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छत्तीसगढ़ में जंगल का रक्षक ही निकला शिकारी: डिप्टी रेंजर समेत 9 गिरफ्तार, बाघ-तेंदुआ शिकार कांड उजागर
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
Published by: अमन कोशले
Updated Thu, 19 Mar 2026 12:00 PM IST
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सार
छत्तीसगढ़ में वन एवं वन्यजीव संरक्षण को लेकर वन विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए बाघ और तेंदुए के अवैध शिकार में शामिल डिप्टी रेंजर समेत 9 आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
पुलिस के गिरफ्त में आरोपी
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
छत्तीसगढ़ में वन एवं वन्यजीव संरक्षण को लेकर वन विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए बाघ और तेंदुए के अवैध शिकार में शामिल डिप्टी रेंजर समेत 9 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई दंतेवाड़ा और बीजापुर के जंगलों में की गई, जहां लंबे समय से शिकार की गतिविधियों की सूचना मिल रही थी।
वन विभाग को लगातार इनपुट मिल रहे थे कि कुछ लोग जंगल में फंदे लगाकर वन्यजीवों का शिकार कर रहे हैं। इसके बाद विभाग और राज्य उड़नदस्ता टीम ने संयुक्त अभियान चलाया। निगरानी और जांच के दौरान एक संगठित शिकार गिरोह का खुलासा हुआ। जांच में यह भी सामने आया कि वन विभाग का ही एक कर्मचारी, डिप्टी रेंजर देवी प्रसाद ओयाम, इस पूरे नेटवर्क में शामिल था।
आरोप है कि डिप्टी रेंजर की मिलीभगत से शिकारियों को जंगल में प्रवेश और गतिविधियों को अंजाम देने में मदद मिली। शिकार के लिए लोहे के तार से बने फंदों का इस्तेमाल किया गया, जिनमें मांस लगाकर बाघ और तेंदुए को फंसाया गया। फंदे में फंसने से दोनों वन्यजीवों की मौत हो गई। बरामद बाघ की उम्र करीब तीन वर्ष बताई गई है।
जांच में यह भी खुलासा हुआ कि आरोपी वन्यजीवों की खाल को रायपुर ले जाकर बेचने की योजना बना रहे थे। पूछताछ के आधार पर केशापुर गांव में दबिश देकर तेंदुए की खाल बरामद की गई। इस दौरान मासो ओयाम और अर्जुन भोगामी को भी गिरफ्तार किया गया। मामले में लक्ष्मण तेलाम, देवीराम ओयाम, रमेश कुड़ियाम, फरसोन पोयामी, सेमला रमेश, सुखराम पोडियाम और छत्रू कुड़ियाम समेत अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी की गई है।
वनमंडलाधिकारी दंतेवाड़ा रामकृष्णा के अनुसार बाघ और तेंदुआ दोनों ही अनुसूची-1 के तहत संरक्षित वन्यजीव हैं। सभी आरोपियों के खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर उन्हें न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है।
वन मंत्री केदार कश्यप ने इस कार्रवाई को लेकर कहा कि राज्य में वन और वन्यजीवों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि शिकार जैसे गंभीर अपराध में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा, चाहे वह किसी भी पद पर क्यों न हो।
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वन विभाग को लगातार इनपुट मिल रहे थे कि कुछ लोग जंगल में फंदे लगाकर वन्यजीवों का शिकार कर रहे हैं। इसके बाद विभाग और राज्य उड़नदस्ता टीम ने संयुक्त अभियान चलाया। निगरानी और जांच के दौरान एक संगठित शिकार गिरोह का खुलासा हुआ। जांच में यह भी सामने आया कि वन विभाग का ही एक कर्मचारी, डिप्टी रेंजर देवी प्रसाद ओयाम, इस पूरे नेटवर्क में शामिल था।
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आरोप है कि डिप्टी रेंजर की मिलीभगत से शिकारियों को जंगल में प्रवेश और गतिविधियों को अंजाम देने में मदद मिली। शिकार के लिए लोहे के तार से बने फंदों का इस्तेमाल किया गया, जिनमें मांस लगाकर बाघ और तेंदुए को फंसाया गया। फंदे में फंसने से दोनों वन्यजीवों की मौत हो गई। बरामद बाघ की उम्र करीब तीन वर्ष बताई गई है।
जांच में यह भी खुलासा हुआ कि आरोपी वन्यजीवों की खाल को रायपुर ले जाकर बेचने की योजना बना रहे थे। पूछताछ के आधार पर केशापुर गांव में दबिश देकर तेंदुए की खाल बरामद की गई। इस दौरान मासो ओयाम और अर्जुन भोगामी को भी गिरफ्तार किया गया। मामले में लक्ष्मण तेलाम, देवीराम ओयाम, रमेश कुड़ियाम, फरसोन पोयामी, सेमला रमेश, सुखराम पोडियाम और छत्रू कुड़ियाम समेत अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी की गई है।
वनमंडलाधिकारी दंतेवाड़ा रामकृष्णा के अनुसार बाघ और तेंदुआ दोनों ही अनुसूची-1 के तहत संरक्षित वन्यजीव हैं। सभी आरोपियों के खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर उन्हें न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है।
वन मंत्री केदार कश्यप ने इस कार्रवाई को लेकर कहा कि राज्य में वन और वन्यजीवों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि शिकार जैसे गंभीर अपराध में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा, चाहे वह किसी भी पद पर क्यों न हो।