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Blog: कहीं आप आत्ममुग्ध तो नहीं, जिम्मेदारी दिखाकर रिश्तों में सुधार संभव

क्रिस्टीना कैरन, द न्यूयॉर्क टाइम्स Published by: नितिन गौतम Updated Sun, 01 Feb 2026 06:34 AM IST
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सार

व्यक्ति नार्सिसिस्ट, यानी आत्ममुग्ध है या नहीं, इसके लिए आप उससे शांत माहौल में इस बारे में बात कर सकते हैं, लेकिन यह शेर के पिंजरे में जाने जैसा भी हो सकता है।

Are you self-absorbed It possible to improve relationships by showing responsibility
ब्लॉग - फोटो : फ्रीपिक
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विस्तार
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दशकों पहले, नार्सिसिज्म या आत्ममुग्ध शब्द का इस्तेमाल नैदानिक परिवेश व शोध अध्ययन के कमरे के बाहर शायद ही कभी किया जाता था। लेकिन आज, यह पसंद न आने वाले या परेशान करने वाले कई तरह के व्यवहारों के लिए एक सामान्य संकेत बन गया है। मिशिगन में ऑकलैंड यूनिवर्सिटी में मनोविज्ञान के प्रोफेसर वर्जिल जिग्लर-हिल कहती हैं कि नार्सिसिस्ट वह व्यक्ति होता है, जिसे खुद को विशेष और अलग महसूस करने की तीव्र इच्छा होती है। इसमें कुछ लोग अहंकारी, आत्मकेंद्रित और प्रशंसा की तलाश में रहते हैं, पर इसका मतलब यह नहीं कि उनमें नार्सिसिस्ट पर्सनैलिटी डिसऑर्डर (एनपीडी) है।
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एनपीडी एक गंभीर स्थिति है, जिसके लिए विशेष चिकित्सकीय मापदंड होते हैं, जैसे लगातार आत्म-महत्व की भावना व दूसरों के प्रति सहानुभूति की कमी और लगातार प्रशंसा की आवश्यकता। विशेषज्ञ बताते हैं कि नार्सिसिज्म केवल एक मानसिक विकार नहीं है, बल्कि यह एक व्यक्तित्व की विशेषता है, जो अलग-अलग लोगों में भिन्न-भिन्न स्तर पर हो सकती है। नार्सिसिज्म को लेकर कई मिथक मौजूद हैं। पहला, जिनमें एनपीडी होता है, वे बेहद हानिकारक होते हैं। दूसरा, सभी नार्सिसिस्ट समान होते हैं, जबकि ऐसा नहीं है। एजेंटिक नार्सिसिस्ट आत्मविश्वासी व महत्वाकांक्षी होते हैं। न्यूरोटिक नार्सिसिस्ट लगातार मान्यता की तलाश में रहते हैं और आलोचना से असुरक्षित महसूस करते हैं।
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एंटागोनिस्टिक नार्सिसिस्ट प्रतिस्पर्धी व कभी-कभी दूसरों को नीचा दिखाने वाले होते हैं। बर्न यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर उलरिच ऑर्थ कहती हैं कि नार्सिसिस्ट कोई स्थिर गुण नहीं है। यह वयस्क होने के साथ धीरे-धीरे कम होता जाता है, क्योंकि जैसे-जैसे हम बड़े होते हैं, सहानुभूति बढ़ती जाती है। डॉ. जिग्लर-हिल कहती हैं कि एजेंटिक या विरोधी नार्सिसिस्टिक आदतों वाले लोग अक्सर मदद लेने से कतराते हैं, क्योंकि वे इसकी जरूरत महसूस नहीं करते, या इलाज को कमजोरी का संकेत मान लेते हैं। वह कहती हैं कि माता-पिता जब अपने किसी एक बच्चे को ज्यादा प्रेम करते हैं, तो दूसरे बच्चे में नार्सिसिस्ट लक्षणों के विकास की संभावना बढ़ जाती है।

व्यक्ति नार्सिसिस्ट है या नहीं, यह जानने के लिए आप शांत माहौल में उससे उसकी भावनाओं के बारे में बात करने की कोशिश कर सकते हैं। डॉ. दुर्वासुला इसे ‘शेर के पिंजरे में जाना’ कहती हैं। वह कहती हैं कि जब नार्सिसिस्ट जिम्मेदारी दिखाते हैं, तब रिश्तों में सुधार और व्यक्तिगत विकास संभव है।
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