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Satta Ka Sangram: आज सारण पहुंचेगा अमर उजाला का चुनावी रथ, कई मुद्दों पर होगी चर्चा, कैसा है चुनावी इतिहास?

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सारण Published by: हिमांशु प्रियदर्शी Updated Mon, 13 Oct 2025 05:22 AM IST
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सार

Bihar Election Assembly 2025: बिहार में आगामी 6 और 11 नवंबर को विधानसभा चुनाव के लिए मतदान होना है। प्रदेश के चुनावी माहौल का जायजा लेने और राजनीतिक दलों के नेताओं से उनके वोट मांगने के मुद्दों पर चर्चा करने के लिए अमर उजाला का चुनावी रथ 'सत्ता का संग्राम' सोमवार को सारण पहुंचेगा। यहां जनता के मुद्दे जानने के बाद नेताओं के जवाब को तोला जाएगा।
 

Satta Ka Sangram in Saran: Bihar Election 2025 Know Political History of This Key Seat Equation Scenario
सत्ता का संग्राम - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

बिहार विधानसभा चुनाव का बिगुल बज चुका है। सभी राजनीतिक दल चुनाव की तैयारियों में जुट गए हैं। इसी बीच आज 13 अक्तूबर 2025 दिन सोमवार की सुबह आठ बजे ‘चाय पर चर्चा’ आपके शहर सारण में होगी। अमर उजाला पर कार्यक्रम लाइव टेलीकास्ट होंगे। उसके बाद दोपहर 12 बजे युवाओं से चर्चा की जाएगी। फिर शाम 4 बजे से कार्यक्रम में सभी पार्टी के नेता/प्रत्याशियों, उनके प्रतिनिधि/समर्थकों और आम लोगों से सवाल-जवाब किए जाएंगे। ऐसे में आइये जानते हैं सारण का चुनावी इतिहास।

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कैसा है सारण का इतिहास?
बिहार का सारण जिला ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और गौरवशाली धरती रही है। जो गंगा, घाघरा और गंडक नदियों से घिरा हुआ यह इलाका न सिर्फ अपनी भौगोलिक विशिष्टता के लिए जाना जाता है, बल्कि जयप्रकाश नारायण जैसे लोकनायक की जन्मस्थली होने के कारण स्वतंत्रता आंदोलन और समाजवादी आंदोलन की प्रेरणा स्थली रही है। इसके साथ-साथ भोजपुरी के शेक्सपियर कहे जाने वाले भिखारी ठाकुर, लोक कलाकार महेंद्र मिसिर सहित एशिया का प्रसिद्ध हरिहर क्षेत्र सोनपुर मेला अपनी संस्कृति को समेटे हुए है। वहीं, धार्मिक दृष्टिकोण से भी यह क्षेत्र अत्यंत समृद्ध रहा है, क्योंकि रिवीलगंज स्थित अहिल्या उद्धार, गौतम ऋषि की तपोस्थली, दधीचि आश्रम, सोनपुर स्थित हरिहर नाथ मंदिर, दिघवारा के आमी गांव स्थित शक्तिपीठ अंबिका भवानी, मढ़ौरा स्थित गढ़देवी और शिलनिधि राजा द्वारा स्थापित सिल्हौरी का शिलानाथ मंदिर के अलावा कौमी एकता के रूप प्रसिद्धि पाने वाले मौलाना मजहरुल हक की धरती होने के कारण राजनीतिक चेतना का केंद्र बिंदु रहा है।
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दस विधानसभा सीट वाला सारण जिला मुख्य रूप से दो लोकसभा क्षेत्रों में बंटा हुआ है। जिसमें सारण संसदीय क्षेत्र अंतर्गत सोनपुर, परसा, अमनौर, मढ़ौरा, गड़खा और छपरा विधानसभा क्षेत्र आता है। जबकि चार अन्य यथा तरैया, बनियापुर, एकमा और मांझी विधानसभा क्षेत्र सीवान जिले के अंतर्गत आने वाला महाराजगंज लोकसभा में समाहित है। फिलहाल इन दसों विधानसभा सीटों पर भाजपा, राजद और माले का कब्जा है। जिसमें सोनपुर, परसा, मढ़ौरा, गड़खा, बनियापुर और एकमा में राजद का कब्जा है। जबकि अमनौर, तरैया और छपरा में भाजपा के विधायक है, वहीं, जिले की एक मात्र मांझी विधानसभा सीट पर कम्युनिस्ट (माले) के विधायक का कब्जा है। सबसे दिलचस्प बात यह है कि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जदयू से एक भी विधायक विधानसभा नहीं पहुंचे हैं। हालांकि फिलहाल बनियापुर से राजद विधायक केदारनाथ सिंह राजद छोड़कर जदयू का दामन थाम चुके है।


 
सारण जिले में पहली बार अपने मताधिकार का प्रयोग करने वाले युवा मतदाताओं की बात की जाए तो 49, 775 जिसमें 28586 पुरुष जबकि 21188 महिला मतदाता शामिल हैं। सारण जिले के अमनौर विधानसभा क्षेत्र में सबसे कम 116654 महिला मतदाता हैं। जबकि सबसे अधिक 149515 बनियापुर महिला मतदाता हैं। इसी तरह सबसे अधिक छपरा विधानसभा क्षेत्र में 169444 पुरुष मतदाता है जबकि सबसे कम 132988 पुरुष मतदाता हैं।


 
प्रमंडलीय मुख्यालय सारण स्थित छपरा विधानसभा क्षेत्र जहां फिलहाल वर्तमान विधायक डॉ सीएनएन गुप्ता दूसरी बार कमल का फुल खिला चुके हैं, लेकिन इस बार अगर भाजपा इनको पुनः उम्मीदवार बनाती है तो फूल मुरझाने की संभावना अधिक है। क्योंकि शहर सहित ग्रामीण क्षेत्रों में विकास के नाम पर कुछ हुआ ही नहीं है। जिस कारण उम्र (सिविल सर्जन के पद से अवकाश प्राप्त होने के बाद विधायक) का हवाला देते हुए भाजपा इस बार अपना प्रत्याशी बदलने की फिराक में है। लेकिन कोई वैश्य समुदाय से ही भाजपा अपना प्रत्याशी बनाने की सोच रही है।
 
सबसे अहम बात यह है कि 07 और 08 अक्तूबर को छपरा सहित ग्रामीण क्षेत्रों में मूसलाधार बारिश होने से जलजमाव की स्थिति उत्पन्न हो गई थी। लेकिन सबसे ज्यादा शहरी क्षेत्र में जलजमाव की समस्या हुई है। लगातार 3 दिनों तक सरकारी या निजी कार्यालयों में कम से कम 3 फीट पानी जमा हुआ था। उसको निकालने के लिए पंप सेट का सहारा लिया गया था।
 
अभी तक जनसुराज को छोड़कर किसी भी राजनीतिक दलों द्वारा प्रत्याशी की घोषणा नहीं की गई है। जिस कारण किसी खास प्रत्याशी को लेकर कुछ कहना जल्दबाजी होगी। क्योंकि जिले की कुछ सीटों को छोड़कर भाजपा या राजद अपना उम्मीदवार बदलने की तैयारी में हैं, लेकिन अभी अपना पत्ता नहीं खोला है।
 
क्या हैं यहां के मूल मुद्दे?
जिले के सभी विधानसभा क्षेत्रों में विकास का मुद्दा ही इस बार के चुनाव में रहने की प्रबल संभावना है। इसके साथ ही धार्मिक एवं ऐतिहासिक दृष्टि कोण की नजर देखा जाए तो मढ़ौरा की गढ़देवी स्थान, सिल्हौरी के शिलानाथ मंदिर, आमी की अंबिका भवानी, सोनपुर के बाबा हरिहरनाथ मंदिर, रिवीलगंज के अहिल्या उद्धार और गौतम ऋषि सहित दधीचि आश्रम को पर्यटन के रूप में विकसित करने की मांग भी आम जनता के द्वारा की जाती है।

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हालांकि सारण प्रमंडल के सारण, सिवान और गोपालगंज जिले के छात्र और छात्राओं के लिए खुला जय प्रकाश विश्वविद्यालय में अध्यनरत छात्रों को 3 साल में मिलने वाली स्नातक की डिग्री समय से नहीं मिलती है। जिस कारण कई वर्षों से लाखों छात्रों ने यहां से अपना नामांकन वापस कर दूसरे विश्वविद्यालय में नामांकन कराए हैं, क्योंकि डिग्री का पंजीयन का समय सीमा पांच वर्षों का ही होता है। लेकिन इसके बावजूद डिग्री नहीं मिल पाती हैं।
 
मढ़ौरा विधानसभा के लिए सबसे अहम मुद्दा
औद्योगिक नगरी के रूप में विश्व विख्यात जिले का मढ़ौरा अनुमंडल मुख्यालय स्थित चीनी मिल, मॉर्टम फैक्टरी, डिस्टिलरी फैक्टरी अभी तक चालू नहीं कराई गई हैं। लेकिन लोकसभा या विधानसभा चुनाव के दौरान इसको मुद्दा बनाया जाता है। यहां तक कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी विगत 2020 के विधानसभा चुनाव के दौरान इसको चालू कराने की घोषणा कर चुके हैं। वहीं, स्थानीय भाजपा सांसद सह पूर्व केंद्रीय मंत्री राजीव प्रताप रूडी भी हर बार के चुनाव में चीनी मिल चालू कराने की घोषणा करते हैं, लेकिन हर बार केवल घोषणा ही बनकर रह जाता है। शहर में डबल डेकर और हाजीपुर से गाजीपुर को जोड़ने वाली बाईपास सड़क अभी तक अधर में लटका हुआ है।

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सारण में यहां आयोजित होगा सत्ता का संग्राम
सुबह 08 बजे चाय पर चर्चा
स्थान: बाजार समिति का मुख्य द्वार स्थित चाय दुकान 
मुफ्फसिल थाना छपरा सारण
 
दोपहर 12 बजे युवाओं से चर्चा
स्थान: कचहरी स्टेशन (मंदिर के पास)
नगर थाना छपरा सारण
 
शाम 4 बजे -सत्ता का संग्राम, राजनेताओं से चर्चा
स्थान: कचहरी स्टेशन परिसर
नगर थाना छपरा सारण 
 
विशेष कवरेज को आप यहां देख सकेंगे
amarujala.com, अमर उजाला के यूट्यूब चैनल और फेसबुक चैनल पर आप 'सत्ता का संग्राम' से जुड़े कार्यक्रम लाइव देख सकेंगे। 'सता का संग्राम' से जुड़ा व्यापक जमीनी कवरेज आप अमर उजाला अखबार में भी पढ़ सकेंगे।

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