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आखिर गोवा कैसे और कब बना भारत का हिस्सा? बड़ा रोचक है इतिहास

Mon, 13 Apr 2020 01:58 PM IST
सोनू शर्मा फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: सोनू शर्मा Updated Mon, 13 Apr 2020 01:58 PM IST
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How Goa became part of India history of goa independence from portugal
गोवा में मौजूद रीस मैगोस किला - फोटो : Social media

गोवा को कौन नहीं जानता है। पूरी दुनिया में यह अपने खूबसूरत बीचों (समुद्र के किनारों) के लिए जाना जाता है। यहां हर साल लाखों की संख्या में देश से लेकर विदेशी सैलानी घूमने के लिए आते हैं। वैसे तो भारत को 1947 में अंग्रेजों से आजादी मिली थी, लेकिन क्या आपको पता है कि उस समय गोवा भारत का हिस्सा नहीं था। गोवा को देश की स्वतंत्रता के 14 साल बाद आजादी मिली थी। चलिए आपको बताते हैं कि गोवा आखिर कैसे भारत का हिस्सा बना? इसके पीछे का इतिहास बेहद ही रोचक है। 

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गोवा में पुर्तगालियों का बनाया किला - फोटो : Social media

वर्ष 1510 में पहली बार पुर्तगालियों ने गोवा पर कब्जा किया और उसके बाद लगभग 450 साल तक उन्होंने यहां शासन किया। 19 दिसंबर 1961 को गोवा पुर्तगालियों से आजाद हुआ था, लेकिन वो इसे इतनी आसानी से छोड़ने को तैयार नहीं थे। इसके लिए भारत को सख्त रवैया अपनाना पड़ा था।  

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गोवा बीच (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : Social media

भारत ने आजादी के बाद पुर्तगालियों से अनुरोध किया था कि वो गोवा को उसे सौंप दें, लेकिन उन्होंने इस अनुरोध को ठुकरा दिया। अब गोवा को आजाद कराने के लिए भारत के पास दो ही रास्ते थे, पहला युद्ध के जरिए गोवा पर कब्जा कर लिया जाए या फिर सत्याग्रह से इसकी आजादी की मांग की जाए। देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरु और गांधी जी भी दूसरा वाला विकल्प ही बेहतर समझते थे। 

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डॉ. राम मनोहर लोहिया - फोटो : Social media

गोवा को आजाद कराने में डॉक्टर राम मनोहर लोहिया का बहुत बड़ा योगदान था। 1946 में वह गोवा गए थे, जहां उन्होंने देखा कि पुर्तगाली तो अंग्रजों से भी बदतर थे। वो गोवा वासियों पर जुल्म पर जुल्म ढाए जा रहे थे। वहां नागरिकों को सभा संबोधन का भी अधिकार नहीं था। लोहिया से ये सब देखा नहीं गया और उन्होंने तुरंत 200 लोगों की एक सभा बुलाई। यह बात जब पुर्तगालियों को पता चली तो उन्होंने लोहिया को दो साल के लिए कैद कर लिया, लेकिन जनता के भारी आक्रोश के कारण बाद में उन्हें छोड़ना पड़ा। हालांकि पुर्तगालियों ने पांच साल के लिए लोहिया के गोवा आने पर प्रतिबंध लगा दिया, लेकिन इसके बावजूद भी गोवा की आजादी की लड़ाई लगातार जारी रही। 

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भारतीय वायु सेना (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : Social media

साल 1961 में भारत सरकार ने तब पुर्तगालियों के चंगुल से गोवा को आजाद कराने की ठानी, जब नवंबर महीने में पुर्तगाली सैनिकों ने गोवा के मछुआरों पर गोलियां चलाई, जिसमें एक मछुआरे की मौत भी हो गई। इसके बाद तो सारा किस्सा ही बदल गया। भारत के तत्कालीन रक्षा मंत्री वी. के. कृष्ण मेनन और प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरु ने आपातकालीन बैठक की और आखिरकार 17 दिसंबर को यह फैसला लिया गया कि गोवा को आजाद कराने के लिए वहां 30 हजार भारतीय सैनिकों को 'ऑपरेशन विजय' के तहत भेजा जाएगा। इस ऑपरेशन में नौसेना से लेकर वायु सेना तक को भी शामिल किया गया था। 

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