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INDIA: 14 साल के लड़के ने रेल पटरी उखाड़ने की क्यों रची साजिश? 14 अगस्त को फिर याद आएंगे कपिलदेव

Thu, 13 Aug 2026 03:52 PM IST
शबाहत हुसैन न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोजपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोजपुर Published by: शबाहत हुसैन Updated Thu, 13 Aug 2026 03:52 PM IST
सार

भोजपुर के 14 वर्षीय शहीद कपिलदेव राम ने 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन में अंग्रेजों से लड़ते हुए प्राण न्योछावर कर दिए। हर वर्ष स्थानीय लोग उन्हें श्रद्धांजलि देते हैं, लेकिन प्रशासनिक उपेक्षा और उनकी प्रतिमा पर अतिक्रमण लोगों में नाराजगी का कारण बना हुआ है।

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Who Was Kapildev Ram The 14 Year-Old Freedom Fighter Killed During Quit India Movement yet to recognized
वीर सपूत - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

भारत छोड़ो आंदोलन में महज 14 वर्ष की आयु में देश की आजादी के लिए अपने प्राण न्योछावर करने वाले वीर सपूत शहीद कपिलदेव राम को आज भी उनका गांव और परिवार हर वर्ष 14 अगस्त को श्रद्धापूर्वक याद करता है। हालांकि, प्रशासनिक स्तर पर उनकी शहादत को वह सम्मान नहीं मिल पाया, जिसके वे हकदार हैं।

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कोइलवर के एक सामान्य परिवार में बसंत दुसाध और बेलासिया देवी के घर जन्मे कपिलदेव राम ने 14 अगस्त 1942 को महात्मा गांधी के 'भारत छोड़ो आंदोलन' के दौरान अपने साथियों के साथ सरकारी कामकाज ठप करने और कोइलवर पुल के पास रेल लाइन क्षतिग्रस्त करने की कार्रवाई में भाग लिया। क्रांतिकारियों ने रेल की कुछ पटरियां उखाड़कर सोन नदी में फेंक दी थीं।
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इसी दौरान मुखबिरों की सूचना पर अंग्रेजी सैनिक मौके पर पहुंच गए। आत्मसमर्पण से इनकार करने पर उन्होंने गोली चला दी, जो कपिलदेव राम के सीने में लगी। गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद वे 'भारत माता की जय' और 'वंदे मातरम्' के नारे लगाते रहे। बताया जाता है कि अंग्रेज सैनिकों ने उनके साथ बर्बरता भी की, लेकिन उन्होंने अंतिम सांस तक देशभक्ति के नारे नहीं छोड़े।
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साथी उन्हें इलाज के लिए कोइलवर अस्पताल ले गए। वहां मां की गोद में सिर रखकर उन्होंने भावुक शब्दों में कहा कि उन्हें अपने बलिदान का कोई गम नहीं है और देश की आजादी के लिए मरना उनका सौभाग्य है। इसके कुछ ही देर बाद उन्होंने अंतिम सांस ली।

बाद में स्वतंत्रता सेनानी स्व. रामप्रसाद लाल उर्फ भोला बिस्मिल और समाजसेवी स्व. रामप्रवेश राम के प्रयासों से उनके समाधि स्थल पर स्मारक का निर्माण कराया गया। आरा-पटना मुख्य मार्ग स्थित एक चौक पर उनकी प्रतिमा स्थापित की गई और उसका नाम शहीद कपिलदेव चौक रखा गया। हर वर्ष 14 अगस्त को स्थानीय लोग उनकी प्रतिमा और स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित कर श्रद्धांजलि देते हैं। हालांकि, लोगों का कहना है कि प्रशासन की ओर से शहादत दिवस को राजकीय स्तर पर मनाने की कोई ठोस पहल नहीं की जाती, जिससे लोगों में निराशा है।


प्रतिमा स्थल पर अतिक्रमण, गंदगी से बिगड़ी स्थिति
नगर के व्यस्त शहीद कपिलदेव चौक पर स्थापित प्रतिमा भी अतिक्रमण की चपेट में है। प्रतिमा के चारों ओर ठेला-खोमचा और फल-चाट की दुकानें लगने से स्मारक परिसर सिकुड़ गया है। वहीं ऑटो चालकों ने भी आसपास वाहन खड़े कर दिए हैं। दुकानदारों द्वारा प्रतिमा स्थल पर जूठे दोने, प्लेट और अन्य कचरा फेंके जाने से वहां गंदगी और बदबू का आलम है।

स्थानीय निवासी दीपक गुप्ता का कहना है कि नई पीढ़ी को शहीद कपिलदेव राम की वीरगाथा से परिचित कराना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि शहादत दिवस को राजकीय सम्मान के साथ मनाया जाए। वहीं, शहीद के वंशज अशोक कुमार का कहना है कि परिवार पीढ़ियों से उनकी वीरता की कहानियां सुनता आ रहा है, लेकिन आज भी उन्हें वह सम्मान नहीं मिल पाया, जिसके वे वास्तविक हकदार हैं।

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