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MP: बड़वाह में 48 घंटे में 100 से अधिक तोतों की मौत, बर्ड फ्लू की आशंका खारिज; जानें विशेषज्ञों ने क्या कहा?

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, खरगोन Published by: अमर उजाला ब्यूरो Updated Wed, 31 Dec 2025 07:06 PM IST
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सार

खरगोन जिले के बड़वाह क्षेत्र में एक्वाडक्ट पुल के पास 48 घंटे के भीतर 100 से अधिक तोतों की मौत से हड़कंप मच गया। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में बर्ड फ्लू की पुष्टि नहीं हुई, जबकि गलत भोजन और फूड पॉइजनिंग को मौत का कारण बताया गया है।

More than 100 parrots have died
बड़ी संख्या में तोतों की मौत हो गई।
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विस्तार
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खरगोन के बड़वाह से करीब तीन किलोमीटर दूर स्थित एक्वाडक्ट पुल के आसपास पिछले 48 घंटों में 100 से अधिक तोतों की रहस्यमय परिस्थितियों में मौत का मामला सामने आया है। बड़ी संख्या में पक्षियों के मृत मिलने से क्षेत्र में हड़कंप मच गया। शुरुआत में बर्ड फ्लू की आशंका जताई जा रही थी, लेकिन पशु चिकित्सालय की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में इस संभावना को पूरी तरह खारिज कर दिया गया है।

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जांच में सामने आया है कि तोतों की मौत का कारण फूड पॉइजनिंग और अनुपयुक्त भोजन है। जानकारी के अनुसार, बीते दो दिनों से पुल और उसके आसपास के इलाके में लगातार मृत तोते दिखाई दे रहे थे। इसकी सूचना मिलते ही वन्यजीव प्रेमी और स्थानीय नागरिक मौके पर पहुंचे। वाइल्डलाइफ एक्टिविस्ट टोनी शर्मा ने बताया कि रेस्क्यू अभियान के दौरान कुछ तोते जीवित अवस्था में भी मिले थे, लेकिन विषाक्त भोजन का प्रभाव इतना गंभीर था कि उपचार के बावजूद उनकी जान नहीं बचाई जा सकी।

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पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में बर्ड फ्लू से संबंधित कोई भी लक्षण नहीं पाए गए
इसके बाद सभी मृत तोतों के शव पोस्टमॉर्टम के लिए बड़वाह पशु चिकित्सालय भेजे गए। पशु चिकित्सक डॉ. मनीषा चौहान ने बताया कि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में बर्ड फ्लू से संबंधित कोई भी लक्षण नहीं पाए गए हैं। वहीं पशु चिकित्सा विस्तार अधिकारी डॉ. सुरेश बघेल ने बताया कि जांच के दौरान तोतों के पेट में पका हुआ चावल और छोटे-छोटे कंकड़ पाए गए हैं। इससे स्पष्ट होता है कि पक्षियों ने ऐसा भोजन किया, जो उनके पाचन तंत्र के लिए अनुकूल नहीं था।

'लापरवाही इस घटना की मुख्य वजह हो सकती है'
वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि कई बार लोग धार्मिक भावना या दया के कारण पुलों और सार्वजनिक स्थानों पर पक्षियों को पका हुआ या बचा हुआ भोजन डाल देते हैं। ऐसा भोजन पक्षियों के लिए बेहद घातक साबित हो सकता है। टोनी शर्मा ने आशंका जताई कि यही लापरवाही इस घटना की मुख्य वजह हो सकती है।


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इसके अलावा यह संभावना भी जताई जा रही है कि खेतों में कीटनाशकों के छिड़काव के बाद वहां पड़ा दाना खाने से भी पक्षियों की मौत हुई हो। जहरीले रसायन अनजाने में पक्षियों के शरीर में पहुंचकर जानलेवा प्रभाव डालते हैं। स्थानीय पक्षी प्रेमियों ने प्रशासन और आम नागरिकों से अपील की है कि पक्षियों को केवल कच्चा अनाज जैसे ज्वार, बाजरा, मक्का और गेहूं—ही खिलाएं। पका हुआ, मसालेदार या बचा हुआ भोजन पक्षियों के लिए जानलेवा साबित हो सकता है।

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