघर्ष और विचारों से प्रेरणा लेने की आवश्यकता बताई। राज्यपाल ने इस बात पर जोर दिया कि ऐसे महान लोक कलाकारों की विरासत को संरक्षित करना और उसे आगे बढ़ाना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। राज्यपाल ने बताया कि भिखारी ठाकुर ने लौंडा नाच को लोकप्रिय बनाया और उनकी कला ने सामाजिक अन्याय और असमानता के विरुद्ध जन-जागरूकता फैलाने का काम किया। नारी सम्मान और मानवीय मूल्यों को अपने कार्य का केंद्र बनाने वाले भिखारी ठाकुर को भारत रत्न देने की मांग को भी राज्यपाल ने आगे बढ़ाने का आश्वासन दिया।
इस अवसर पर महामहिम राज्यपाल मोहम्मद आरिफ खान, सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के विधान पार्षद प्रो डॉ बीरेंद्र नारायण यादव, जिला परिषद की अध्यक्ष जयमित्रा देवी, स्थानीय गड़खा विधायक सुरेंद्र राम, जप प्रकाश विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ प्रमेंद्र बाजपेई, सारण प्रक्षेत्र के पुलिस उप महानिरीक्षक नीलेश कुमार, प्रभारी जिलाधिकारी सह छपरा नगर के आयुक्त सुनील कुमार पांडेय, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ कुमार आशीष, सदर अनुमंडल पदाधिकारी नितेश कुमार, सदर बीडीओ बिनोद आनंद सहित दर्जनों अधिकारी और कर्मचारी, तथा विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता उपस्थित रहे।
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कार्यक्रम का शुभारंभ गार्ड ऑफ ऑनर से सलामी लेने के साथ हुआ, इसके बाद भिखारी ठाकुर के प्रपौत्र सुशील कुमार ठाकुर ने उनके प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर उन्हें याद किया। इसके बाद मंच पर महामहिम राज्यपाल मोहम्मद आरिफ खान, स्थानीय विधान पार्षद प्रो डॉ बीरेंद्र नारायण यादव, जिला परिषद की अध्यक्ष जयमित्रा देवी, स्थानीय विधायक सुरेंद्र राम और भिखारी ठाकुर के प्रपौत्र सुशील कुमार ठाकुर ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर राजकीय जयंती समारोह 2025 का विधिवत उद्घाटन किया। समारोह राष्ट्रगान से प्रारंभ हुआ। भिखारी ठाकुर नाट्यमंडली द्वारा उनके प्रसिद्ध नाटक गबर घीचोर का मंचन किया गया।
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लोकजीवन के सच्चे प्रतिनिधि और समाज सुधारक: राज्यपाल आरीफ मोहम्मद खान
महामहिम राज्यपाल ने कहा कि भिखारी ठाकुर केवल एक नाटककार या कलाकार नहीं थे, बल्कि वे लोकजीवन के सच्चे प्रतिनिधि और समाज सुधार के प्रबल संवाहक थे। उन्होंने कहा कि भिखारी ठाकुर ने अपनी कला के माध्यम से समाज में व्याप्त कुरीतियों, असमानता, शोषण और अन्याय के विरुद्ध आवाज बुलंद की। उनके नाटक और गीत आम जनमानस की पीड़ा, संघर्ष और आकांक्षाओं को अभिव्यक्त करते हैं। नारी सम्मान, सामाजिक न्याय और मानवीय मूल्यों को उन्होंने अपनी रचनाओं का केंद्र बनाया।
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राज्यपाल ने कहा कि भिखारी ठाकुर ने भोजपुरी भाषा और लोक संस्कृति को नई पहचान दी। उनकी रचनाएं आज भी प्रासंगिक हैं और समाज को आत्ममंथन के लिए प्रेरित करती हैं। उन्होंने नई पीढ़ी को भिखारी ठाकुर के जीवन, संघर्ष और विचारों से प्रेरणा लेने की आवश्यकता बताई। राज्यपाल ने इस बात पर जोर दिया कि ऐसे महान लोक कलाकारों की विरासत को संरक्षित करना और उसे आगे बढ़ाना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। राज्यपाल ने बताया कि भिखारी ठाकुर ने लौंडा नाच को लोकप्रिय बनाया और उनकी कला ने सामाजिक अन्याय और असमानता के विरुद्ध जन-जागरूकता फैलाने का काम किया। नारी सम्मान और मानवीय मूल्यों को अपने कार्य का केंद्र बनाने वाले भिखारी ठाकुर को भारत रत्न देने की मांग को भी राज्यपाल ने आगे बढ़ाने का आश्वासन दिया।
इस अवसर पर महामहिम राज्यपाल मोहम्मद आरिफ खान, सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के विधान पार्षद प्रो डॉ बीरेंद्र नारायण यादव, जिला परिषद की अध्यक्ष जयमित्रा देवी, स्थानीय गड़खा विधायक सुरेंद्र राम, जप प्रकाश विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ प्रमेंद्र बाजपेई, सारण प्रक्षेत्र के पुलिस उप महानिरीक्षक नीलेश कुमार, प्रभारी जिलाधिकारी सह छपरा नगर के आयुक्त सुनील कुमार पांडेय, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ कुमार आशीष, सदर अनुमंडल पदाधिकारी नितेश कुमार, सदर बीडीओ बिनोद आनंद सहित दर्जनों अधिकारी और कर्मचारी, तथा विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता उपस्थित रहे।