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जीवन धारा: 'क्यों' और 'कैसे' की खोज से ही जन्म लेता है ज्ञान; युवाओं के लिए अहम संदेश
कार्ल सेगन
Published by: Shivam Garg
Updated Sat, 28 Mar 2026 08:45 AM IST
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सार
जब युवाओं के मन में ‘क्यों’ और ‘कैसे’ की आग जलती है, तभी वे किताबों से आगे बढ़कर दुनिया को समझने, बदलने और नया रचने की ताकत पाते हैं। जरूरी है कि युवा केवल विज्ञान को पढ़ें नहीं, बल्कि उसे महसूस करें, प्रश्न करें, खोजें और उससे जुड़ें।
सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला प्रिन्ट/एजेंसी
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विस्तार
जब मैं हाई स्कूल के छात्रों से बात करता हूं, तो एक चिंताजनक तस्वीर सामने आती है। वे ‘तथ्यों’ को रट तो लेते हैं, पर उन तथ्यों के पीछे छिपी जिज्ञासा और खोज का आनंद उनसे कहीं दूर हो चुका होता है। उनके भीतर का विस्मय धीरे-धीरे समाप्त हो गया है, जबकि संदेह करने और प्रश्न उठाने की क्षमता विकसित ही नहीं हो पाई। वे सवाल पूछने से घबराते हैं, अधूरे या संतोषजनक न होने वाले उत्तरों को भी स्वीकार करने को तैयार रहते हैं, और कोई सवाल भी नहीं करते हैं।
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कक्षा में एक अजीब-सा माहौल होता है, जहां छात्र एक-दूसरे को तिरछी नजरों से देखते रहते हैं, ताकि वे पल-पल यह भांप सकें कि उनके साथी उन्हें कितना स्वीकार कर रहे हैं। वे अपने सवाल पहले से कागज पर लिखकर लाते हैं और चुपचाप उन्हें देखते रहते हैं। इससे वे कक्षा में चल रही असली चर्चा से लगभग अलग हो जाते हैं। यही वह बिंदु है, जहां विज्ञान की वास्तविक आत्मा खो जाती है।
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विज्ञान तो जिज्ञासा, खोज व निरंतर प्रश्न करने की प्रक्रिया है। जब युवाओं के मन में ‘क्यों’ और ‘कैसे’ की आग जलती है, तभी वे किताबों से आगे बढ़कर दुनिया को समझने, बदलने और नया रचने की ताकत पाते हैं। जिज्ञासा ही वह शक्ति है, जो पढ़ाई को ज्ञान में और ज्ञान को नवाचार में बदल देती है। जब हम प्रकाश-वर्षों की विशालता और समय की अनंत यात्रा में अपनी जगह समझते हैं, और जीवन की जटिल सुंदरता को महसूस करते हैं, तब जो अनुभूति जन्म लेती है, वह उत्साह और विनम्रता का संगम होती है।
ऐसी ही भावनाएं हमें महान कला, संगीत या साहित्य के सान्निध्य में भी अनुभव होती हैं, या फिर गांधी या मार्टिन लूथर किंग जूनियर जैसे लोगों के नि:स्वार्थ साहस के अनुकरणीय कार्यों को देखकर हमारे मन में उठने वाली भावनाएं भी ठीक वैसी ही होती हैं। यह धारणा कि विज्ञान और आध्यात्मिकता एक-दूसरे के विरोधी हैं, वास्तव में एक भ्रम है।
जरूरी है कि युवा केवल विज्ञान को पढ़ें नहीं, बल्कि उसे महसूस करें, प्रश्न करें, खोजें और उससे जुड़ें। तभी वे एक अच्छे विद्यार्थी बनने के साथ-साथ संवेदनशील, जिज्ञासु और जागरूक इन्सान भी बन पाएंगे।
Carl Sagan on Curiosity: The Magical World of Why and How