फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Columns ›   Blog ›   Every question is a gateway to a new discovery; ask yourself What is its true meaning

जीवन धारा- हर सवाल एक नई खोज का दरवाजा है, खुद से पूछो- इसका वास्तविक अर्थ क्या है?

Sat, 18 Jul 2026 08:33 AM IST
ज्योति भास्कर रिचर्ड फाइनमैन
रिचर्ड फाइनमैन Published by: ज्योति भास्कर Updated Sat, 18 Jul 2026 08:33 AM IST
सार

किसी भी बात को सिर्फ इसलिए नहीं मान लेना चाहिए कि किसी किताब में वैसा लिखा है अथवा फिर शिक्षक या विशेषज्ञ ने ऐसा कहा है। खुद से पूछो, ‘इसका वास्तविक अर्थ क्या है? क्या मैं इसे अपने शब्दों में समझा सकता हूं?’

विज्ञापन
Every question is a gateway to a new discovery; ask yourself What is its true meaning
मेडिटेशन - फोटो : अमर उजाला प्रिंट

विस्तार

लोग अक्सर मुझसे पूछते हैं कि मैं अलग तरह से कैसे सोचता हूं। उन्हें लगता है कि इसके पीछे कोई खास रहस्य होगा। सच तो यह है कि मैंने कभी खुद को सबसे बुद्धिमान व्यक्ति नहीं माना। मैंने सिर्फ एक आदत विकसित की, हर बात को समझने की। मैंने बहुत पहले यह जान लिया था कि किसी चीज का नाम जान लेना और उसे सच में समझ लेना, दोनों बिल्कुल अलग बातें हैं। अगर आप सिर्फ शब्द याद रखते हैं, तो आपके पास जानकारी है। पर, जब आप उसके पीछे छिपे कारण को समझ लेते हैं, तभी आपके पास वास्तविक ज्ञान होता है।

विज्ञापन


मैं जब भी कोई नया सिद्धांत, सूत्र या विचार सीखता था, तो उसे केवल पढ़कर आगे नहीं बढ़ जाता था। मैं खुद से पूछता था, ‘अगर यह मेरी आंखों के सामने हो रहा होता, तो यह कैसा दिखाई देता?’ जब तक मैं किसी बात को अपने मन में देख और खुद को ही अपने शब्दों में समझा न लेता, तब तक मैं यह मानता ही नहीं था कि मैंने उसे समझ लिया है। मेरी सबसे बड़ी आदत थी, हर बात पर ‘क्यों’ पूछना। एक बार नहीं, बार-बार। जब तक उत्तर पूरी तरह स्पष्ट न हो जाए। मैंने कभी यह दिखावा नहीं किया कि मुझे सब कुछ पता है। जब मुझे किसी बात की समझ नहीं होती थी, तो मैं खुलकर स्वीकार करता था। जो व्यक्ति सब कुछ जानने का दिखावा करता है, वह आगे बढ़ना बंद कर देता है। पर, जो अपनी जिज्ञासा को जीवित रखता है, वह हर दिन कुछ नया सीखता है।
विज्ञापन


किसी भी बात को सिर्फ इसलिए मत मान लो, कि किसी किताब, शिक्षक या विशेषज्ञ ने ऐसा कहा है। खुद से पूछो, ‘इसका वास्तविक अर्थ क्या है? क्या मैं इसे अपने शब्दों में समझा सकता हूं? क्या मैं इसे अपने मन में देख सकता हूं?’ अगर उत्तर ‘नहीं’ है, तो निराश न हों। यही वह क्षण है, जहां से वास्तविक सोच और वास्तविक सीख शुरू होती है, क्योंकि सच्चाई यही है कि जो व्यक्ति सोचना सीख जाता है, उसके लिए हर सवाल एक नई खोज का दरवाजा बन जाता है।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed