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Raigarh: फर्जी बिल-वाउचर बनाकर ट्रांसपोर्ट कंपनी से 32 लाख की धोखाधड़ी, फरार आरोपी को पुलिस ने किया गिरफ्तार
Fri, 31 Jul 2026 07:53 PM IST
रायगढ़ ब्यूरो
अमर उजाला नेटवर्क, रायगढ़
अमर उजाला नेटवर्क, रायगढ़
Published by: रायगढ़ ब्यूरो
Updated Fri, 31 Jul 2026 07:53 PM IST
सार
फर्जी बिल-वाउचर बनाकर ट्रांसपोर्ट कंपनी से 32 लाख की धोखाधड़ी करने वाले आरोपी को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी चार माह से फरार चल रहा था। मामला सिटी कोतवाली थाना क्षेत्र का है।
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फरार आरोपी गिरफ्तार
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विस्तार
छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में फर्जी बिल-वाउचर बनाकर ट्रांसपोर्ट कंपनी से 32 लाख की धोखाधड़ी मामले में फरार चल रहे एक आरोपी को पुलिस ने चार माह बाद गिरफ्तार करके जेल भेज दिया है। मामला सिटी कोतवाली थाना क्षेत्र का है।
मिली जानकारी के अनुसार 24 मार्च को श्रीराम ट्रांसपोर्ट के संचाललक कमल किशोर शाह ने सिटी कोतवाली थाने में रिपोर्ट दर्ज कराते हुए बताया था कि उनके यहां कार्यरत प्रकाश मिश्रा और दीपक शर्मा ट्रांसपोर्ट वाहनों के बिल-वाउचर तैयार कर भुगतान के लिए प्रस्तुत करते थे। भुगतान के दौरान एक ही क्रमांक के कई वाउचर मिलने पर जांच की गई, जिसमें सितंबर 2025 से लगातार फर्जीवाड़ा सामने आया। जांच में पाया गया कि एक ही वाउचर नंबर पर अलग-अलग वाहनों के नाम से डुप्लीकेट वाउचर तैयार कर भुगतान कराया गया तथा संदीप बंसल, जासमिन बंजारा, नेहा चौहान, सूर्यकांत अग्रवाल, कमल बसोड़ एवं प्रियंका गुप्ता के खातों का उपयोग कर कंपनी से करीब 32 लाख की राशि धोखाधड़ी से निकाली गई। इस शिकायत के बाद सिटी कोतवाली पुलिस आरोपियों के खिलाफ धारा 316(5), 338, 336(3), 340(2), 60 बीएनएस के अंतर्गत अपराध दर्ज कर जांच शुरू की गई।
पुलिस ने जांच के दौरान प्रस्तुत बिल-वाउचरों में अंकित वाहन नंबरों का सत्यापन क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय से कराया गया। जांच में कई वाहन नंबर दोपहिया एवं छोटे निजी वाहनों के निकले, जिनका श्रीराम ट्रांसपोर्ट अथवा माल परिवहन कार्य से कोई संबंध नहीं था। वाहन स्वामियों ने भी पुलिस को स्पष्ट बताया कि उन्होंने कभी उक्त ट्रांसपोर्ट कंपनी के लिए कोई परिवहन कार्य नहीं किया। सिटी कोतवाली पुलिस फरार आरोपियों की तलाश में जुटी हुई थी, दौरान मुखबिर से सूचना मिली कि फरार आरोपी दीपक शर्मा अपने मोहल्ले में देखा गया है। जिसके बाद पुलिस ने आरोपी को हिरासत में लेकर पूछताछ करने पर बताया कि श्रीराम ट्रांसपोर्ट में कार्यरत ऑपरेटर प्रकाश मिश्रा के साथ मिलकर फर्जी बिल-वाउचर तैयार करता था और विभिन्न वाहन नंबरों का उपयोग कर भुगतान करवाता था।
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आरोपी ने बताया कि जिन लोगों के खातों में राशि भेजी जाती थी, वे कमीशन काटकर शेष रकम वापस उसके और प्रकाश मिश्रा द्वारा बताए गए बैंक खातों, क्यूआर कोड एवं फोन-पे नंबरों पर ट्रांसफर कर देते थे। आरोपी के अनुसार करीब 32 लाख की धोखाधड़ी में से लगभग 16-17 लाख प्रकाश मिश्रा एवं दीपक प्रधान को दिए गए, जबकि उसे लगभग 15 लाख प्राप्त हुए, जिनमें से करीब 4 लाख उसने अपनी मां के इलाज में तथा शेष राशि घूमने-फिरने एवं व्यक्तिगत खर्चों में खर्च कर दी। पर्याप्त साक्ष्य मिलने पर आरोपी को विधिवत गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेजा गया।
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मिली जानकारी के अनुसार 24 मार्च को श्रीराम ट्रांसपोर्ट के संचाललक कमल किशोर शाह ने सिटी कोतवाली थाने में रिपोर्ट दर्ज कराते हुए बताया था कि उनके यहां कार्यरत प्रकाश मिश्रा और दीपक शर्मा ट्रांसपोर्ट वाहनों के बिल-वाउचर तैयार कर भुगतान के लिए प्रस्तुत करते थे। भुगतान के दौरान एक ही क्रमांक के कई वाउचर मिलने पर जांच की गई, जिसमें सितंबर 2025 से लगातार फर्जीवाड़ा सामने आया। जांच में पाया गया कि एक ही वाउचर नंबर पर अलग-अलग वाहनों के नाम से डुप्लीकेट वाउचर तैयार कर भुगतान कराया गया तथा संदीप बंसल, जासमिन बंजारा, नेहा चौहान, सूर्यकांत अग्रवाल, कमल बसोड़ एवं प्रियंका गुप्ता के खातों का उपयोग कर कंपनी से करीब 32 लाख की राशि धोखाधड़ी से निकाली गई। इस शिकायत के बाद सिटी कोतवाली पुलिस आरोपियों के खिलाफ धारा 316(5), 338, 336(3), 340(2), 60 बीएनएस के अंतर्गत अपराध दर्ज कर जांच शुरू की गई।
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पुलिस ने जांच के दौरान प्रस्तुत बिल-वाउचरों में अंकित वाहन नंबरों का सत्यापन क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय से कराया गया। जांच में कई वाहन नंबर दोपहिया एवं छोटे निजी वाहनों के निकले, जिनका श्रीराम ट्रांसपोर्ट अथवा माल परिवहन कार्य से कोई संबंध नहीं था। वाहन स्वामियों ने भी पुलिस को स्पष्ट बताया कि उन्होंने कभी उक्त ट्रांसपोर्ट कंपनी के लिए कोई परिवहन कार्य नहीं किया। सिटी कोतवाली पुलिस फरार आरोपियों की तलाश में जुटी हुई थी, दौरान मुखबिर से सूचना मिली कि फरार आरोपी दीपक शर्मा अपने मोहल्ले में देखा गया है। जिसके बाद पुलिस ने आरोपी को हिरासत में लेकर पूछताछ करने पर बताया कि श्रीराम ट्रांसपोर्ट में कार्यरत ऑपरेटर प्रकाश मिश्रा के साथ मिलकर फर्जी बिल-वाउचर तैयार करता था और विभिन्न वाहन नंबरों का उपयोग कर भुगतान करवाता था।
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आरोपी ने बताया कि जिन लोगों के खातों में राशि भेजी जाती थी, वे कमीशन काटकर शेष रकम वापस उसके और प्रकाश मिश्रा द्वारा बताए गए बैंक खातों, क्यूआर कोड एवं फोन-पे नंबरों पर ट्रांसफर कर देते थे। आरोपी के अनुसार करीब 32 लाख की धोखाधड़ी में से लगभग 16-17 लाख प्रकाश मिश्रा एवं दीपक प्रधान को दिए गए, जबकि उसे लगभग 15 लाख प्राप्त हुए, जिनमें से करीब 4 लाख उसने अपनी मां के इलाज में तथा शेष राशि घूमने-फिरने एवं व्यक्तिगत खर्चों में खर्च कर दी। पर्याप्त साक्ष्य मिलने पर आरोपी को विधिवत गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेजा गया।