तहसील महेश्वर क्षेत्र के सब्जी उत्पादक किसानों का नुकसान सामने आया है। करेला की खेती करने वाले किसानों ने आरोप लगाया है कि उनकी पूरी फसल बर्बाद हो गई, जिससे किसानों को प्रति एकड़ करीब 10 लाख रुपये तक की भारी आर्थिक क्षति उठानी पड़ी है। किसानों ने इस गंभीर मामले को लेकर कलेक्टर कार्यालय में मंगलवार को लगी जनसुनवाई में आक्रमक रुख अपनाते हुए दोषियों पर कार्रवाई और मुआवजा देने की मांग की है। किसान जनसुनवाई में किसान अपने साथ पौधे भी लेकर पहुंचे, जिनमें फल नहीं लगे हुए थे। नारेबाजी करते हुए किसानों ने मुआवजा दिलाने की मांग की है।
किसानों ने बताया कि उन्होंने किसान हाईटेक नर्सरी सिरलाय बड़वाह से करेला फसल की बीएएसएफ रूबोस्टा किस्म के पौधे खरीदकर अपने खेतों में लगाए थे। फसल रोपण के बाद लगभग 80 से 90 दिन बीत जाने के बावजूद करेला में न तो पर्याप्त फल आए और न ही उत्पादन हुआ। जो थोड़े बहुत फल लगे, वे भी पीले पड़कर समय से पहले झड़ गए, जिससे पूरी खेती चौपट हो गई।
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किसान सुनील पाटीदार, परमानंद पाटीदार आदि का कहना है कि करेला जैसी नकदी फसल में बीज, पौध, दवा, खाद, मजदूरी और सिंचाई पर भारी लागत आती है। फसल नष्ट होने से अब उनके सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। परिवार के भरण-पोषण की चिंता भी गहरा गई है। जनसुनवाई में सौंपे गए आवेदन में किसानों ने मांग की है कि कृषि विभाग, उद्यानिकी विभाग एवं वैज्ञानिकों की संयुक्त टीम गठित कर तत्काल खेतों का निरीक्षण कराया जाए। किसानों को वर्तमान बाजार भाव के अनुसार क्षतिपूर्ति राशि दिलाई जाए।
किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई और उन्हें न्याय नहीं मिला, तो वे आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे। इस मामले में अपर कलेक्टर रेखा राठौड़ ने किसानों का आवेदन लेकर उद्यानिकी विभाग को निर्देश दिए हैं।