BIS: उपभोक्ताओं की अधिक सुरक्षा और पारदर्शिता लाने के लिए बीआईएस लाया एप, जानिए कैसे मिलेगा फायदा
भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) गुणवत्ता मानकों को मजबूत करने, हॉलमार्किंग के विस्तार और डिजिटल निगरानी बढ़ाने पर काम कर रहा है। नए क्षेत्रों में मानकों को अनिवार्य करने, BIS एपप से उपभोक्ता सुरक्षा बढ़ाने और नकली प्रमाणन रोकने के जरिए BIS का लक्ष्य उद्योगों में गुणवत्ता और उपभोक्ताओं में भरोसा बढ़ाना है।
विस्तार
भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस, भारत का राष्ट्रीय मानक निकाय है ) ने पिछले कुछ वर्षों में अपनी भूमिका का विस्तार किया है। बीआईएस ने गुणवत्ता संबंधी बुनियादी ढांचे को मजबूत करने, हॉलमार्किंग का विस्तार करने और प्रमाणन चिन्हों के दुरुपयोग को रोकन के लिए डिजिटल निगरानी को बढ़ाने के लिए घरेलू सुधारों में तेजी ला रहा है। इसमें उपभोक्ताओं में और अधिक जागारुकता के साथ अधिक सुरक्षा दी जा सके।
बीआईएस के वैज्ञानिक-जी व उप महानिदेशक (पश्चिम क्षेत्र) वी.गोपीनाथ ने अमर उजाला को बताया, भारतीय मानक ब्यूरो ने अपनी भूमिका का विस्तार कर रहा है। हम कई नए क्षेत्र के लिए भी प्रमाणन चिन्ह और बीआईएस मानकों को अनिवार्य करने वाले हैं। वर्तमान में भारत केवल अंतरराष्ट्रीय मानदंडों को अपना ही नहीं रहा है, बल्कि उन्हीं मानकों को बनाने में सक्रिय रूप से भाग ले रहे है। मौजूदा समय में भारतीय मानकों का लगभग 90 प्रतिशत अब अंतरराष्ट्रीय मानदंडों के अनुरुप है, जो विनिर्माण और निर्यात के विस्तार के साथ भारत को वैश्विक गुणवत्ता मानक के रूप में स्थापित करने के लिए सरकार के प्रयासों को दिखाता है।
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एचयूआईडी संख्या के साथ आभूषणों की पिक्चर और वजन दर्ज के लिए पायलेट प्रोजेक्ट
गोपीनाथ ने कहा, कीमती धातुओं की हॉलमार्किंग यह मुख्य क्षेत्र है, जहां लोग अधिक स्पष्टता और विश्वास चाहते हैं। वर्तमान समय में 373 जिलों में सोने पर अनिवार्य हॉलमार्किंग लागू की जा चुकी है और अब तक 58 करोड़ आभूषणों पर हॉलमार्किंग हो भी चुकी है। बीआईएस हॉलमार्के विश्ष्टि पहचान (एचयूआईडी) नंबर होता जिसको आप हमारे एप पर डालकर यह सुनिश्चित करते हैं, कि सोने की शुद्धता कितनी है, अब आभूषणों की छवि यानी पिक्चर और वजन को दर्ज करने के लिए 25 केंद्रो में एक पायलेट परियोजना शुरू की गई है। इसमें कोई ग्राहक आभूषण लेता है और उसका एचयूआईडी नंबर और उसकी फोटो कैप्चर कर हमारे बीआईएस एप डाली जाती है, जिसके बाद उसका सही वजन, शुद्धता का पता चलेगा। इसके जरिए नकली एचयूआईडी के डुप्लिकेशन और फर्जी एचयूआईडी की संभावना भी कम हो जाती है।
दक्षता, पारिदर्शिता और डिजिटल पर जोर
उन्होंने कहा, बीआईएस अपने काम में दक्षता और पारदर्शिता पर जोर दे रहा है, साथ ही डिजिटल उपस्थिति को मजबूत करते हुए बीआईएस ने ऑनलाइन मानक विकास पोर्टल लॉन्च किया है। इससे पूरी मानक निर्माण प्रक्रिया जिसमें विशेषज्ञ परामर्श, मसौदा तैयार करना और वितरण को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर शिफ्ट कर दिया गया है। इससे मानक निर्माण में तेजी आएग और मानवीय त्रिटियों को भी कम किया जा सकेगा।
उपभोक्ताओं की सुरक्षा के लिए बीआईएस केयर एप
गोपीनाथ ने कहा, बीआईएस का उपभोक्ता सुरक्षा को हमेशा सर्वोपरि रखता है, इसलिए उपभोक्ताओं की सुरक्षा और उनकी शिकायतों के लिए बीआईएस उपलब्ध है। यह उपभोक्ताओं को प्रमाणित उत्पादों को सत्यापित करने और गलत उत्पादों के बारे शिकायते दर्ज करने में उनकी मदद करता है। साल भर में 200 से अधिक शिकायते आती है। हम एक सप्ताह में 90 उपभोक्ता शिकायतों का समाधान करते हैं। वे बताते हैं कि इसमें ज्यादतर सोना, इलेक्ट्रॉनिक, ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर खरीदे गए उत्पाद, खिलौनों को लेकर अधिक शिकायते आती हैं। उन्होंने बताया कि साल 2024-25 में बीआईएस बड़े ई-कॉमर्स कंपनियों की शिकायते भी मिली, उसके बाद देश भर के 150 गोदोमों पर छापे मारे गए। यह केयर एप 12 मिलियन से अधिक बार डाउललोड किया जा चुका है। इस ऐप को गूगल प्लेस्टोर से डाउनलोड किया जा सकता है।
बीआईएस मानक अनिवार्यता में नए क्षेत्र भी शामिल
वे कहते हैं, समय के साथ कई नए क्षेत्र बीआईएस के मानक अनिर्वायता में आए है, जिसमें जियो टेक्सटाइल जो कि रोड बनाने के काम आता है, मेटल में कॉपर एल्यूमिनियम ग्रे आयर कॉस्टिंग, फूटवेयर, स्टेनलेस स्टील के बर्तन जो रसोई घर में इस्तेमाल किए जाते हैं उन बर्तन पर बीआईएस मानक अनिवार्य है प्लाइवूड, खिलौने जो अनिवार्य हो चुका है, इलेक्ट्रॉनिक वाहनों (ईवी) की बैटरी स्वैप पर मानक लाने की बात चल रही है।
उन्होंने कहा बीआईएस का प्रयास है कि अधिक से अधिक उद्योगों को गुणवत्ता और मानक के दायरे में लाया जाए साथ ही उपभोक्ता में जागरुकता बढ़ाई जाए, जिसमें वे ही उद्योगों में मानक लाने की मांग करें। हमारी कोशिश है कि हम उद्योगों को सहयोग प्रदान करने के साथ उपभोक्ताओं को सुरक्षता दे सकें, जिसमें उन्हें अच्छे उत्पाद मिल सकें।