केंद्रीय पशुपालन विभाग गायों को लेकर देशव्यापी परीक्षा कराने जा रहा है। दरअसल, केंद्र के पशुपालन और डेयरी मंत्रालय के तहत एक आयोग बनाया गया है जिसका नाम है 'राष्ट्रीय कामधेनु आयोग।'
गायों पर ज्ञान बढ़ाने के लिए देशभर में होगा एग्जाम
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लेकिन, डेयरी सेक्टर के जानकार गौ विज्ञान परीक्षा को एक परसेप्शन बनाने की कोशिश के तौर पर देख रहे हैं। डेयरी एक्सपर्ट कुलदीप शर्मा कहते हैं, "ये एक तरह की सोच बनाने की कोशिश हो रही है।हालांकि, देसी गायों के प्रति लोगों की जानकारी बढ़ाने के लिहाज से यह ठीक है।"
वे कहते हैं, "लेकिन, अगर किसानों से पूछा जाए तो वे इनसे होने वाली कमाई का पैसे-पैसे का हिसाब बता देंगे। जानकारी बढ़ाने के लिहाज से ये क्विज ठीक है, लेकिन जमीनी स्तर पर गायों से किसानों की कमाई कितनी है और कैसे बढ़ेगी इसके लिए नीतियां बनाना ज्यादा महत्वपूर्ण है। गायों के संबंध में सरकारी नीतियां समझ से परे हैं। किसान अपनी गायें बेच नहीं पाते हैं और वे उन पर बोझ बनी रहती हैं। गायों के ट्रांसपोर्टेशन की भी एक बड़ी समस्या है।"
- परीक्षा का ब्योरा
यह परीक्षा हिंदी और अंग्रेजी के अलावा 12 क्षेत्रीय भाषाओं में कराई जाएगी। कथीरिया ने कहा, "कामधेनु गौ विज्ञान प्रचार प्रसार परीक्षा एक ऑनलाइन एग्जाम होगा जिसमें हिंदी, अंग्रेजी और 12 क्षेत्रीय भाषाओं में 75 बहुविकल्पीय सवाल होंगे।"
यह परीक्षा एक घंटे की होगी और इसमें चार कैटेगरीज होंगी। यह परीक्षा प्राइमरी लेवल (8वीं कक्षा तक के), सेकेंडरी लेवल (कक्षा 9 से 12 तक), कॉलेज लेवल (12वीं के बाद) और आम लोगों के लिए होगी।इस परीक्षा के लिए कोई रजिस्ट्रेशन शुल्क नहीं लिया जाएगा।इस परीक्षा से संबंधित संदर्भ किताबों और दूसरे स्टडी मैटेरियल को कामधेनु आयोग की वेबसाइट पर उपलब्ध कराया गया है। परीक्षा के नतीजे 26 फरवरी 2021 को घोषित कर दिए जाएंगे। इसमें सफल होने वाले प्रतिभागियों को नकद पुरुस्कार/सर्टिफिकेट दिए जाएंगे।
- क्या है कामधेनु आयोग?
2019 के अंतरिम बजट में वित्त मंत्री पीयूष गोयल ने कामधेनु आयोग बनाने का ऐलान किया था। बजट भाषण में उन्होंने कहा था, "मुझे राष्ट्रीय कामधेनु आयोग के गठन का ऐलान करते हुए गर्व हो रहा है ताकि गौ संसाधन के स्थायित्व भरे जेनेटिक अपग्रेडेशन को किया जा सके। साथ ही गायों के उत्पादन और उत्पादकता को भी बढ़ाया जा सके।"उन्होंने कहा था कि यह आयोग गायों से संबंधित कानूनों और वेल्फेयर स्कीमों को प्रभावी तौर पर लागू करने का भी काम करेगा। गोयल ने अपने बजट भाषण में कहा था, "गोमाता के सम्मान में और गोमाता के लिए यह सरकार कभी पीछे नहीं हटेगी और इसके लिए जो भी जरूरी होगा किया जाएगा।" इसी बजट में राष्ट्रीय गोकुल मिशन के लिए बजट आवंटन को भी बढ़ाकर 750 करोड़ रुपये करने का ऐलान किया गया था।
- देसी नस्लों पर जोर
कामधेनु आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर लिखा गया है कि आधुनिक और वैज्ञानिक तर्ज पर गायों का पशुपालन करने और नस्लों को संरक्षित करने और उनमें सुधार करने, गायों, बछड़ों के कटान को रोकने के लिए राष्ट्रीय कामधेनु आयोग का गठन किया गया है।
पशुपालन मंत्रालय के मुताबिक, भारत में गायों की 43 नस्लें पाई जाती हैं। गोवंश की प्रजातियों के लिहाज से देश में बड़ी विविधता है। लंबे वक्त से भारत कोशिश कर रहा है कि गायों की घरेलू नस्लों को प्रोत्साहित किया जाए और उनकी उत्पादकता बढ़ाई जाए।कामधेनु आयोग की वेबसाइट पर परीक्षा की तैयारी के लिए डाले गए मैटेरियल में भी विदेशी जर्सी गायों के मुकाबले भारतीय गायों की श्रेष्ठता को बताया गया है। हालांकि, एक्सपर्ट सरकार के देसी गायों पर जोर दिए जाने और जर्सी गाय पालने को हतोत्साहित करने पर भी सवाल उठा रहे हैं।