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Jhiram Ghati: रमन बोले- नहीं भूल सकते झीरम घाटी नक्सल हमले की पीड़ा को, अब नक्सलवाद पर निर्णायक लड़ाई हुई पूरी

अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर Published by: Lalit Kumar Singh Updated Mon, 25 May 2026 03:20 PM IST
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सार

Jhiram Ghati Naxal Attack: 25 मई 2013 का वो दिन छत्तीसगढ़ कभी नहीं भूल सकता। कांग्रेसियों के लिये यह काला दिन के समान है।

Jhiram Ghati Naxal Attack: Raman Singh remembered Jhiram Ghati Naxal attack CG
ग्रॉफिक्स: अमर उजाला डिजिटल - फोटो : Amar ujala digital
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विस्तार

Jhiram Ghati Naxal Attack: 25 मई 2013 का वो दिन छत्तीसगढ़ कभी नहीं भूल सकता। कांग्रेसियों के लिये यह काला दिन के समान है। हम बात कर रहे हैं झीरम घाटी नक्सल हमले की। इस बड़े नक्सली हमले को आज पूरे 13 साल हो गये। छत्तीसगढ़ विधानसभा अध्यक्ष रमन सिंह ने इस दिन को याद करते हुए ट्वीट कर अपनी पीड़ा व्यक्त की है। 




उन्होंने ट्वीट कर लिखा कि 'झीरम घाटी नक्सल हमले की पीड़ा को छत्तीसगढ़ की भूमि कभी भूल नहीं सकती। इस कायराना नक्सली हमले में अपने प्राणों की आहुति देने वाले प्रदेश के वरिष्ठ नेताओं, जनप्रतिनिधियों एवं वीर जवानों को मैं विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करता हूँ। उनका बलिदान सदैव हमें लोकतंत्र और जनसेवा के प्रति समर्पण की प्रेरणा देता रहेगा। उन सभी शहीदों का बलिदान व्यर्थ नहीं गया है। आज प्रदेश में नक्सलवाद के विरुद्ध निर्णायक लड़ाई पूरी हुई है। हमारी सरकार ने सुरक्षा बलों के साहस, जनसहयोग और मजबूत संकल्प के साथ छत्तीसगढ़ को नक्सलवाद से मुक्त करने में सफलता प्राप्त की है। अब बस्तर को विकास की मुख्यधारा से जोड़ना हमारे शहीदों के लिए सच्ची श्रद्धांजलि है।
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यहां पढ़ें झीरम घाटी नक्सल हमले की पूरी कहानी...

साल 2013 में हुई थी खूनी घटना
बता दें कि साल 2013 के अंत में छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव होने थे। यहां लगातार दो चुनावों से भाजपा का राज कायम था और रमन सिंह मुख्यमंत्री थे। वहीं, 10 साल से सत्ता से दूर कांग्रेस जीतने की पुरजोर कोशिश में लगी थी। इसी कड़ी में कांग्रेस ने पूरे राज्य में परिवर्तन यात्रा निकालने की तैयारी की, जिसकी शुरुआत 25 मई के दिन सुकमा से की गई। 







रैली खत्म होने के बाद हुआ हमला
रैली खत्म होने के बाद कांग्रेस नेताओं का काफिला सुकमा से जगदलपुर लौट रहा था। उस काफिले में करीब 25 गाड़ियां थीं, जिनमें करीब 200 नेता सवार थे। सबसे आगे कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष नंदकुमार पटेल, उनके बेटे दिनेश पटेल और कवासी लखमा अपने-अपने सुरक्षा गार्ड्स के साथ थे। इनके पीछे महेंद्र कर्मा और मलकीत सिंह गैदू की गाड़ियां थीं। वहीं, बस्तर के तत्कालीन कांग्रेस प्रभारी उदय मुदलियार कुछ अन्य नेताओं के साथ चल रहे थे। छत्तीसगढ़ कांग्रेस के सभी दिग्गज नेता इस काफिले में शामिल थे।






नक्सलियों ने ताबड़तोड़ बरसाईं गोलियां
शाम करीब चार बजे कांग्रेस नेताओं का काफिला झीरम घाटी से गुजरने लगा तो नक्सलियों ने पेड़ गिराकर रास्ता बंद कर दिया। इससे पहले कि कोई कुछ समझ पाता, पेड़ों के पीछे छिपे 200 से ज्यादा नक्सलियों ने ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी। नक्सलियों ने सभी गाड़ियों को निशाना बनाया। इस बड़े नक्सल हमले में नंदकुमार पटेल और उनके बेटे दिनेश पटेल की मौके पर ही मौत हो गई। बताया जाता है कि नक्सलियों ने करीब डेढ़ घंटे तक अंधाधुन फायरिंग की।






एक-एक को ढूंढकर मारा
शाम करीब साढ़े पांच बजे नक्सली पहाड़ों से उतर आए और एक-एक गाड़ी चेक करने लगे। जो लोग गोलीबारी में मारे जा चुके थे, उन्हें फिर से गोली और चाकू मारे गए, जिससे कोई भी जिंदा न बचे। वहीं जिंदा बचे लोगों को बंधक बना लिया गया। इसी बीच एक गाड़ी से महेंद्र कर्मा नीचे उतरे और बोले कि मुझे बंधक बना लो, बाकियों को छोड़ दो। नक्सलियों ने महेंद्र कर्मा की बेरहमी से हत्या कर दी। इस हमले में छत्तीसगढ़ कांग्रेस के उस वक्त के अधिकांश बड़े नेता और सुरक्षा बल के जवान शहीद हो गए थे। 







'बस्तर टाइगर' महेंद्र कर्मा को़ ऐसे उतारा मौत के घाट 
माना जाता है कि इस हमले में मुख्य टारगेट बस्तर टाइगर महेंद्र कर्मा थे। सलवा जुडूम का नेतृत्व करने की वजह से नक्सली उन्हें अपना सबसे बड़ा दुश्मन मानते थे। नक्सलियों ने उनके शरीर पर करीब 100 गोलियां दागीं और चाकू से 50 से ज्यादा वार किए। हत्या के बाद नक्सलियों ने उनके शव पर चढ़कर डांस भी किया था।






हमले में 32 लोग हुए थे दिवंगत
इस बड़े नक्सली हमले में बस्तर टाइगर महेंद्र कर्मा, नंदकुमार पटेल, विद्याचरण शुक्ल, उदय मुदलियार, योगेंद्र शर्मा समेत कुल 30 लोग दिवंगत हो गए थे। मामले में कांग्रेस ने बीजेपी सरकार पर सुरक्षा में लापरवाही बरतने और राजनीतिक षड़यंत्र रचने का आरोप लगाया था। झीरम हमला में लोकतंत्र पर बड़ा हमला था। कांग्रेस की एक पूरी पीढ़ी इस हमले में खत्म हो गई थी। 32  से ज्यादा लोग मारे गए थे। 
 

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