10 रुपए में बिकने वाले पतंजलि दूध बिस्कुट के पैकेट में घोषित वजन से कम मात्रा मिलने का मामला सामने आने के बाद नाप-तौल विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है।
संजय पाटणकर सहायक नियंत्रक नापतौल विभाग उज्जैन संभाग ने बताया कि शिवानी सिसौदिया ने एक कंपनी के दूध बिस्कुट खरीदने के बाद वजन में कमी पाई थी। उन्होंने घरेलू सामान के साथ बिस्कुट का पैकेट रिलायंस स्मार्ट प्वाइंट से खरीदा था। घर पर बिस्कुट गिनकर खाने की आदत के कारण उन्हें पता चला कि बिस्कुट कम भरे गए हैं। जब उन्होंने दूसरे पैकेट पर देखा तो 70 ग्राम वजन अंकित था, लेकिन जब उन्होंने पास की किराना दुकान पर वजन कराया तो वास्तविक वजन मात्र 52 ग्राम निकला। उपभोक्ता शिवानी का आरोप था कि जब उन्होंने स्टोर कर्मचारियों से शिकायत की तो उन्हें गंभीरता से नहीं लिया गया और यह कहकर टाल दिया गया कि केवल 10 रुपए के बिस्कुट के लिए शिकायत करना बेकार है। इसके बाद उन्होंने उपभोक्ता अधिकारों की जानकारी प्राप्त कर जागरूक उपभोक्ता समिति के माध्यम से नाप-तौल विभाग में लिखित शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत के बाद जांच की गई और निर्माता-विक्रेता, मार्केटिंग सहित रिलायंस स्मार्ट प्वाइंट पर भी जुर्माना लगाया गया।
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यह की गई कार्रवाई
सहायक नियंत्रक नापतौल विभाग संजय पाटणकर ने बताया कि शिकायत पर संज्ञान लेते हुए वैधानिक माप विज्ञान (लीगल मेट्रोलॉजी) विभाग इंदौर-2 ने जांच की है । जांच में पैकेज्ड कमोडिटी नियमों के उल्लंघन की पुष्टि हुई, जिसके बाद प्रकरण दर्ज कर संबंधित कंपनियों और उनके जिम्मेदार अधिकारियों पर जुर्माना लगाया गया है। विभागीय आदेश के अनुसार बिस्किट बनाने वाली कंपनी सहित अन्य 8 कंपनियों को दोषी पाया गया। अधिकांश मामलों में प्रत्येक आरोपी पर 5,000 रुपये का जुर्माना लगाया गया, जबकि एक प्रकरण में 15,000 रुपये का अर्थदंड निर्धारित किया गया। कुल मिलाकर 55,000 रुपये का जुर्माना शासन के खाते में जमा कराने के निर्देश दिए गए हैं। विभाग ने बताया कि संबंधित कंपनियों द्वारा लीगल माप विज्ञान अधिनियम, 2009की धारा 18 और 36 (1) तथा पैकेज्ड कमोडिटी नियम, 2011 के नियम 2, 4, 6और 18 का उल्लंघन किया गया। इन नियमों के अनुसार पैकेज्ड खाद्य सामग्री पर वजन, मात्रा, निर्माण तिथि, उपभोक्ता विवरण और अन्य अनिवार्य जानकारी स्पष्ट रूप से अंकित होना आवश्यक है और घोषित मात्रा से कम सामग्री देना उपभोक्ता धोखाधड़ी की श्रेणी में आता है। नाप-तौल विभाग के निरीक्षक केआर चौधरी ने बताया कि जुर्माने की राशि एमपी ट्रेजरी पोर्टल के माध्यम से या कोषालय में चालान द्वारा जमा कराई जाएगी। निर्धारित समय सीमा में राशि जमा नहीं करने पर आरोपियों के विरुद्ध न्यायालय में प्रकरण प्रस्तुत किया जाएगा।