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Bihar News: बिना शिक्षकों के चल रहा पारा-मेडिकल कॉलेज, छात्रों का फूटा गुस्सा; सत्र लेट से संकट में भविष्य

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, छपरा Published by: सारण ब्यूरो Updated Sun, 22 Feb 2026 09:29 AM IST
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सार

सदर अस्पताल छपरा स्थित पारा-मेडिकल कॉलेज में शिक्षकों की कमी और सत्र लेट होने से छात्र परेशान हैं। भवन बनने के बावजूद पढ़ाई व्यवस्था दुरुस्त नहीं है। परीक्षा लंबित है और प्रशासनिक लापरवाही के खिलाफ छात्रों ने विरोध प्रदर्शन किया।

Negligence of Bihar's health department exposed, paramedical students studying without teachers
सदर अस्पताल छपरा - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

सारण जिला मुख्यालय स्थित सदर अस्पताल छपरा परिसर में संचालित पारा-मेडिकल कॉलेज में स्वास्थ्य विभाग की गंभीर लापरवाही सामने आई है। वर्ष 2019 में कॉलेज भवन का निर्माण पूरा हो गया था, लेकिन कोरोना महामारी के कारण नियमित शैक्षणिक गतिविधियां शुरू नहीं हो सकीं। वर्ष 2021 के बाद नामांकन प्रक्रिया प्रारंभ हुई और 2022 सत्र में मात्र 50 छात्रों ने प्रवेश लिया। इसके बाद छात्र संख्या में धीरे-धीरे वृद्धि तो हुई, परंतु शैक्षणिक और प्रशासनिक व्यवस्थाएं अब तक दुरुस्त नहीं हो पाई हैं।

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सबसे बड़ी समस्या सत्र के अत्यधिक विलंब की है। वर्ष 2022 का सत्र अभी तक लंबित है, जिससे छात्रों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है और उनके भविष्य पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। समय पर कक्षाएं और परीक्षाएं नहीं होने से छात्रों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है।

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स्वास्थ्य विभाग ने भवन निर्माण तो करा दिया, लेकिन शिक्षण कार्य के लिए न तो स्थायी और न ही अस्थायी शिक्षकों की प्रतिनियुक्ति की गई है। पारा-मेडिकल पाठ्यक्रम में नामांकन और परीक्षा का संचालन पटना स्थित नालंदा मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (एनएमसीएच) द्वारा किया जाता है, किंतु स्थानीय स्तर पर समुचित शैक्षणिक वातावरण के अभाव में पाठ्यक्रम समय पर पूरा नहीं हो पा रहा है।


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कॉलेज में स्थायी प्राचार्य और विशेषज्ञ शिक्षकों की नियुक्ति अब तक नहीं हुई है। वर्तमान में संस्थान प्रभारी प्राचार्य के भरोसे संचालित हो रहा है। छात्रों का आरोप है कि प्रशासनिक स्तर पर मनमानी की जा रही है और उनकी समस्याओं की अनदेखी की जा रही है। इस संबंध में कई बार सिविल सर्जन से शिकायत भी की जा चुकी है।

पढ़ाई की स्थिति यह है कि छात्रों को प्रैक्टिकल के लिए ओपीडी में जाकर प्रशिक्षण लेना पड़ता है। हाल ही में रोस्टर के आधार पर कुछ डॉक्टरों की ड्यूटी लगाई गई है ताकि नियमित कक्षाएं संचालित की जा सकें, लेकिन यह व्यवस्था भी पर्याप्त साबित नहीं हो रही है। विभागीय सूत्रों के अनुसार, पहले डॉक्टर ओपीडी के बाद छात्रों को पढ़ाते थे, लेकिन अतिरिक्त मेहनताना नहीं मिलने के कारण उन्होंने पढ़ाना बंद कर दिया।

स्थिति से नाराज पारा-मेडिकल के छात्र-छात्राओं ने शुक्रवार को सिविल सर्जन कार्यालय का घेराव कर विरोध प्रदर्शन किया। छात्रों का आरोप है कि प्रभारी प्राचार्य डॉ. जितेंद्र कुमार द्वारा उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाता है। कुल मिलाकर, शिक्षकों की कमी, सत्र विलंब और प्रशासनिक उदासीनता के कारण पारा-मेडिकल कॉलेज की शैक्षणिक व्यवस्था गंभीर संकट में है।

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