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छत्तीसगढ़ उल्लास महाचौपाल 15 अगस्त को: सरेंडर नक्सलियों और कैदियों ने भी दिए एग्जाम, जानें कैसा रहा रिजल्ट

Thu, 06 Aug 2026 10:27 AM IST
Lalit Kumar Singh अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर Published by: Lalit Kumar Singh Updated Thu, 06 Aug 2026 10:27 AM IST
सार

Chhattisgarh News: छत्तीसगढ़ में 15 अगस्त को पूरे प्रदेश में उल्लास महा-चौपाल लगेगी। स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने सितम्बर 2026 में होने वाली उल्लास महापरीक्षा में बढ़-चढ़कर भाग लेने की अपील की है।

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Chhattisgarh Ullas Mahachaupal on 15 August in CG
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : Amar Ujala Digital

विस्तार

Chhattisgarh News: छत्तीसगढ़ में 15 अगस्त को पूरे प्रदेश में उल्लास महा-चौपाल लगेगी। स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने सितम्बर 2026 में होने वाली उल्लास महापरीक्षा में बढ़-चढ़कर भाग लेने के लिये अनुरोध किया है। दूसरी ओर स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग और राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान की ओर से राज्यव्यापी उल्लास महापरीक्षा अभियान का परीक्षा परिणाम घोषित कर दिया गया है। छत्तीसगढ़ का कुल परीक्षा परिणाम 89.44 फीसदी रहा। 

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इस परीक्षा में कुल 3 लाख 93 हजार 661 परीक्षार्थी में से 3 लाख 52 हजार 089 शिक्षार्थी सफल घोषित हुए। महिला में 2 लाख 68 हजार 048 महिला सफलता परीक्षार्थियों में 2 लाख 41 हजार 593 उत्तीर्ण हुईं। पुरुष परीक्षार्थियों  1 लाख 25 हजार 531में से 1 लाख 10हजार 416 उत्तीर्ण घोषित किए गए है। 92 ट्रांसजेंडर परीक्षार्थियों में से 80 उत्तीर्ण हुए।
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सात जिलों ने हासिल की 100 फीसदी सफलता
प्रदेश के बालोद, धमतरी, कबीरधाम (कवर्धा), खैरागढ़-छुईखदान, कोरिया, महासमुंद और सूरजपुर जिलों ने 100 प्रतिशत परीक्षा परिणाम हासिल कर उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। इसके अलावा रायपुर में 68.24 प्रतिशत, नारायणपुर में 64.19 प्रतिशत, मुंगेली में 62.94प्रतिशत और बीजापुर में 56.15 प्रतिशत परीक्षार्थी सफल रहे।
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सरेंडर नक्सलियों और बंदियों ने पाई कामयाबी
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के निर्देश पर नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में शिक्षा और पुनर्वास पर दिए गए विशेष जोर का असर इस परीक्षा में दिखाई दिया। बस्तर, नारायणपुर, दंतेवाड़ा, बीजापुर और गरियाबंद जिलों के पुनर्वास केंद्रों में रह रह रहे 651 आत्मसमर्पित नक्सलियों में से 651 आत्मसमर्पित नक्सलियों ने मुख्यधारा से जुड़कर परीक्षा दी। नारायणपुर, सुकमा, कांकेर, मुंगेली, कोरबा, सक्ती और खैरागढ़-छुईखदान जेल से 190 बंदियों ने परीक्षा में शामिल होकर मिसाल पेश किया है।


उम्र को दी मात 
इतना ही नहीं पति-पत्नी, सास-बहू, दादा-पोता के साथ-साथ बुजुर्गों का उत्साह देखने लायक था। गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही के धोबहर निवासी 86 वर्षीय मोहन लाल गुप्ता और 75 वर्षीय लक्ष्मी सोनी ने परीक्षा देकर यह साबित किया कि सीखने की कोई उम्र नहीं होती।

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