Mystery of Venus: रहस्यों से अंतरिक्ष भरा हुआ है, जिनके बारे में अक्सर चौंकाने वाला खुलासा होता है। अब वैज्ञानिकों ने शुक्र ग्रह को लेकर हैरान करने वाला दावा किया है। वैज्ञानिकों ने वायुमंडल में कुछ ऐसा देखा है, जिसके बारे में उन्हें उम्मीद नहीं थी। उन्होंने टेलीस्कोप की मदद से शुक्र ग्रह के वायुमंडल में विशाल और गोल छल्लों की खोज की है। अंतरिक्ष में ऐसे लग रहा है, जैसे कोई घंटी बज रही है। इस अजीबोगरीब घटना को देखकर वैज्ञानिक हैरान रह गए। वैज्ञानिकों ने इसे साबित करने के लिए कई वर्षों तक शोध किया। वैज्ञानिकों ने इस घटना से जुड़ी डेटा को दुनिया के सामने लाया है।
Mystery of Venus: शुक्र के वायुमंडल में दिखे विशाल छल्ले और लगातार बज रही घंटी, क्या कोई नया खतरा है?
Mystery of Venus: वैज्ञानिकों ने शुक्र ग्रह को लेकर हैरान करने वाली खोज की है। वैज्ञानिकों ने ग्रह के वायुमंडल में विशाल छल्ले देखे हैं, जो घंटी की तरह बज रहे हैं।
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खुली आंखों से नहीं दिखते हैं छल्ले
सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि इन छल्लों को खुली आंखों से नहीं देखा जा सकता है। सिर्फ पोलराइज्ड लाइट में ही इसे आप देख सकते हैं। एक्सट्रीम पोलरीमीटर सिर्फ लीनियर पोलराइज्ड लाइट को ही रिकॉर्ड करता था। यह सामान्य और अनपोलराइज्ड लाइट को पूरी तरह रोकने का काम करता है। रोशनी गैस और धूल से होकर गुजरती है तो लीनियर पोलराइज्ड का निर्माण होता है। इस उपकरण से वैज्ञानिकों ने उस चीजों को भी देखा, जो हमेशा छिप जाती हैं।
यह घटना सामने आई, तो वैज्ञानिकों को लगा कि हो सकता है कोई तकनीकी खराबी है और यह उपकरण की कोई गलती हो सकती हो सकती है, क्योंकि यह छल्ले शुक्र ग्रह के सबसे चमकीले हिस्से के चारों तरफ साफ नजर आ रहे थे, लेकिन कई जांच के बाद भी यह सिग्नल लगातार बना रहा। वैज्ञानिकों को पता चला कि यह उपकरण की कोई गलती नहीं है।
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वर्षों शोध के बाद हुआ चौंकाने वाला खुलासा
वर्षों शोध के बाद वैज्ञानिकों को चौंकाने वाली जानकारी मिली। यह शोध द प्लैनेटरी साइंस जर्नल में प्रकाशित हुआ है। नीदरलैंड की डेल्फ्ट यूनिवर्सिटी के एटमॉस्फेरिक फिजिसिस्ट गौरव महापात्रा इसके मुख्य लेखक हैं। उन्होंने शोध को लेकर कई हैरान करने वाले खुलासे किए हैं। गौरव महापात्रा का कहना है कि इस तरह की घटनाओं की पुष्टि नहीं होना निराश करने वाला है। उन्होंने कहा कि सही वैज्ञानिक तरीक यह नहीं था कि हम सिर्फ इंतजार करते रहें। उन्होंने कहा कि हमें शोध में जो सच्चाई पता चली, हमने उसे प्रकाशित कर दिया।
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क्या है छल्लों का रहस्य?
गौरव महापात्रा ने अपने शोध में पता लगाने की कोशिश कि की क्या ऊपरी वायुमंडल के घनत्व में होने वाले बदलाव से ऐसा सिग्नल बन सकता है। वायुमंडलीय गुरुत्वाकर्षण तरंगों के कारण यह बदलाव होता है। उनका यह विचार पूरी तरह सच साबित हुआ। शोध में खुलासा हुआ है कि 5 से 10 प्रतिशत के घनत्व बदलाव से ऐसे पोलराइजेशन छल्लों का निर्माण हो सकता है। हालांकि, अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि सच में यह छल्ले मौजूद हैं। अगर यह सच हुआ तो शुक्र ग्रह के कई नए रास्ते खुलेंगे। महापात्रा मानते हैं कि इस खोज से शुक्र ग्रह के बहुत बड़े हिस्से में घनत्व के स्ट्रक्चर को समझा जा सकता है। यह बहुत बड़ी वैज्ञानिक सफलता हो सकती है।