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India-Bangladesh Border: आखिर कितनी लंबी है भारत बांग्लादेश सीमा, कैसे होगा पूरा काम?

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सार

भारत-बांग्लादेश के बीच की अंतर्राष्ट्रीय सीमा की कुल लंबाई 4,096.7 किलोमीटर है। यह भारत की सबसे लंबी स्थलीय सीमा है, जो दुनिया की 5वीं सबसे बड़ी जमीनी सीमा भी है। यह सीमा भारत के 5 राज्यों से होकर गुजरती है। 

bengal bangladesh border west bengal government approval for transfer of land to the BSF for fencing border
भारत-बांग्लादेश सीमाः बीएसएफ की महिला जवान (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

प्रधानमंत्री मोदी और गृह मंत्री शाह दोनों ही बंगाल विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान कहते रहे कि बंगाल में भाजपा की सरकार बनते ही 45 दिनों में बंगाल-बांग्लादेश सीमा पर बाड़ लगाने का काम पूरा किया जाएगा। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी अपनी पहली कैबिनेट के बैठक में पहला निर्णय इसी पर लिया।



बंगाल और बांग्लादेश के बीच 2,216.7 किलोमीटर लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा है। बंगाल के कुल 9 जिले बांग्लादेश के साथ अंतरराष्ट्रीय सीमा साझा करते हैं। कूच बिहार, जलपाईगुड़ी, दार्जिलिंग, उत्तर दिनाजपुर, दक्षिण दिनाजपुर, मालदा, मुर्शिदाबाद, नदिया और उत्तर 24 परगना।
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भारत-बांग्लादेश के बीच की अंतर्राष्ट्रीय सीमा की कुल लंबाई 4,096.7 किलोमीटर है। यह भारत की सबसे लंबी स्थलीय सीमा है, जो दुनिया की 5वीं सबसे बड़ी जमीनी सीमा भी है। यह सीमा भारत के 5 राज्यों से होकर गुजरती है।

 

  • बंगाल- 2,216.7 किलोमीटर,
  • त्रिपुरा- 856 किलोमीटर,
  • मेघालय- 443 किलोमीटर,
  • मिजोरम- 318 किलोमीटर
  • असम- 263 किलोमीटर।


बंगाल बांग्लादेश के साथ 2,216.7 किलोमीटर में से करीब 569 किलोमीटर की असुरक्षित सीमा साझा करता है, लेकिन मालदा और मुर्शिदाबाद का इलाका सबसे बदनाम माना जाता है. यहां बाड़ न होने के कारण बांग्लादेशी घुसपैठिए आसानी से सीमा पार कर भारत आ जाते हैं। बिना फेंसिंग के बाकी बचे करीब 113 किलोमीटर सीमा एरिया ऐसा है, जहां नदी-तालाब की वजह से किसी भी सूरत में बाड़बंदी नहीं की जा सकती। 


भौगोलिक कारणों से कुछ क्षेत्रों में नदियों और रेतीले किनारों के कारण स्थायी कांटेदार बाड़ लगाना मुश्किल होता है, जिसके लिए सरकार फ्लोटिंग बीओपी और फ्लडलाइटिंग जैसे वैकल्पिक निगरानी उपायों का उपयोग करती है। इस सीमा की सुरक्षा और निगरानी का कार्य सीमा सुरक्षा बल द्वारा ही किया जाता है। 

घुसपैठ रही है बड़ी चिंता

पूर्व राज्य सरकार द्वारा जमीन ना मिलने से यहां फेंसिंग नहीं हो पा रही थी। इस वजह से घुसपैठ भी बढ़ रही थी। आंकड़ों पर गौर करें तो 2023 में 1547 और 2024 में 1694 घुसपैठिए बांग्लादेश से लगते बंगाल बॉर्डर से गिरफ्तार किए गए। इनमें 2025 में और बढ़ोतरी हुई। इनमें मवेशियों और ड्रग्स की भी तस्करी हो रही थी। 

नकली नोटों (जाली करेंसी), हथियारों और नशीले पदार्थों की बड़े पैमाने पर तस्करी होती है. सीमा पार के अपराधी भारतीय किसानों के खेतों से पकी हुई फसलें और मवेशी चुरा ले जाते हैं. घुसपैठियों की तो पौ बारह थी जो कि पूर्व सरकार के फिक्स्ड वोटबैंक थे।

जमीन अब मिलने से इस पूरे इलाके में जल्द बाड़बंदी की जा सकेगी। जिसके बाद इस तरह की अवैध घुसपैठ बंद हो जाएगी। हालांकि, ऐसा नहीं है कि इस बिना बाड़बंदी वाले एरिया में बीएसएफ की निगरानी नहीं है। लेकिन फेंसिंग होने के बाद यह प्रॉपर हो सकेगी, जिसमें कहीं से भी घुसपैठ होने की आशंका बेहद कम हो जाएगी।

दरअसल, घुसपैठ को लेकर सबसे बड़ी समस्या बंगाल-बांग्लादेश सीमा पर ही आ रही थी। जहां 2216.7 किलोमीटर सीमा में से 1647.7 किलोमीटर सीमा एरिया में तो कंटीले तार वाली बाड़ लगा दी गई थी लेकिन बाकी बचे 569 किलोमीटर सीमा इलाके में बाड़ नहीं लग पाया। घुसपैठ के अधिकतर प्रयास इन्हीं बिना फेंसिंग वाले खुले सीमा क्षेत्र से होते हैं।

ममता बनर्जी की हार के बाद अब मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व में बनी भाजपा सरकार की पहली कैबिनेट में बीएसएफ को 45 दिनों में जमीन देने की घोषणा के बाद केंद्रीय गृह मंत्रालय और बीएसएफ ने तैयारियां तेज कर दी हैं। अब इस बांग्लादेश की तरफ से होने वाली घुसपैठ पर रोक लग सकेगी।

बंगाल-बांग्लादेश सीमा पर सुरक्षा के लिए खास व्यवस्था होगी। सीमा पर स्मार्ट एंटी कट फेंसिंग लगाई जाएगी। सुरक्षा के लिए एआई तकनीक से लैस कैमरे और ड्रोन की भी मदद ली जाएगी। इससे बीएसएफ में भी 12 से 15 बटालियन और बनाने की जरूरत पड़ेगी। सीमा पर बीओपी भी और बनाई जाएंगी।

बंगाल सरकार द्वारा लंबित सीमा बाड़ लगाने के लिए सीमा सुरक्षा बल को 45 दिनों के अंदर जमीन सौंपने का ऐतिहासिक निर्णय और सख्त कदम पर बांग्लादेश के कुछ राजनीतिक धड़ों ने प्रतिक्रिया भी व्यक्त की है। दूसरी तरफ बंगाल के कुल 9 जिलों के जिला अधिकारी, सीमा सुरक्षा बल के साथ जमीन हस्तांतरण के काम में जुट गए हैं।   

बहरहाल, ममता बनर्जी के बेहद भरोसेमंद और पहली महिला गृह सचिव रहीं नंदिनी चक्रवर्ती को ही विकास कार्यों की प्रधान समन्वयक के रूप में एक सबसे बड़ा काम करना होगा।

यह पहला काम राज्य में बांग्लादेश के साथ अंतरराष्ट्रीय सीमा पर कांटेदार तार की बाड़ लगाने के लिए सीमा सुरक्षा बल को भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया को सुचारू रूप से पूरा कराना होगा।


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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।

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