जीवन धारा: मन को रोशन करें जीवन बदल जाएगा, विचारों को सकारात्मक बनाइए
अपने मन को सावधानी से देखें, क्योंकि वही आपके जीवन का निर्माण कर रहा है। यदि आप अपने भीतर प्रेम, विश्वास व आशा का वातावरण बनाते हैं, तो धीरे-धीरे आपका पूरा जीवन बदलने लगेगा।
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हममें से ज्यादातर लोग अपने जीवन को केवल बाहरी घटनाओं से बना हुआ मानते हैं। पर सच्चाई यह है कि जीवन पहले भीतर बनता है, फिर बाहर आकार लेता है। संसार में जो कुछ भी मनुष्य ने बनाया है, वह पहले एक विचार था। हर आविष्कार, हर उपलब्धि पहले किसी के मन में विचार के रूप में जन्मी थी और फिर वही विचार साकार हुआ। मनुष्य अपने जीवन में बार-बार वही अनुभव करता है, जिस पर उसका ध्यान सबसे अधिक टिका रहता है। यदि कोई व्यक्ति लगातार भय में जीता है, तो उसका मन हर परिस्थिति में खतरा ढूंढने लगता है। यदि कोई स्वयं को असफल मानता है, तो वह अवसरों के बीच भी अपनी असफलता के प्रमाण खोज लेता है। और यदि कोई व्यक्ति विश्वास करता है कि जीवन उसके लिए संभावनाओं से भरा है, तो वही संसार उसे नए द्वार खोलता हुआ दिखाई देने लगता है। संसार वही रहता है, लेकिन देखने वाले की चेतना बदल जाती है। विचार केवल शब्द नहीं होते। वे ऊर्जा होते हैं। आप किसी बात को बार-बार सोचते हैं, तो वह धीरे-धीरे आपके भीतर विश्वास का रूप लेने लगती है।
विश्वास केवल मानसिक धारणा नहीं है, वह आपके व्यक्तित्व का केंद्र बन जाता है। फिर आपके फैसले, प्रतिक्रियाएं, व्यवहार व आदतें उसी विश्वास के अनुसार ढलने लगती हैं। इसीलिए दो लोग एक ही परिस्थिति में रह कर भी अलग जीवन जीते हैं। एक व्यक्ति कठिनाइयों के बीच टूट जाता है, जबकि दूसरा उन्हीं मुश्किलों के बीच अपनी शक्ति खोज लेता है। यदि आप कृतज्ञता में जीना शुरू करते हैं, तो धीरे-धीरे आपका मन उन संभावनाओं को देखने लगेगा, जिन्हें आपने पहले कभी देखा ही नहीं था।
जब आप धन्यवाद कहते हैं, तब आप यह स्वीकार करते हैं कि जीवन में पहले से ही बहुत कुछ अच्छा मौजूद है। यही स्वीकार्यता आपके भीतर समृद्धि की भावना जगाती है। विचारों के साथ भावनाएं जुड़नी चाहिए। जरूरी है कि आप केवल सकारात्मक वाक्य न दोहराएं, बल्कि वास्तव में उसे महसूस भी करें, जिसकी आप कामना करते हैं। अपने मन को सावधानी से देखें, क्योंकि वही आपके जीवन का निर्माण कर रहा है। आप दिन भर क्या सोचते हैं? किन बातों पर ध्यान देते हैं? खुद से कैसे बात करते हैं?
यदि आपका मन लगातार स्वयं की आलोचना कर रहा है, तो आप भीतर से कमजोर होते चले जाएंगे। लेकिन यदि आप अपने भीतर प्रेम, विश्वास और आशा का वातावरण बनाते हैं, तो धीरे-धीरे आपका पूरा जीवन बदलने लगेगा। जब आप अपने विचारों, भावनाओं व विश्वासों को बदलते हैं, तब आप केवल अपना मूड नहीं बदलते, आप अपने जीवन की दिशा बदलते हैं। संसार बाहर से उतना शक्तिशाली नहीं है, जितना आपका अंतर्मन। आपके अंतर्मन में जो चल रहा है, वही अंततः आपके अनुभवों का रूप लेता है। इसलिए अपने मन को भय का घर मत बनने दीजिए। उसे आशा, कृतज्ञता व विश्वास का स्थान बनाइए, क्योंकि जिस क्षण आप अपने भीतर प्रकाश जलाते हैं, उसी क्षण जीवन की दिशा बदलनी शुरू हो जाती है।
विचारों को सकारात्मक बनाइए
जब आप अपने मन को भय, संदेह और नकारात्मक सोच से मुक्त करके उसमें विश्वास, कृतज्ञता और आशा का प्रकाश भरते हैं, तभी जीवन वास्तव में बदलना शुरू होता है। संसार वैसा ही दिखाई देता है, जैसा आपका अंतर्मन होता है; इसलिए अपने विचारों को सकारात्मक बनाइए, अपनी भावनाओं को प्रेम से भरिये और हर परिस्थिति में संभावनाएं खोजिए।