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Bihar News: बिना विशेषज्ञ डॉक्टर के 243 एक्स-रे! मढ़ौरा अस्पताल के आंकड़ों ने उठाए सवाल; नहीं सुधरी व्यवस्था

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, छपरा Published by: सारण ब्यूरो Updated Sun, 22 Feb 2026 11:46 AM IST
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सार

सारण के मढ़ौरा रेफरल अस्पताल में डॉक्टरों की अनुपस्थिति के बावजूद एक्स-रे, आंख जांच और अन्य सेवाओं के दावों ने सवाल खड़े कर दिए। निरीक्षण में कई खामियां मिलीं। एसडीओ ने अनुपस्थित चिकित्सकों पर कार्रवाई और व्यवस्था सुधार के निर्देश दिए।

Treatment without a doctor is possible in government hospitals Find out which hospital is being discussed
औचक निरीक्षण - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

बिहार के सरकारी अस्पतालों की व्यवस्था पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर लगातार उठ रही शिकायतों के बीच सारण जिले के मढ़ौरा स्थित रेफरल सह अनुमंडलीय अस्पताल चर्चा का विषय बना हुआ है। यहां निरीक्षण के बावजूद व्यवस्थाओं में अपेक्षित सुधार नहीं दिख रहा है।

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बीते एक सप्ताह पहले मढ़ौरा के अनुमंडल पदाधिकारी निधि राज और पुलिस पदाधिकारी ने संयुक्त रूप से अस्पताल का औचक निरीक्षण किया था। निरीक्षण के दौरान कई खामियां सामने आई थीं। शनिवार देर शाम एसडीओ निधि राज ने दोबारा अस्पताल पहुंचकर व्यवस्था का जायजा लिया, लेकिन हालात में विशेष बदलाव नहीं दिखा। चिकित्सक और कई कर्मी अनुपस्थित मिले।

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सबसे हैरान करने वाली बात एक्स-रे मशीन को लेकर सामने आई। पिछले शनिवार को निरीक्षण के दौरान एक्स-रे मशीन खराब बताई गई थी, लेकिन अस्पताल प्रबंधन के अनुसार पिछले सात दिनों में 243 मरीजों का एक्स-रे किया गया। गौरतलब है कि अस्पताल में हड्डी रोग विशेषज्ञ की प्रतिनियुक्ति नहीं है, इसके बावजूद प्रतिदिन औसतन 35 लोगों का एक्स-रे किए जाने का दावा किया गया है।  

आंकड़ों के मुताबिक सात दिनों में 36 मरीजों का अल्ट्रासाउंड और 13 लोगों का ईसीजी भी किया गया। वहीं, आंख के चिकित्सक की अनुपस्थिति के बावजूद 100 मरीजों की आंखों की जांच, 80 लोगों को चश्मा लगाने की सलाह और 65 मरीजों को चश्मा उपलब्ध कराने की बात कही गई है। यह स्थिति कई सवाल खड़े करती है।


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निरीक्षण के दौरान डॉ. गायत्री और दंत चिकित्सक डॉ. नीतू शर्मा अनुपस्थित पाई गईं। बताया गया कि डॉ. नीतू शर्मा पिछले छह महीनों से अधिक समय तक अनुपस्थित रही हैं। जांच के समय महिला चिकित्सक डॉ. शबाना अंसारी मौजूद थीं, जबकि डॉ. शशि भूषण प्रसाद सिंह देर शाम अस्पताल पहुंचे। अस्पताल में साफ-सफाई और बुनियादी सुविधाओं की कमी भी देखी गई। हालांकि पिछले एक सप्ताह में कुछ मामूली सुधार जरूर नजर आया, लेकिन स्थिति संतोषजनक नहीं मानी जा सकती।

एसडीओ निधि राज ने कहा कि चिकित्सकों की अनुपस्थिति को लेकर वरीय अधिकारियों को सूचित कर कार्रवाई की अनुशंसा की जाएगी। उन्होंने अस्पताल प्रबंधक आफरीन सेराज को व्यवस्था में सुधार के लिए सख्त निर्देश दिए। अनुपस्थित चिकित्सकों के विरुद्ध कार्रवाई हेतु सिविल सर्जन को पत्र लिखने की बात भी कही गई है।

इसके अतिरिक्त अस्पताल में एक और गंभीर मामला सामने आया। अस्पताल के पास अपना जनरेटर उपलब्ध होने के बावजूद निजी जनरेटर का उपयोग किया जा रहा था। एसडीओ ने इस पर कड़ी आपत्ति जताते हुए जनरेटर संचालन की लॉग बुक प्रस्तुत करने का निर्देश दिया। अब यह सवाल उठ रहा है कि अस्पताल का स्वयं का जनरेटर होने के बावजूद निजी जनरेटर किन परिस्थितियों में संचालित किया जा रहा है। मढ़ौरा रेफरल अस्पताल की यह स्थिति सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाती है। अब देखना यह है कि प्रशासनिक सख्ती के बाद हालात में वास्तविक सुधार होता है या नहीं।

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