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Chandigarh News: बजट से उम्मीदें... केंद्र सरकार से विशेष राहत, कर्ज माफी और एमएसपी बढ़ाने की मांग
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-बजट से सीमांत किसानों को राहत मिलने की उम्मीद
-- -
पंकज शर्मा
अमृतसर। पंजाब के सीमांत जिलों अमृतसर, तरनतारन, गुरदासपुर, पठानकोट, फिरोजपुर और फाजिल्का के किसान लंबे समय से कठिन परिस्थितियों में खेती कर रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय सीमा के निकट ये इलाके बीएसएफ सुरक्षा, पहचान पत्र और अचानक लगाए गए प्रतिबंधों के चलते रोजमर्रा के कामों में बाधाओं का सामना कर रहे हैं। ऐसे में केंद्रीय बजट 2026-27 से इन्हें विशेष राहत की उम्मीद है।
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने केंद्रीय गृह मंत्री से मुलाकात के बाद बार्डर पर लगी कंटीली तार को पीछे हटाने का एलान किया, जिससे किसानों को सहूलियत मिलेगी। आल इंडिया किसान सभा के नेता लखबीर सिंह ने कहा कि सीमांत किसानों की सबसे बड़ी मांग कर्ज माफी है। लगातार बढ़ती लागत और प्राकृतिक आपदाओं के कारण किसान कर्ज के बोझ तले दबे हैं।
जम्हूरी किसान सभा के डॉ. सतनाम सिंह ने बिजली के स्मार्ट मीटरों को लेकर नाराजगी जताई। उनका कहना है कि बिल अचानक बढ़ रहे हैं और किसानों की क्षमता से बाहर हैं। किसानों ने मुफ्त या सस्ती बिजली की व्यवस्था बनाए रखने और पुराने बकाया बिलों का समाधान करने की मांग की। फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) और कृषि उत्पादों की सरकारी खरीद भी किसानों की प्राथमिकता है। कृषि आदानों पर सब्सिडी, बेहतर बीज और आधुनिक कृषि औजारों की उपलब्धता, फसल बीमा योजना में पारदर्शिता और समय पर मुआवजा देने की भी मांग उठी है।
इसके अलावा सीमांत किसानों के लिए पेंशन योजना, कृषि आधारित उद्योग और रोजगार के अवसर सृजित करने की उम्मीद है। धान और गेहूं की पराली के व्यावहारिक समाधान से पर्यावरण संरक्षण और जुर्माने की समस्या भी हल हो सकती है। कुल मिलाकर सीमांत जिलों के किसान इस बार बजट से ठोस नीतियों की आशा लगाए बैठे हैं। सही फैसलों से उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होने के साथ देश की खाद्य सुरक्षा भी बढ़ेगी। संवाद
बजट से अपेक्षित राहत
-कर्ज माफी, एमएसपी बढ़ोतरी, बिजली सब्सिडी, कृषि उपकरण पर छूट।
-फसल बीमा योजना में सुधार और समय पर मुआवजा।
-सीमांत किसानों के लिए रोजगार और पेंशन योजना।
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पंकज शर्मा
अमृतसर। पंजाब के सीमांत जिलों अमृतसर, तरनतारन, गुरदासपुर, पठानकोट, फिरोजपुर और फाजिल्का के किसान लंबे समय से कठिन परिस्थितियों में खेती कर रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय सीमा के निकट ये इलाके बीएसएफ सुरक्षा, पहचान पत्र और अचानक लगाए गए प्रतिबंधों के चलते रोजमर्रा के कामों में बाधाओं का सामना कर रहे हैं। ऐसे में केंद्रीय बजट 2026-27 से इन्हें विशेष राहत की उम्मीद है।
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने केंद्रीय गृह मंत्री से मुलाकात के बाद बार्डर पर लगी कंटीली तार को पीछे हटाने का एलान किया, जिससे किसानों को सहूलियत मिलेगी। आल इंडिया किसान सभा के नेता लखबीर सिंह ने कहा कि सीमांत किसानों की सबसे बड़ी मांग कर्ज माफी है। लगातार बढ़ती लागत और प्राकृतिक आपदाओं के कारण किसान कर्ज के बोझ तले दबे हैं।
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जम्हूरी किसान सभा के डॉ. सतनाम सिंह ने बिजली के स्मार्ट मीटरों को लेकर नाराजगी जताई। उनका कहना है कि बिल अचानक बढ़ रहे हैं और किसानों की क्षमता से बाहर हैं। किसानों ने मुफ्त या सस्ती बिजली की व्यवस्था बनाए रखने और पुराने बकाया बिलों का समाधान करने की मांग की। फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) और कृषि उत्पादों की सरकारी खरीद भी किसानों की प्राथमिकता है। कृषि आदानों पर सब्सिडी, बेहतर बीज और आधुनिक कृषि औजारों की उपलब्धता, फसल बीमा योजना में पारदर्शिता और समय पर मुआवजा देने की भी मांग उठी है।
इसके अलावा सीमांत किसानों के लिए पेंशन योजना, कृषि आधारित उद्योग और रोजगार के अवसर सृजित करने की उम्मीद है। धान और गेहूं की पराली के व्यावहारिक समाधान से पर्यावरण संरक्षण और जुर्माने की समस्या भी हल हो सकती है। कुल मिलाकर सीमांत जिलों के किसान इस बार बजट से ठोस नीतियों की आशा लगाए बैठे हैं। सही फैसलों से उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होने के साथ देश की खाद्य सुरक्षा भी बढ़ेगी। संवाद
बजट से अपेक्षित राहत
-कर्ज माफी, एमएसपी बढ़ोतरी, बिजली सब्सिडी, कृषि उपकरण पर छूट।
-फसल बीमा योजना में सुधार और समय पर मुआवजा।
-सीमांत किसानों के लिए रोजगार और पेंशन योजना।
