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Hindi News ›   Chandigarh ›   Lobga gave his life, we gave our hair... The pain of Tibet stirred emotions in Chandigarh; 'We will not forsake our identity,' they declared.

Chandigarh News: लोबगा ने जान दी, हमने बाल दिए… चंडीगढ़ में तिब्बत के दर्द ने किया भावुक, बोले- पहचान नहीं छोड़ेंगे

Tue, 11 Aug 2026 02:16 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Tue, 11 Aug 2026 02:16 AM IST
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Lobga gave his life, we gave our hair... The pain of Tibet stirred emotions in Chandigarh; 'We will not forsake our identity,' they declared.
चंडीगढ़। काले कपड़ों में करीब 200 तिब्बती, हाथों में तिब्बत और भारत के झंडे, सफेद फूल और जुबां पर तिब्बती मंत्र। सामने लोबगा रंगजेन की तस्वीर और उसके आगे जलती मोमबत्तियां। सोमवार को सेक्टर-17 प्लाजा का माहौल भावुक रहा। छोटे बच्चों से लेकर युवाओं और बुजुर्गों तक ने कैंडललाइट विजिल और मौन प्रदर्शन में हिस्सा लिया। लोगों ने लोबगा रंगजेन की तस्वीर के सामने सफेद फूल और कपड़ा अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। प्रदर्शनकारियों ने तिब्बत की भाषा, संस्कृति और पहचान की रक्षा की मांग उठाई।
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प्रदर्शन के दौरान तिब्बती समुदाय के लोगों ने अपनी भावनाएं साझा कीं। कई लोगों की आंखें नम दिखीं। वक्ताओं ने कहा कि तिब्बतियों की पहचान, भाषा और संस्कृति को बचाने के लिए दुनिया को उनकी आवाज सुननी चाहिए।
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प्रदर्शन में शामिल चंडीगढ़ निवासी तिब्बती महिला तेनजीन ने चीन के खिलाफ विरोध जताने के लिए अपने बाल कटवाए। उन्होंने कहा कि महिलाओं को अपने बाल बहुत प्रिय होते हैं, लेकिन तिब्बत के लिए उन्होंने यह त्याग किया है। उन्होंने कहा कि अपने देश और पहचान की रक्षा के लिए तिब्बती समुदाय हर संभव बलिदान के लिए तैयार है।
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लोबगा ने जान दी, हम बाल कटवाकर दर्द बयां कर रहे
हिमाचल से प्रदर्शन में शामिल होने चंडीगढ़ पहुंचे 52 वर्षीय टेनपा ने कहा कि चीन का तथाकथित एथनिक यूनिटी लॉ तिब्बती संस्कृति को खत्म करने की कोशिश है। लोबगा रंगजेन का जिक्र करते हुए वह भावुक हो गए। उन्होंने कहा कि लोबगा ने तिब्बत के लिए अपना जीवन बलिदान कर दिया, जबकि वे बाल कटवाकर अपने दर्द और विरोध को व्यक्त कर रहे हैं।
आरटीवाईसी चंडीगढ़ के अध्यक्ष तेनजिन थाई रागाशर ने कहा कि तिब्बतियों की लड़ाई नफरत की नहीं, बल्कि शांति, सत्य और अपनी पहचान बचाने की लड़ाई है। उन्होंने कहा कि तिब्बती चाहे चंडीगढ़ में हों या दुनिया के किसी भी हिस्से में, अपनी भाषा और संस्कृति नहीं छोड़ेंगे। उनका सपना ऐसा तिब्बत है, जहां बच्चे बिना डर अपनी भाषा बोल सकें और लोग अपनी संस्कृति को खुलकर जी सकें।

संयुक्त राष्ट्र से कार्रवाई, एथनिक यूनिटी लॉ वापस लेने की मांग
प्रदर्शनकारियों ने संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से लोबगा रंगजेन के मामले का संज्ञान लेने और चीन सरकार को जवाबदेह ठहराने की मांग की। उन्होंने तथाकथित एथनिक यूनिटी लॉ वापस लेने, तिब्बत की भाषा, संस्कृति और धार्मिक पहचान की रक्षा करने तथा तिब्बती लोगों के मूलभूत अधिकार सुनिश्चित करने की मांग उठाई।
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