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बंगाल विधानसभा चुनाव 2026: ममता बनर्जी को क्यों महसूस हो रहा है अघोषित आपातकाल?

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सार

ममता बनर्जी अपने चुनावी राजनीति के सबसे कठिन लड़ाई के सम्मुख हैं। ऐसे में वह मुख्य विपक्षी दल और चुनाव आयोग दोनों पर एकसाथ व बराबर हमलावर हैं। सीधा आरोप लगा रही हैं कि दोनों की मिलीभगत में अघोषित आपातकाल में यह चुनाव हो रहा है।

west bengal elections 2026 Mamata Banerjee criticised the Election Commission undeclared emergency
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी - फोटो : ANI
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विस्तार

''जितना भी चोरी छिपे राष्ट्रपति शासन लगा लो, मैं अकेली ही एक सौ हूं। मैं अवाक हूं कि इतना भय! इतनी भी हिम्मत नहीं है कि मुझसे एकबार चर्चा तो कर लें। चीफ सेक्रेटरी, होम सेक्रेटरी, डीजीपी, सीपी सब बदल दिए। यदि कोई दुर्घटना हुई तो इसका जिम्मेदार बीजेपी और वैनिश कुमार (ज्ञानेश कुमार) होंगे। एक महीना बाद मैं ही रहूंगी और मेरे यह लोग। फिर क्या होगा?""

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राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी अपनी चुनावी रैली की शुरुआत इससे ही कर रही हैं।

दूसरी तरफ ममता सरकार और टीएमसी के वकीलों के पैनल के सदस्य अर्क कुमार नाग ने कलकत्ता हाइकोर्ट में एक पीआईएल (जनहित याचिका) दायर की है। चीफ जस्टिस सुजय पाल और जस्टिस पार्थसारथी सेन के बेंच में इसकी सुनवाई भी चालू हो गई है। सुनवाई के दौरान तृणमूल सांसद वकील कल्याण बनर्जी ही पक्ष रख रहे हैं।
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कल्याण बनर्जी ने पूछा कि क्या राष्ट्रपति शासन लग चुका है? जिस तरह से तबादले हुए हैं वह राष्ट्रपति शासन के दौरान ही होते हैं। 63 पुलिस ऑफिसर, 16 आईएएस और 13 पुलिस सुपर को उनके पदों से अब तक हटाया जा चुका है। आगे भी होगी या नहीं, इसकी कोई गारंटी नहीं है।

ममता बनर्जी को क्यों लग रहा अघोषित राष्ट्रपति शासन जैसा?

सवाल यह है कि आखिर ममता बनर्जी, इनकी पार्टी के नेताओं, कार्यकर्त्ताओं, समर्थकों को क्यों लग रहा है कि अघोषित राष्ट्रपति शासन लग चुका है?

दरअसल इस राज्य में सात से आठ चरणों में मतदान होता था, इस दफे दो चरणों में 23 और 29 अप्रैल को मतदान होगा। दो चरणों में मतदान 49 साल बाद हो रहा है, जनता पार्टी के शासनकाल में 1977 में दो चरणों में आखिरी बार मतदान हो रहा है। बंगाल में जितने अधिक चरणों में मतदान होता है, इसका लाभ सत्ताधारी दल को होता है। 

चुनाव आयोग ने 15 मार्च की शाम को विधानसभा चुनाव की घोषणा की। उसी रात चुनाव आयोग ने चीफ सेक्रेटरी नंदिनी चक्रवर्ती, होम सेक्रेटरी जगदीश प्रसाद मीना, डीजीपी, सीपी कोलकाता, एडीजी लॉ एंड आर्डर और डीआईजी को उनके पदों से हटाकर नई नियुक्तियों की घोषणा कर दी।

ममता बनर्जी इससे काफी खफा हुईं और हटाए गए अधिकांश लोगों को अन्यत्र पोस्टिंग कर दीं। नवान्न की इस नियुक्ति को चुनाव आयोग ने निरस्त कर दिया और पंद्रह आईपीएस अफसरों को अन्य चुनावी राज्यों तमिलनाडु, केरल, असम व पुड्डुचेरी में ऑब्ज़र्वर बनाकर भेज दिया।

तीन दिन बाद चुनाव आयोग ने 18 मार्च को राज्य के 11 जिलों के डीएम का तबादला कर दिया। यह जिला हैं कुच विहार, जलपाईगुड़ी, उत्तर दिनाजपुर, मालदा, मुर्शिदाबाद, नदिया, पूर्वी बर्दवान, उत्तर 24 परगना, दक्षिण 24 परगना, दार्जिलिंग और अलीपुरद्वार। इसके बाद 23 मार्च को चुनाव आयोग ने 294 विधानसभा सीटों में से 73 के रिटर्निंग ऑफिसर का तबादला कर दिया।

इसमें नंदीग्राम से 2011 बैच के डब्लूबीसीएस सुरजीत रॉय का भी नाम है, जिन्हें भवानीपुर तबादला किया है। गौरतलब है कि नंदीग्राम से विधायक व नेता विरोधी दल शुभेंदु अधिकारी इस दफे नंदीग्राम के साथ साथ भवानीपुर से भी ममता बनर्जी के विरुद्ध चुनाव लड़ रहे हैं। याद दिलाना लाजमी होगा कि गत विधानसभा चुनाव में ममता बनर्जी को शुभेंदु अधिकारी ने नंदीग्राम में ही परास्त किया था। 

रिटर्निंग ऑफिसर के तबादले

चुनाव में रिटर्निंग ऑफिसर की बेहद महत्वपूर्ण भूमिका होती है। रिटर्निंग ऑफिसर के तबादले के एक दूसरी सूची भी आ गई है और उम्मीद की जा रही है कि आगे भी इस तरह की और सूची आ सकती है। अभी तक सर्वाधिक तबादले उत्तर 24 परगना जिला में हुए हैं। अभी तक 13 के तबादले हो चुके हैं। इसके बाद दक्षिण 24 परगना और पूर्वी मिदनापुर से दस दस तबादले हुए हैं। यह सभी एसडीओ स्तर के अधिकारी हैं।

वहीं, तीसरी मतदाता सूची भी प्रकशित हो गई है लेकिन अभी तक अंतिम मतदाता सूची आनी शेष है। विचाराधीन मतदाताओं की तहकीकात व जांच जारी है। कितने नाम मतदाता सूची से कट गए हैं या कटेंगे? इसकी अभी तक जानकारी उपलब्ध नहीं है।

ममता सरकार में मंत्री शशि पांजा सहित 11 टीएमसी उम्मीदवारों का नाम भी अधर में लटका हुआ है। बावजूद इसके कहा जा सकता है कि 75 लाख से अधिक मतदाताओं का नाम कट चुका है। नाम कटने वालों की कुल संख्या कितनी होगी यह अंतिम सूची आने के बाद ही पता चलेगा।

बहरहाल, ममता बनर्जी अपने चुनावी राजनीति के सबसे कठिन लड़ाई के सम्मुख हैं। ऐसे में वह मुख्य विपक्षी दल और चुनाव आयोग दोनों पर एकसाथ व बराबर हमलावर हैं। सीधा आरोप लगा रही हैं कि दोनों की मिलीभगत में अघोषित आपातकाल में यह चुनाव हो रहा है। साथ ही यह भी दावा कर रही हैं कि बावजूद इसके 4 मई को वह चौथी बार सरकार में आएंगीं।


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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।

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