हरियाणा में लिंगानुपात की स्थिति, एक नजर में
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पानीपत से आज देशभर में ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ अभियान का आगाज हो रहा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने हरियाणा को इसलिए चुना कि देशभर में बाल लिंगानुपात के बदतर हालात यहीं है।
झारखंड, बिहार और छत्तीसगढ़ जैसे पिछड़े राज्यों से भी कम। धन-धान्य, आर्थिक संपदा से परिपूर्ण फिर भी बेटियां बोझ लग रही हैं, चिंताजनक है।
प्रदेश की हकीकत जानकर आप चौंक जाएंगे, लेकिन सच है, भयावह है। महेंद्रगढ़, रेवाड़ी, झज्जर, भिवानी, सोनीपत, गुड़गांव, रोहतक, पलवल, फतेहाबाद, कैथल आदि ऐसे जिले हैं, जहां सैकड़ों गांवों में वर्ष 2014 में एक भी बेटी ने जन्म नहीं लिया है।
देश में सबसे कम बाल लिंगानुपात वाले महेंद्रगढ़ जिले की नारनौल तहसील का गांव चिंडालिया तो एक बानगी है, जिले के 60 गांव, फतेहाबाद के 63 और करनाल के सात गांव ऐसे हैं, जहां पिछले एक साल में एक भी बेटी नहीं जन्मी। इसी प्रकार रोहतक जिले के शिमली में वर्ष 2014 का बाल लिंगानुपात 400 और नौनंद का 450 रहा।
कोख में कत्ल का कारोबार हरियाणा में जारी
बाल लिंगानुपात की इस स्थिति से साफ जाहिर है कि तमान कानूनों और प्रशासनिक मशीनरी की निगरानी के बावजूद प्रदेश में ‘कोख में कत्ल का कारोबार’ बदस्तूर जारी हैं। कार्रवाई के नाम पर चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग महज खानापूर्ति कर रहा है।
प्रदेश भर में पिछले एक साल में पीएनडीटी एक्ट के तहत महज 26 एफआईआर दर्ज की गई और 22 अल्ट्रासाउंड सेंटर सीज किए गए। कई जिलों में लड़कों के मुकाबले लड़कियां पैदा होने की स्थिति बेहद खराब है।
महेंद्रगढ़, रेवाड़ी, झज्जर, भिवानी सोनीपत, गुड़गांव, रोहतक, पलवल, फतेहाबाद व कैथल ऐसे जिले हैं, जहां लड़कों के मुकाबले लड़कियां कम पैदा हुईं।
प्रदेश के हर जिले की तस्वीर भयावह
बेटियों को बचाने के लिए हर तरफ मुहिम छेड़ी जा रहा है। सामाजिक संगठनों से लेकर प्रदेश और केंद्र सरकार तक इसके लिए प्रयासरत है, लेकिन प्रदेश की स्थिति में कुछ खास सुधार नहीं हो रहा है। बेटियों की घटती संख्या बेटों की चाह में कन्या का कोख में कत्ल करने की ओर इशारा कर रही है।
प्रदेश में बेटियों को बचाने के काफी प्रयास के बावजूद स्थिति उलटे बिगड़ती जा रही है। हरियाणा का एक भी जिला ऐसा नहीं है, जिसे लिंगानुपात को लेकर आदर्श कहा जा सके। क्योंकि एक हजार बेटों पर पर 954 बेटियां होने पर स्थिति ठीक मानी जाती है, लेकिन यहां कोई भी जिला इसकेआस-पास तक नहीं है।
हाल यह है कि 2011 की जनगणना के आंकड़ों के मुकाबले 2014 में प्रदेश में जन्मे बच्चों में बेटियों की संख्या और कम हो गई है। यदि नौ जिलों को छोड़ दिया जाए तो बाकी जिलों की तस्वीर काफी भयावह है। 2014 में जन्मे बच्चों का पूरे प्रदेश का औसत लिंगानुपात एक हजार बेटों पर 871 बेटियों का है। जबकि 2011 की जनगणना में यह 877 था।
एक दशक बाद स्थिति और भयवाह होगी
प्रदेश में वर्तमान में जो भयावह तस्वीर सामने आ रही है, उससे कहीं ज्यादा एक दशक बाद होने वाली है। क्योंकि 2011 की जनगणना के 0 से 6 साल के बच्चों के सेक्स रेशो के आंकड़े सामान्य लिंगानुपात के आंकड़ों से कहीं डरावने हैं। ऐसे में इन बच्चों की शादी की उम्र तक बेटों के मुकाबले बेटियों की संख्या काफी कम होगी, जिससे सामाजिक संतुलन और बिगड़ेगा।
महेंद्रगढ़, रेवाड़ी, झज्जर, भिवानी, सोनीपत, गुड़गांव, अंबाला, यमुनानगर, कुरुक्षेत्र, रोहतक, करनाल, कैथल, फरीदाबाद, पानीपत और जींद जिले में 0 से 6 आयु वर्ग के बच्चों में एक हजार लड़कों पर 850 बेटियां भी नहीं हैं। कुछ जिलों में तो संख्या 800 से भी कम है।
बेहद शर्मनाक है लिंगानुपात के हालात
प्रदेश में कुछ जिले ऐसे हैं, जहां बाल लिंगानुपात की स्थिति शर्मनाक हैं। शिक्षा का स्तर ठीक होने के बावजूद इन जिलों में बेटियों का कोख में कत्ल किया जा रहा है। सबसे बुरी स्थिति महेंद्रगढ़ जिले की है, जहां बाल लिंगानुपात पूरे देश में सबसे कम 756 है। इसे जिले की नारनौल सीएचसी के 60 गांवों में तो पिछले एक साल में एक भी बेटी पैदा नहीं हुई। इसी प्रकार करनाल जिले के सात गांवों में बिटिया ने जन्म नहीं लिया।
उम्मीद की किरण फिर भी कहीं बाकी है
प्रदेश में कुछ जिले ऐसे भी हैं, जो शिक्षा में भले ही पिछड़े हैं, लेकिन बेटियां बचाने में आगे हैं। मेवात प्रदेश का सबसे पिछड़ा जिला है। यहां साक्षरता दर 56.1 है और महिला साक्षरता 37.6 है, लेकिन बाल लिंगानुपात प्रदेश में सबसे ज्यादा 916 है।
इसी प्रकार पलवल में महिला साक्षरता 56.4 है, लेकिन यहां 1000 पर 883 बेटियां हैं। नवंबर 2014 तक के आंकड़ों के मुताबिक मेवात में 916, पंचकूला में 915, सिरसा में 897, जींद में 891 और पानीपत जिले का बाल लिंगानुपात 890 हैं।
बेटियां बचाने में ये जिले सबसे पीछे
बाल लिंगानुपात के मामले में हरियाणा में देश में सबसे बदतर हालात हैं। वर्ष 2011 की जनगणना के मुताबिक राष्ट्रीय बाल लिंगानुपात 914 की तुलना में यहां 1000 बेटों पर महज 830 बेटियां हैं।
हरियाणा में वर्ष 2014 में बाल लिंगानुपात कुछ प्वाइंट बढ़कर 846 तक पहुंचा, लेकिन कुछ जिलों में अब भी शर्मनाक हालात हैं। महेंद्रगढ़ (756), रेवाड़ी (804), झज्जर (816) व भिवानी (839) वो जिले हैं, जहां बेटे-बेटियों का अनुपात राज्य के अनुपात से भी कम हैं।