खरगोन पुलिस ने डिजिटल अरेस्ट के नाम पर आम नागरिकों को डराकर ठगी करने वाले एक शातिर अंतरराज्यीय साइबर ठग गिरोह का खुलासा किया है। पुलिस ने इस मामले में राजस्थान के फलौदी से दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जो फर्जी जांच एजेंसियों के नाम पर लोगों से लाखों रुपये की ठगी कर रहे थे। आरोपियों के कब्जे से पुलिस ने 3 लाख 1 हजार 900 रुपये नकद, 17 बैंक व एटीएम कार्ड, 10 चेकबुक, 5 पासबुक, 2 मोबाइल फोन और 4 सिम कार्ड जब्त किए हैं। यह कार्रवाई पुलिस अधीक्षक रविन्द्र वर्मा के निर्देशन में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) शकुन्तला रुहल एवं एसडीओपी बड़वाह अर्चना रावत के मार्गदर्शन में थाना प्रभारी सनावद निरीक्षक रामेश्वर ठाकुर के नेतृत्व में की गई।
थाना सनावद क्षेत्र निवासी 80 वर्षीय रिटायर्ड प्रोफेसर शशिकांत कुलकर्णी ने 15 जनवरी 2026 को थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। उन्होंने बताया कि 9 जनवरी को उनके मोबाइल पर एक व्हाट्सएप कॉल आया, जिसमें कॉल करने वाले ने स्वयं को एनआईए मुख्यालय का अधिकारी बताया। आरोपी ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में गिरफ्तार एक आतंकी के पास उनकी पत्नी के बैंक खाते से जुड़े दस्तावेज मिले हैं, जिनमें करीब 7 करोड़ रुपये के लेन-देन का उल्लेख है।
आरोपियों ने उनके और उनकी पत्नी के नाम से गिरफ्तारी वारंट जारी होने की बात कहकर व्हाट्सएप पर फर्जी नोटिस भेजे और सहयोग न करने पर तत्काल गिरफ्तारी की धमकी दी। इसके बाद आरोपियों ने तीन दिन तक लगातार कॉल चालू रखवाकर पीड़ित से 10 लाख रुपये आरटीजीएस के माध्यम से अलग-अलग बैंक खातों में जमा करवा लिए। बाद में ठगी का अहसास होने पर पीड़ित ने पुलिस में शिकायत की।
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मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने एनसीआरपी पोर्टल पर शिकायत दर्ज कर बैंक खातों का तकनीकी विश्लेषण किया। जांच में सामने आया कि ठगी की राशि बैंगलोर स्थित बैंक खातों के माध्यम से राजस्थान निवासी वीरेंद्र के अकाउंट में गई थी। इसके बाद पुलिस टीम राजस्थान भेजी गई, जहां से वीरेंद्र पिता रुपाराम जावा (19) निवासी फलौदी और रामस्वरूप पिता घेवरराम विश्नोई (21) निवासी फलौदी को गिरफ्तार किया गया।
पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया कि उनके साथी अरविंद और संजय बैंगलोर से कॉल कर लोगों को डराते थे, जबकि वे खाते से पैसे निकालकर उन्हें सौंपते थे। आरोपियों ने तमिलनाडु में भी एक व्यक्ति से 17 लाख रुपये की ठगी करना स्वीकार किया है। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि डिजिटल अरेस्ट जैसा कोई कानून नहीं है और नागरिक इस प्रकार की कॉल से सतर्क रहें। फरार आरोपियों की तलाश जारी है।