खरगोन जिले के कसरावद क्षेत्र में प्रकृति के अप्रत्याशित प्रहार ने खेतों में लहलहाती रबी फसलों को बर्बादी के कगार पर ला खड़ा किया। मौसम ने अचानक करवट ली और तेज हवा, आंधी-तूफान, बारिश के साथ गिरी ओलावृष्टि ने किसानों की महीनों की मेहनत पर पानी फेर दिया। करीब 20 से 25 मिनट चले इस कहर का असर इतना गहरा रहा कि कई गांवों में फसलें पूरी तरह धराशायी हो गईं।
स्थानीय स्तर पर मिली जानकारी के अनुसार कसरावद नगर सहित आसपास के 15 से 16 गांव इस प्राकृतिक आपदा की चपेट में आए। तेज हवाओं के साथ गिरे चने के आकार के ओलों ने गेहूं, चना, मक्का के साथ-साथ खरबूजा और पपीता जैसी नकदी फसलों को भी भारी नुकसान पहुंचाया। अधिकांश फसलें कटाई के बिल्कुल नजदीक थीं, ऐसे में ओलावृष्टि से दानों की गुणवत्ता पर भी प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
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किसानों का कहना है कि जिन फसलों से साल भर की आजीविका की उम्मीद रहती है, वे कुछ ही मिनटों में जमीन में बिछ गईं। कई खेतों में फसल इतनी बिछ गई है कि अब कटाई के लिए अतिरिक्त मशीनरी और मजदूरी पर खर्च करना पड़ेगा, जबकि उत्पादन मिलने की संभावना बेहद कम रह गई है। इससे किसानों की आर्थिक चिंता और बढ़ गई है।
मौसम की मार के बाद प्रशासन भी सक्रिय हुआ है। राजस्व और कृषि विभाग के अमले को प्रभावित गांवों में पहुंचकर स्थिति का जायजा लेने और क्षति का आकलन करने के निर्देश दिए गए हैं। प्रारंभिक जांच में कई फसलों में गंभीर नुकसान सामने आया है। अधिकारियों के अनुसार सर्वे रिपोर्ट तैयार कर उच्च स्तर पर भेजी जाएगी, ताकि आगे की प्रक्रिया शुरू की जा सके।
ओलावृष्टि और बारिश के बाद कुछ क्षेत्रों में खेतों में पानी भरने से नुकसान और बढ़ गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जल्द राहत और उचित मुआवजा नहीं मिला, तो किसानों पर कर्ज का दबाव और बढ़ सकता है। अचानक आई इस आपदा ने पूरे कसरावद अंचल में किसानों को मायूसी के साये में छोड़ दिया है और सभी की नजरें अब प्रशासनिक निर्णयों पर टिकी हुई हैं।