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Chhattisgarh: प्रदेश में सबसे कम बारिश, बेमेतरा जिला जल अभावग्रस्त क्षेत्र घोषित, नलकूप खनन पर रोक

अमर उजाला नेटवर्क, बेमेतरा Published by: अनुज कुमार Updated Wed, 31 Dec 2025 08:40 PM IST
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सार

प्रदेश में सबसे कम बारिश के कारण बेमेतरा जिला आगामी ग्रीष्म ऋतु में गंभीर पेयजल संकट की आशंका से जूझ रहा है। इस मानसून में जिले में औसत वार्षिक वर्षा 906 मिमी के मुकाबले मात्र 552 मिमी वर्षा दर्ज की गई है।

Bemetara district declared a water-scarce area drilling of borewells prohibited
कलेक्टर प्रतिष्ठा ममगाई ने आदेश जारी किया - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

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प्रदेश में सबसे कम बारिश के कारण बेमेतरा जिला आगामी ग्रीष्म ऋतु में गंभीर पेयजल संकट की आशंका से जूझ रहा है। इस मानसून में जिले में औसत वार्षिक वर्षा 906 मिमी के मुकाबले मात्र 552 मिमी वर्षा दर्ज की गई है। इस स्थिति को देखते हुए, पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन ने कड़े कदम उठाए हैं। कलेक्टर प्रतिष्ठा ममगाई ने संपूर्ण बेमेतरा जिले को 1 जनवरी 2026 से 30 जून 2026 अथवा मानसून के आगमन तक (जो भी बाद में हो) जलाभावग्रस्त क्षेत्र घोषित कर दिया है। यह निर्णय जिले में गिरते भू-जल स्तर और संभावित जल संकट को ध्यान में रखकर लिया गया है।

नलकूप खनन पर प्रतिबंध और नियम उल्लंघन पर कार्रवाई
जलाभावग्रस्त क्षेत्र घोषित होने के कारण, उक्त अवधि में किसी भी सक्षम अधिकारी की पूर्व अनुमति के बिना नए नलकूपों का खनन पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। पेयजल के अतिरिक्त किसी अन्य प्रयोजन के लिए भी नलकूप खनन की अनुमति नहीं होगी। हालांकि, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग और स्थानीय निकायों को केवल पेयजल आपूर्ति के लिए अपने सीमा क्षेत्र में नलकूप खनन की अनुमति होगी, बशर्ते वे खनन कराए गए नलकूपों की जानकारी संबंधित प्राधिकृत अधिकारी को उपलब्ध कराएं। नियम का उल्लंघन करने वाले व्यक्ति या एजेंसी के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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किसानों से जल संरक्षण और फसल विविधीकरण की अपील
प्रशासन ने आम नागरिकों से जल संरक्षण में सहयोग करने और अनावश्यक जल दोहन से बचने की अपील की है। वहीं, कृषि विभाग ने किसानों से जल संरक्षण को ध्यान में रखते हुए अधिक पानी की आवश्यकता वाली फसलों के स्थान पर चना, मटर, अरहर जैसी दलहन और तिलहन फसलों को अपनाने का आग्रह किया है। इससे न केवल उत्पादन लागत में कमी आएगी, बल्कि आय में भी स्थायित्व सुनिश्चित होगा। इन उपायों से जिले को संभावित जल संकट से बचाने में मदद मिलेगी।

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