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Chandigarh News: हर मिनट कीमती, फिर भी जांच के लिए भटक रहे ट्रॉमा मरीज
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चंडीगढ़। जल्दी एक्स-रे करवाकर लाइए... मरीज की हालत गंभीर है। जीएमसीएच-32 के ट्रॉमा सेंटर के बाहर डॉक्टर की यह आवाज सुनते ही परिजन स्ट्रेचर को तेजी से दूसरे ब्लॉक की ओर ले जाने लगते हैं। जिस ट्रॉमा सेंटर को गंभीर मरीजों को एक ही छत के नीचे इलाज और जांच की सुविधा देने के उद्देश्य से बनाया गया था वहां आज भी कई जरूरी जांचों के लिए मरीजों को अस्पताल के दूसरे भवनों का चक्कर लगाना पड़ रहा है। ट्रामा के मरीज जिनके लिए एक एक मिनट बेहद महत्वपूर्ण होता है, उनसे इलाज से पहले जांच के लिए स्ट्रेचर पर यहां से वहां की दौड़ लगवाई जा रही है।
जीएमसीएच-32 के ट्रॉमा सेंटर का उद्घाटन अगस्त 2024 में पंजाब के गवर्नर और चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाब चंद कटारिया ने किया था। उस समय दावा किया गया था कि सड़क दुर्घटना, सिर की चोट, हार्ट अटैक और अन्य गंभीर मरीजों को यहां अत्याधुनिक सुविधाओं के साथ तत्काल इलाज मिलेगा। लेकिन उद्घाटन के करीब 23 महीने बाद भी ट्रॉमा सेंटर पूरी तरह आत्मनिर्भर नहीं बन पाया है। रेडियोलॉजी, पैथोलॉजी लैब और अन्य डायग्नोस्टिक सुविधाएं अभी तक शुरू नहीं हो सकी हैं। इसके चलते मरीजों को एक्स-रे, सीटी स्कैन, एमआरआई और अन्य जांचों के लिए अस्पताल के दूसरे ब्लॉकों में भेजा जा रहा है। स्थिति यह है कि लैब और डाइग्नोसिस के लिए बनाए गए कमरों पर ताला बंद है।
एक-एक मिनट बेहद कीमती
इमरजेंसी चिकित्सा में हर मिनट की अहमियत होती है। जीएमसीएच-32 के डॉक्टर भी मानते हैं कि दुर्घटना के बाद का पहला घंटा यानी गोल्डन ऑवर मरीज की जान बचाने में सबसे महत्वपूर्ण होता है। ऐसे में जांच के लिए मरीज को एक भवन से दूसरे भवन तक ले जाना इलाज में देरी का कारण बन सकता है। वहीं ट्रॉमा सेंटर पहुंचे मरीजों के परिजनों का कहना है कि आधुनिक भवन बनने के बावजूद सबसे जरूरी सुविधाओं का अभाव समझ से परे है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार किसी भी आधुनिक ट्रॉमा सेंटर की सबसे बड़ी जरूरत 24 घंटे उपलब्ध रेडियोलॉजी और लैब सेवाएं होती हैं। गंभीर मरीजों के इलाज में जांच रिपोर्ट जितनी जल्दी मिलती है, उपचार उतनी ही तेजी से शुरू किया जा सकता है।
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मरीज के साथ परिजन भी परेशान
पंचकूला निवासी राजेश कुमार सड़क दुर्घटना में घायल भाई के साथ अस्पताल पहुंचे थे। उनका कहना है कि हमें लगा था कि ट्रॉमा सेंटर में सारी सुविधाएं मिलेंगी लेकिन जांच के लिए दूसरे ब्लॉक भेज दिया गया। मरीज को बार-बार ले जाना बहुत मुश्किल होता है, खासकर जब उसकी हालत गंभीर हो। वहीं वहीं मोहाली की सीमा शर्मा ने बताया कि डॉक्टर ने तुरंत जांच लिखी लेकिन दूसरे भवन में जाना पड़ा। स्ट्रेचर लेकर आना-जाना आसान नहीं था। अगर सारी जांच यहीं हो जाएं तो मरीज और परिजनों दोनों को राहत मिले। परिजनों का भी कहना है कि ट्रॉमा सेंटर का उद्देश्य तभी पूरा होगा, जब इलाज के साथ सभी जांच सुविधाएं भी उसी भवन में उपलब्ध हों।
कोट- ट्रॉमा सेंटर में लैब और डायग्नोस्टिक सुविधाएं शुरू करने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। जल्द ही ट्रॉमा सेंटर में लैब और सभी जरूरी डायग्नोस्टिक सुविधाएं शुरू कर दी जाएंगी ताकि मरीजों को एक ही परिसर में सभी सेवाएं मिल सकें। -डॉ. रवनीत कौर, डायरेक्टर प्रिंसिपल जीएमसीएच-32
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जीएमसीएच-32 के ट्रॉमा सेंटर का उद्घाटन अगस्त 2024 में पंजाब के गवर्नर और चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाब चंद कटारिया ने किया था। उस समय दावा किया गया था कि सड़क दुर्घटना, सिर की चोट, हार्ट अटैक और अन्य गंभीर मरीजों को यहां अत्याधुनिक सुविधाओं के साथ तत्काल इलाज मिलेगा। लेकिन उद्घाटन के करीब 23 महीने बाद भी ट्रॉमा सेंटर पूरी तरह आत्मनिर्भर नहीं बन पाया है। रेडियोलॉजी, पैथोलॉजी लैब और अन्य डायग्नोस्टिक सुविधाएं अभी तक शुरू नहीं हो सकी हैं। इसके चलते मरीजों को एक्स-रे, सीटी स्कैन, एमआरआई और अन्य जांचों के लिए अस्पताल के दूसरे ब्लॉकों में भेजा जा रहा है। स्थिति यह है कि लैब और डाइग्नोसिस के लिए बनाए गए कमरों पर ताला बंद है।
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एक-एक मिनट बेहद कीमती
इमरजेंसी चिकित्सा में हर मिनट की अहमियत होती है। जीएमसीएच-32 के डॉक्टर भी मानते हैं कि दुर्घटना के बाद का पहला घंटा यानी गोल्डन ऑवर मरीज की जान बचाने में सबसे महत्वपूर्ण होता है। ऐसे में जांच के लिए मरीज को एक भवन से दूसरे भवन तक ले जाना इलाज में देरी का कारण बन सकता है। वहीं ट्रॉमा सेंटर पहुंचे मरीजों के परिजनों का कहना है कि आधुनिक भवन बनने के बावजूद सबसे जरूरी सुविधाओं का अभाव समझ से परे है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार किसी भी आधुनिक ट्रॉमा सेंटर की सबसे बड़ी जरूरत 24 घंटे उपलब्ध रेडियोलॉजी और लैब सेवाएं होती हैं। गंभीर मरीजों के इलाज में जांच रिपोर्ट जितनी जल्दी मिलती है, उपचार उतनी ही तेजी से शुरू किया जा सकता है।
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मरीज के साथ परिजन भी परेशान
पंचकूला निवासी राजेश कुमार सड़क दुर्घटना में घायल भाई के साथ अस्पताल पहुंचे थे। उनका कहना है कि हमें लगा था कि ट्रॉमा सेंटर में सारी सुविधाएं मिलेंगी लेकिन जांच के लिए दूसरे ब्लॉक भेज दिया गया। मरीज को बार-बार ले जाना बहुत मुश्किल होता है, खासकर जब उसकी हालत गंभीर हो। वहीं वहीं मोहाली की सीमा शर्मा ने बताया कि डॉक्टर ने तुरंत जांच लिखी लेकिन दूसरे भवन में जाना पड़ा। स्ट्रेचर लेकर आना-जाना आसान नहीं था। अगर सारी जांच यहीं हो जाएं तो मरीज और परिजनों दोनों को राहत मिले। परिजनों का भी कहना है कि ट्रॉमा सेंटर का उद्देश्य तभी पूरा होगा, जब इलाज के साथ सभी जांच सुविधाएं भी उसी भवन में उपलब्ध हों।
कोट- ट्रॉमा सेंटर में लैब और डायग्नोस्टिक सुविधाएं शुरू करने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। जल्द ही ट्रॉमा सेंटर में लैब और सभी जरूरी डायग्नोस्टिक सुविधाएं शुरू कर दी जाएंगी ताकि मरीजों को एक ही परिसर में सभी सेवाएं मिल सकें। -डॉ. रवनीत कौर, डायरेक्टर प्रिंसिपल जीएमसीएच-32