हरियाणा कैबिनेट बैठक में अहम फैसले, बुढ़ापा पेंशन 250 रुपये बढ़ी, अदालती कामकाज अब हिंदी में होगा
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हरियाणा सरकार ने साल की पहली कैबिनेट बैठक में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं। जिसके अंतर्गत अब अदालती कामकाज हिंदी में होगा और पेंशन वृद्धि भी 250 रुपये प्रतिमाह कर दी गई है। इसके अतिरिक्त गुमशुदा सरकारी कर्मचारी की पत्नी को आर्थिक लाभ अब छह महीने बाद से ही मिलना शुरू हो जाएगा। कैबिनेट बैठक के बाद हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने उक्त मामलों समेत अन्य निर्णयों की जानकारी बातचीत के दौरान विस्तार से दी।
नए साल में आखिरकार बुजुर्गों व अन्य पेंशन लाभार्थियों को ढाई सौ रुपये पेंशन वृद्धि का तोहफा मिल गया है। एक जनवरी (फरवरी में देय) से बुढ़ापा, बेसहारा समेत अन्य सामाजिक पेंशन 2000 रुपये से बढ़ाकर 2250 रुपये प्रतिमाह कर दी जाएगी। साथ ही कामगार मजदूरों की पेंशन में भी यही बढ़ोतरी लागू होगी। इसके अलावा प्रदेश में हर अदालत व ट्रिब्यूनल का कामकाज भी अब हिंदी में होगा, यहां अंग्रेजी वैकल्पिक भाषा होगी। उधर, एक अन्य निर्णयानुसार वे सरकारी कर्मचारी जो पुलिस रिकॉर्ड में छह माह से गुमशुदा है, उनकी पत्नी को भी अब सातवें महीने से आर्थिक लाभ मिलना शुरू हो जाएगा। पहले ये लाभ सात साल के बाद मिलना शुरू होता था।
पेंशन वृद्धि: बढ़ेगा 70 करोड़ का अतिरिक्त वित्तीय भार
हरियाणा में विभिन्न कैटेगरी के अंतर्गत करीब 28 लाख पेंशन लाभार्थी ऐसे हैं, जो इस फैसले से लाभान्वित होंगे। सीएम का दावा है कि 250 रुपये प्रति माह पेंशन वृद्धि से 70 करोड़ रुपये मासिक वित्तीय भार सरकार पर बढ़ेगा। हर महीने इन पेंशन लाभार्थियों को करीब 514 करोड़ रुपये पेंशन वितरण होता है, जोकि अब बढ़कर 584 करोड़ हो जाएगा।
दरअसल, सरकार इस पेंशन को महंगाई दर के हिसाब से बढ़ाने का विचार कर रही थी और इस लिहाज से ये बढ़ोतरी 160 रुपये बन रही थी। सीएम मनोहर लाल ने कहा कि हमने वादा तो महंगाई दर के लिहाज से पेंशन बढ़ाने का किया था, मगर हमारे सहयोगी दल जजपा की मांग थी कि पेंशन थोड़ी ज्यादा बढ़नी चाहिए, इसलिए हमने इस बढ़ोतरी को 250 रुपये प्रतिमाह किया है। क्या हर साल अब पेंशन वृद्धि 250 रुपये होगी, इस सवाल पर सीएम ने कहा कि इस बारे में अब अगले साल देखा जाएगा।
उल्लेखनीय है कि जजपा ने अपने घोषणा पत्र में इस पेंशन को 2 हजार रुपये से बढ़ाकर 5100 रुपये करने का वादा किया था। अब जजपा सरकार में भाजपा की सहयोगी है। जजपा सरकार पर इस बारे में लगातार दबाव भी बना रही है, अब देखना यह है कि यह गठबंधन सरकार प्रदेश में लाभार्थियों की पेंशन बढ़ोतरी को किस राशि तक ले जाती है। इसके अलावा, प्रदेश के वे कामगार मजदूर जिन्हें सन्निर्माण एवं कामगार बोर्ड द्वारा 2500 रुपये मासिक पेंशन मिलती हैं, ऐसे लाभार्थी मजदूरों को भी अब 250 रुपये बढ़ोतरी के साथ 2750 रुपये पेंशन मिलेगी।
सैलजा का ट्वीट- जुमला साबित हुई पेंशन बढ़ोतरी
सरकार के इस फैसले पर राज्यसभा सदस्य व हरियाणा प्रदेश कांग्रेस कमेटी की अध्यक्ष कुमारी सैलजा ने चुटकी ली है। ट्वीट कर सैलजा ने कहा है कि सरकार की पेंशन बढ़ोतरी जुमला साबित हुई। प्रदेश की भोली जनता के साथ गठबंधन सरकार का एक और विश्वासघात किया है। इस वर्ष सिर्फ 250 रुपये पेंशन बढ़ोतरी की गई है। सैलजा के अनुसार जनता के मतों से विश्वासघात कर बनी गठबंधन सरकार के कॉमन मिनिमम प्रोग्राम का पर्दाफाश धीरे-धीरे होने लगा है।
न्याय प्रक्रिया को अब हिंदी में समझ सकेंगे लोग
हरियाणा मंत्रिमंडल ने फैसला लिया है कि पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के अधीनस्थ हरियाणा की सभी अदालतों व ट्रिब्यूनल में अदालती कामकाज हिंदी में होगा। यहां अंग्रेजी अब वैकल्पिक भाषा के रूप में मानी जाएगी। हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल की अध्यक्षता में आयोजित मंत्रीमंडल की बैठक में पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के अधीनस्थ न्यायालयों व अधिकरणों में हिंदी भाषा के उपयोग के संबंध में हरियाणा राजभाषा अधिनियम, 1969 के संशोधन को लाने के लिए एक प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की।
हरियाणा सरकार को हरियाणा राज्य के 78 विधायकों, हरियाणा के महाधिवक्ता और सैकड़ों अधिवक्ताओं द्वारा हस्ताक्षरित एक मांग पत्र भी प्राप्त हुआ है। जिसके बाद मुख्यमंत्री ने न्यायालयों में उपयोग के लिए हिंदी भाषा को अधिकृत करने हतु अपनी रुचि भी व्यक्त की है, ताकि हरियाणा के नागरिक पूरी न्याय प्रक्रिया को अपनी भाषा में समझ सकें और आसानी से न्यायालयों के समक्ष अपने विचार रख सकें।
सीएम मनोहर लाल ने कहा कि हालांकि पंजाब की अदालतों में कामकाज पहले से ही पंजाबी में होता है, यूं कहें तो हरियाणा इसमें थोड़ा पीछे रह गया। लेकिन अब हरियाणा भी अदालतों में हिंदी में कामकाज अनिवार्य करने जा रही है। उल्लेखनीय है कि भारत के अधिवक्ताओं, बुद्धिजीवियों और न्यायविदों द्वारा शुरू किया गया भारतीय भाषा अभियान इस दिशा में भी काम कर रहा है कि भारत के न्यायालयों में भारतीय भाषाओं में काम शुरू किया जाना चाहिए। इसलिए, पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय में हिन्दी भाषा के प्रयोग को अधिकृत करना विवेक सम्मत है।
मृतक कर्मचारी के परिवार की मदद राशि बढ़ी
हरियाणा सरकार ने मृतक सरकारी कर्मचारी के परिवार हेतु अनुग्रह अनुदान 25 हजार रुपये से बढ़ाकर 1 लाख रुपये कर दिया है। जोकि पिछले 30 वर्षों से संशोधित नहीं किया गया था। इसके अलावा लापता सरकारी कर्मचारी का परिवार अब प्राथमिकी दर्ज होने की तिथि से केवल छह महीने बाद अनुकंपा वित्तीय सहायता का लाभ पाने का हकदार होगा।
कैबिनेट बैठक में सेवा के दौरान मृत्यु को प्राप्त हुए या लापता हुए सरकारी कर्मचारियों के परिवार के सदस्यों के लिए हरियाणा सिविल सेवाएं (अनुकंपा वित्तीय सहायता या अनुकंपा नियुक्ति) नियम, 2019 के नाम से नई एक्सग्रेसिया स्कीम को स्वीकृति प्रदान की गई। नई योजना पहली अगस्त 2019 से लागू होगी। नई योजनाओं में, ग्रुप-सी या डी के पद पर अनुकंपा नियुक्ति या मृतक कर्मचारी की आयु के आधार पर 15,12,7 वर्ष की अवधि के लिए मासिक वित्तीय सहायता की अनुमति दी गई है।
नई योजना के तहत अनुकंपा नियुक्ति दी जा सकेगी, बशर्ते कि मृतक कर्मचारी की आयु 52 वर्ष से अधिक न हो। उसने न्यूनतम 5 साल की नियमित सेवा पूरी कर ली हो और अनुकंपा नियुक्ति मृतक कर्मचारी द्वारा धारण किए गए अंतिम वेतनमान से कम वेतनमान वाले ग्रुप-सी या डी पद पर दी जाएगी। जो सरकारी कर्मचारी बहादुरी और असाधारण साहस का प्रदर्शन करते हुए कार्यवाही में मारा गया हो, उसका परिवार 52 वर्ष की आयु या न्यूनतम 5 साल के सेवाकाल की शर्त के बिना अनुकंपा वित्तीय सहायता और अनुकंपा नियुक्ति, दोनों का लाभ उठाने का पात्र होगा।
इसके साथ ही मकान किराया भत्ता या सरकारी आवास की अनुमति एक वर्ष के बजाय दो वर्ष की अवधि के लिए दी गई है। अन्य लाभ अर्थात बारहवीं तक बाल शिक्षा भत्ता, स्नातक तक की ट्यूशन फीस और निर्धारित चिकित्सा भत्ता अपरिवर्तित रहेंगे। इसके अलावा संशोधित योजना के तहत ग्रुप-सी या डी के मृतक कर्मचारियों के सभी ऋण और अग्रिम राशि भी पहले की तरह माफ की जाएगी। लंबित मामलों, जहां परिवार ने पुराने नियमों के तहत कोई लाभ नहीं लिया है, में 2019 की नई योजना या 2006 की पुरानी योजना के तहत लाभ लेने का विकल्प होगा।
हरियाणा में अब हर तेजाब पीड़िता को वित्तीय मदद
हरियाणा में अब हर तेजाब पीड़िता को वित्तीय मदद मिलेगी। मुख्यमंत्री मनोहर लाल की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल बैठक में तेजाब पीड़ित महिलाओं और लड़कियों की वित्तीय सहायता योजना में संशोधन को स्वीकृति प्रदान की गई। अभी तक 2 मई 2011 या उसके बाद तेजाब हमले से पीड़ित महिलाओं व लड़कियों को ही वित्तीय मदद दी जाती थी जो घटना की तीथि से कम से कम तीन वर्ष पहले से हरियाणा में रह रही हो। अब हरियाणा में रह रहीं सभी तेजाब पीड़ितों को वित्तीय लाभ मिलेगा। योजना के तहत वित्तीय सहायता के लिए आवेदन करने के बाद पीड़िता को वर्तमान तिथि से वित्तीय सहायता दी जाएगी। मंत्रिमंडल ने यह भी निर्णय लिया है कि तेजाबी हमले की पीड़ितों को कोई बकाया राशि नहीं मिलेगी।
अब मेडिकल, डेंटल कालेजों में आर्थिक कमजोरों को आरक्षण
इस प्रकार, अनुसूचित जाति, पिछड़े वर्गों तथा भूतपूर्व सैनिकों के साथ-साथ आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों (ईडब्ल्यूएस) के प्रार्थियों को भी 10 प्रतिशत के आरक्षण का लाभ मिलेगा। जिसके लिए सीटों की संख्या भी बढ़ाई जाएंगी। इससे हरियाणा के आर्थिक कमजोर वर्ग के लोगों को बड़ा फायदा मिलेगा।
अब सटीक डाटा के साथ तैयार होंगे सरकारी योजनाएं
हरियाणा से जुड़े परिवारों का सटीक डाटा उपलब्ध हो और विभागों की भावी जनहित संबंधी योजनाएं भी इसी डाटा पर आधारित हों, ताकि जनता तक इन योजनाओं का लाभ प्रभावशाली ढंग से पहुंच सके। इसके लिए सरकार ने एक नए विभाग का श्रीगणेश किया है। जिसे मंत्रिमंडल की बैठक में मंजूरी मिल गई है। इस विभाग का नाम नागरिक संसाधन सूचना विभाग होगा।
निर्णय के अनुसार राज्य सरकार की योजनाओं के कार्यान्वयन और डिजिटल साधनों के माध्यम से सरकारी सेवाओं की प्रदायगी के लिए सांझा डेटाबेस सृजित करने हेतु परिवार पहचान पत्र पर बल देने के उद्देश्य से यह नया विभाग सृजित किया जाएगा।
नया विभाग परिवार पहचान पत्र, सरकार से नागरिकों को सेवाओं की प्रदायगी हेतु भू-सूचना विज्ञान सहित सूचना विज्ञान और सूचना अवसंरचना के इस्तेमाल से सांझा डेटाबेस के रूप में नागरिक संसाधन सूची विकसित करने, विभागों में सांझा डेटाबेस को प्रोत्साहित करने और विकसित करने से संबंधित विषयों के लिए काम करेगा।
अब विभागों की रिपोर्टों का भी होगा आंकलन
झज्जर नपा को अब नगर परिषद का दर्जा
मुख्यमंत्री ने बताया कि मंत्रिमंडल बैठक में झज्जर नगरपालिका को नगर परिषद का दर्जा देने का निर्णय लिया गया है। उन्होंने बताया कि हर 10 वर्ष के अंतराल बाद होने वाली जनगणना के आंकड़ों को आधार मानकर स्थानीय निकायों का दर्जा बढ़ाया जाता है। हर वर्ष जनसंख्या में अनुपातिक वृद्धि होती रहती है जिसके चलते सरकार द्वारा यह निर्णय लिया गया है। इससे पूर्व भी अंबाला नगरपरिषद को नगरनिगम का दर्जा दिया गया था।
10 विभागों में आनलाइन ट्रांसफर अप्रैल के बाद
हरियाणा के करीब 10 विभाग ऐसे हैं, जिनमें अप्रैल के बाद आनलाइन ट्रांसफर पॉलिसी लागू हो जाएगी। कर्मचारियों की ऑनलाइन स्थानांतरण नीति के एक सवाल के जवाब में सीएम ने कहा कि शिक्षा विभाग के अलावा 500 से अधिक कर्मचारियों की संख्या वाले 10 विभागों ने आनलाइन स्थानांतरण नीति का प्रारूप तैयार कर लिया है। लेकिन यह व्यवस्था अगले वित्ती वर्ष यानी अप्रैल के बाद लागू होगी और जुलाई तक तबादला प्रक्रिया को संपन्न कर लिया जाएगा। ताकि विभागों में कामकाज प्रभावित न हो।
फिल्म पॉलिसी में बदलाव, प्रमोशन बोर्ड बनाया, सतीश कौशिक चेयरमैन
गवर्निंग काउंसिल हरियाणा फिल्म नीति के प्रावधानों का क्रियान्वयन करेगी। इसे कार्यकारी समिति का मार्गदर्शन करने के साथ परियोजनाओं के अनुमोदन और धनराशि जारी करने के लिए उपयुक्त अधिकार दिए गए हैं। मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने बताया कि हरियाणवीं और गैर-हरियाणवीं सिनेमा के विकास और फिल्म निर्माण के लिए अनुकूल माहौल बनाने के मद्देनजर यह निर्णय लिया है। सितंबर 2016 में हरियाणा फिल्म नीति की घोषणा की गई थी। फिल्म नीति का उद्देश्य हरियाणा में फिल्म उद्योग का विकास करना और सिनेमा के विकास के लिए अनुकूल वातावरण उपलब्ध करवाना है।
प्रदेश में फिल्मों के लिए विद्यमान अपार संभावनाओं का सही ढंग से दोहन करने के लिए प्रमोशन बोर्ड काम करेगा। 17 अक्टूबर 2018 की अधिसूचना के तहत हरियाणा फिल्म नीति लागू की गई है। अधिसूचना के तहत हरियाणा फिल्म नीति के प्रावधानों को लागू करने के लिए हरियाणा फिल्म सेल बनाया गया था। सेल में सरकारी अधिकारियों, पेशेवरों और फिल्म उद्योग से विशेषज्ञों को मिलाकर एक कार्यकारी समिति और उच्चाधिकार समिति का गठित की गई थी।
वर्तमान और भविष्य की जरूरतों को देखते हुए अब सेल को खत्म कर प्रमोशन बोर्ड बनाया गया है। फिल्म नीति में बदलाव से पहले मुख्यमंत्री मनोहर के प्रधान विशेष कार्य अधिकारी नीरज दफ्तुआर व मीडिया सलाहकार अमित आर्य ने मुंबई जाकर सतीश कौशिक और अन्य फिल्मकारों से विस्तृत बातचीत की। उसके बाद उनके सुझावों को मद्देनजर रखते हुए पॉलिसी में संशोधन किया गया।
राज्यपाल पर हाईकोर्ट में भी हिंदी लागू करवाने का दारोमदार
बहरहाल, इस कड़ी में हरियाणा सरकार ने राज्यपाल सत्यदेव नारायण आर्य को पत्र भी लिख दिया है। जिसके बाद राज्यपाल पर अब हाईकोर्ट में हिंदी लागू करवाने का दारोमदार है। राज्यपाल के मार्फत ही इस संदर्भ में प्रस्ताव देश के राष्ट्रपति को भेजा जाएगा और राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद ही हाईकोर्ट में यह व्यवस्था लागू हो पाएगी। लेकिन इस मामले में एक पेच यह है कि चंडीगढ़ स्थित हाईकोर्ट पंजाब और हरियाणा का संयुक्त हाईकोर्ट है।
इस संदर्भ में बातचीत के दौरान सीएम मनोहर लाल ने कहा कि हाईकोर्ट में कम से कम हरियाणा से जुड़े केसों में तो हिंदी में लिखे आदेश की प्रति लोगों को जारी की जा सकती है, मेरा मानना है कि इसमें कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए। सीएम के अनुसार इस संदर्भ में राज्यपाल को पत्र लिख दिया है, ताकि प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सके। मंत्रिमंडल की बैठक में भी इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की स्वीकृति दी गई है। सीएम के अनुसार राष्ट्रपति की अनुमति के बाद यह व्यवस्था संभव है।
उनके अनुसार राजभाषा अधिनियम, 1963 की धारा 7 में राष्ट्रपति के पूर्व सहमति सहित राज्य के राज्यपाल को अधिकार है कि वे किसी भी निर्णय के प्रयोजनों के लिए अंग्रेजी भाषा के अलावा हिंदी या राज्य की आधिकारिक भाषा के उपयोग को, उच्च न्यायालय द्वारा पारित या किए गए निर्णय, डिक्री या आदेश अधिकृत किया जा सकता है। जहां कोई भी निर्णय, डिक्री या आदेश पारित किया जाता है या ऐसी किसी भी भाषा में किया जा सकता है (अंग्रेजी भाषा के अलावा), उच्च न्यायालय के अधिकार के तहत जारी की गई भाषा में यह अंग्रेजी में उसी के अनुवाद के साथ होगा।