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पार्किंग का पंगा : ओवरचार्जिंग और वाहन चोरी से पीजीआई में बढ़ी परेशानी
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चंडीगढ़। पीजीआई में इलाज के लिए आने वाले मरीजों, उनके परिजनों और कर्मचारियों के लिए पार्किंग व्यवस्था बड़ी परेशानी बन गई है। एक ओर पार्किंग में जगह तलाशने के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता है, वहीं दूसरी ओर निर्धारित शुल्क से अधिक पैसे वसूलने की शिकायतें भी लगातार सामने आ रही हैं। इसके अलावा स्टाफ पार्किंग से वाहन चोरी की घटनाओं ने कर्मचारियों की चिंता बढ़ा दी है। ऐसे में अस्पताल आने वाले लोगों का कहना है कि इलाज की चिंता के साथ पार्किंग की समस्या भी झेलनी पड़ रही है।
रोजाना हजारों मरीज और तीमारदार पीजीआई पहुंचते हैं। परिसर में अलग-अलग पार्किंग स्थल और शुल्क सूची लगी होने के बावजूद कई लोगों का आरोप है कि उनसे तय दर से अधिक राशि ली जाती है। जल्दी और मजबूरी के कारण अधिकांश लोग शिकायत करने के बजाय अतिरिक्त पैसे देकर आगे बढ़ जाते हैं।
मरीज बोले- इलाज की चिंता अलग, पार्किंग का झंझट अलग
मोहाली निवासी राजेश कुमार ने बताया कि पिता के इलाज के लिए पीजीआई आने पर पहले ही लंबी कतारों और जांच की चिंता रहती है। ऐसे में पार्किंग में जगह ढूंढ़ना और अतिरिक्त शुल्क देना परेशानी बढ़ा देता है। पंचकूला निवासी सुनीता देवी ने कहा कि वाहन पार्क करने के बाद भी उसके सुरक्षित रहने की चिंता बनी रहती है। अस्पताल जैसी जगह पर पार्किंग व्यवस्था और सुरक्षा दोनों बेहतर होनी चाहिए।
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कर्मचारी बोले- ड्यूटी से ज्यादा वाहन की चिंता
पीजीआई नर्सिंग एसोसिएशन के सचिव सत्यवीर डागर ने कहा कि स्टाफ पार्किंग से वाहन चोरी की घटनाएं चिंता का विषय हैं। कई कर्मचारी 8 से 10 घंटे की ड्यूटी करते हैं और पूरे समय उन्हें अपने वाहन की सुरक्षा की चिंता लगी रहती है। उन्होंने स्टाफ पार्किंग में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की मांग की।
पार्किंग संचालक बोले- बाउंड्री वॉल सबसे बड़ी समस्या
पार्किंग संचालक अभिषेक दुबे ने बताया कि कई स्थानों पर बाउंड्री वॉल नहीं है या टूटी हुई है, जिससे आवाजाही नियंत्रित नहीं हो पाती। अब तक दो वाहन चोरी की घटनाएं स्टाफ पार्किंग से सामने आई हैं, जबकि विजिटर पार्किंग से ऐसी कोई शिकायत नहीं मिली।
प्रशासन बोला- शिकायतों पर लगती है पेनल्टी
पीजीआई के प्रवक्ता ने कहा कि पार्किंग संबंधी शिकायतों की जांच कर संचालक पर पेनल्टी लगाई जाती है। सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के भी निर्देश दिए गए हैं।
इनसेट : लोगों की मांग
पार्किंग में तय शुल्क का सख्ती से पालन कराया जाए।
ओवरचार्जिंग करने वालों पर तत्काल कार्रवाई हो।
स्टाफ पार्किंग में सुरक्षा गार्ड और सीसीटीवी कैमरों की संख्या बढ़ाई जाए।
टूटी हुई बाउंड्री वॉल की मरम्मत कर प्रवेश-निकास नियंत्रित किए जाएं।
वाहन चोरी रोकने के लिए पार्किंग में डिजिटल एंट्री-एग्जिट प्रणाली लागू की जाए।
रोजाना हजारों मरीज और तीमारदार पीजीआई पहुंचते हैं। परिसर में अलग-अलग पार्किंग स्थल और शुल्क सूची लगी होने के बावजूद कई लोगों का आरोप है कि उनसे तय दर से अधिक राशि ली जाती है। जल्दी और मजबूरी के कारण अधिकांश लोग शिकायत करने के बजाय अतिरिक्त पैसे देकर आगे बढ़ जाते हैं।
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मरीज बोले- इलाज की चिंता अलग, पार्किंग का झंझट अलग
मोहाली निवासी राजेश कुमार ने बताया कि पिता के इलाज के लिए पीजीआई आने पर पहले ही लंबी कतारों और जांच की चिंता रहती है। ऐसे में पार्किंग में जगह ढूंढ़ना और अतिरिक्त शुल्क देना परेशानी बढ़ा देता है। पंचकूला निवासी सुनीता देवी ने कहा कि वाहन पार्क करने के बाद भी उसके सुरक्षित रहने की चिंता बनी रहती है। अस्पताल जैसी जगह पर पार्किंग व्यवस्था और सुरक्षा दोनों बेहतर होनी चाहिए।
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कर्मचारी बोले- ड्यूटी से ज्यादा वाहन की चिंता
पीजीआई नर्सिंग एसोसिएशन के सचिव सत्यवीर डागर ने कहा कि स्टाफ पार्किंग से वाहन चोरी की घटनाएं चिंता का विषय हैं। कई कर्मचारी 8 से 10 घंटे की ड्यूटी करते हैं और पूरे समय उन्हें अपने वाहन की सुरक्षा की चिंता लगी रहती है। उन्होंने स्टाफ पार्किंग में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की मांग की।
पार्किंग संचालक बोले- बाउंड्री वॉल सबसे बड़ी समस्या
पार्किंग संचालक अभिषेक दुबे ने बताया कि कई स्थानों पर बाउंड्री वॉल नहीं है या टूटी हुई है, जिससे आवाजाही नियंत्रित नहीं हो पाती। अब तक दो वाहन चोरी की घटनाएं स्टाफ पार्किंग से सामने आई हैं, जबकि विजिटर पार्किंग से ऐसी कोई शिकायत नहीं मिली।
प्रशासन बोला- शिकायतों पर लगती है पेनल्टी
पीजीआई के प्रवक्ता ने कहा कि पार्किंग संबंधी शिकायतों की जांच कर संचालक पर पेनल्टी लगाई जाती है। सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के भी निर्देश दिए गए हैं।
इनसेट : लोगों की मांग
पार्किंग में तय शुल्क का सख्ती से पालन कराया जाए।
ओवरचार्जिंग करने वालों पर तत्काल कार्रवाई हो।
स्टाफ पार्किंग में सुरक्षा गार्ड और सीसीटीवी कैमरों की संख्या बढ़ाई जाए।
टूटी हुई बाउंड्री वॉल की मरम्मत कर प्रवेश-निकास नियंत्रित किए जाएं।
वाहन चोरी रोकने के लिए पार्किंग में डिजिटल एंट्री-एग्जिट प्रणाली लागू की जाए।