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विश्व सिनेमा की जादुई दुनिया: एग्नेस हरेनेस्की और बेला टार, डायरेक्टर-एडिटर की जोड़ी
सार
एग्नेस के परिवार के बारे में खास जानकारी नहीं मिलती है, वे इसे कभी सार्वजनिक नहीं करती हैं। हां, यह मालूम होता है कि परिवार में वे पहली कलाकार हैं। वे एडिटिंग सीखने कभी किसी संस्थान नहीं गईं, उनका सारा ज्ञान/कुशलता व्यवहारिक है।
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सिनेमा की दुनिया- एग्नेस हरेनेस्की और उनकी फिल्में
- फोटो : Freepik.com
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विस्तार
सफल व्यक्तियों के पीछे कुछ लोगों का हाथ होता है, वे इसे स्वीकारें अथवा न स्वीकारें। अक्सर इन पीछे के लोगों में उस व्यक्ति का साथी भी होता है और अगर सफल व्यक्ति पुरुष हुआ तो साथी स्त्री उससे अधिक बुद्धिमान, उससे अधिक कुशल होते हुए भी पीछे रहना चुनती है। कई बार गुमनामी में समाप्त हो जाती है। शायद यह बात उसे घुट्टी में पिला दी जाती है कि सफलता पुरुष की दावेदारी है।
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उसका सामाजीकरण ऐसा होता है कि वह पीछे रह कर भी खुश दिखती है। वह अपने प्रेमी/पति/साथी को लाइमलाइट में रख कर खुद अंधेरे में रहने का चुनाव करती है। कभी जान कर, ज्यादातर अनजाने में अनजानी रहना चाहती है। कई पुरुष इसे स्वीकारने से बचते हैं। कदाचित सिने-निर्देशक बेला टार जैसे व्यक्ति इस बात को सार्वजनिक रूप से स्वीकारते हैं।
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अभी हाल में जब 6 जनवरी 2026 को हंगरी के प्रसिद्ध निर्देशक बेला टार गुजर गए तो श्रद्धांजलि की बाढ़ आ गई। उनकी बनाई फिल्मों की एक बार फिर से जमकर तारीफ हुई। उनकी फिल्मों की विशेषताओं को बार-बार रेखांकित किया गया। कदाचित कुछ लोगों ने उनकी फिल्मों की सफलता के पीछे की कहानी को स्मरण किया।
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बेला टार और उनकी पत्नी एग्नेस हरेनेस्की
क्या कोईफिल्म बिना संपादन के अच्छी फिल्म बन सकती है? बेला टार की फिल्मों के खरे होने का एक बहुत महत्वपूर्ण पहलू इन फिल्मों की एडिटिंग है। मीडिया ने भले ही इनकी एडिटर की एग्नेस अनदेखी की, मगर खुद बेला टार अपनी फिल्मों की एडिटर, अपनी साथी/पत्नी एग्नेस हरेनेस्की को कभी नहीं भूले।
हर इंटरव्यू में वे एग्नेस की चर्चा करते, चाहे वे संग में बैठी हों अथवा न बैठी हों। जी हां, जब वे दोनों इंटरव्यू के लिए साथ बैठते तब भी एग्नेस अधिक समय चुप रहतीं, बेला ही बात करते। वे निर्देशक के प्रभा मंडल की छाया में बैठी रहतीं। उन्होंने कभी स्पॉटलाइट में आने की चेष्टा नहीं की। ऐसी ही हैं, एग्नेस हरेनेस्की। चलिए उनके बारे में थोड़ा जान लें।
करीब पांच दशकों की इस साझा यात्रा की शुरुआत 1978 में हुई और उसी साल दोनों ने शादी कर ली। ताजिंदगी वे जीवन और अपने पैशन सिने-कला में साथ रहे।
एग्नेस ने 6 फिल्मों का एडिटोरियल विभाग संभाला, 20 फिल्मों की एडिटिंग की और-तो-और उन्होंने बेला टार के साथ 4 फिल्मों का निर्देशन भी किया।
4 जुलाई 1945 को हंगरी में ही एग्नेस हरेनेस्की का जन्म हुआ। द्वितीय विश्व युद्ध बस समाप्त हुआ था, देश फिर से संभलने का प्रयास कर रहा था। सामाजिक परिवर्तन हो रहा था, सब चीजों की कमी थी, राजनीति कठोर थी। इन्हीं सबने मिल कर एग्नेस का बचपन बनाया, जो आगे चल कर उनके काम में नजर आता है। उनकी एडिटिंग में यथार्थ, कठोरता, धैर्य, संयम लक्षित किया जा सकता है।
एग्नेस के परिवार के बारे में खास जानकारी नहीं मिलती है, वे इसे कभी सार्वजनिक नहीं करती हैं। हां, यह मालूम होता है कि परिवार में वे पहली कलाकार हैं। वे एडिटिंग सीखने कभी किसी संस्थान नहीं गईं, उनका सारा ज्ञान/कुशलता व्यवहारिक है। उन्होंने एडिटिंग काम करते-करते सीखी।
उन दिनों आज की तरह डिजिटल एडिटिंग नहीं होती थी, जो करना होता था, हाथ-कैंची से होता था। इसके लिए बहुत अधिक धैर्य, स्पष्टता और सूझ-बूझ की जरूरत होती है। वे चुपचाप यह सब किए जातीं। शुरू में उन्होंने मुख्य रूप से टीवी फिल्म, लघुफिल्म की एडिटिंग की। उनका यह काम 1972 से 1980 तक चला। फिर उनकी ख्याति 1981 की बेला टार की फिल्म ‘दि आउटसाइडर’ से आई। इसके बाद बेला टार की प्रत्येक फिल्म की एग्नेस ने एडिटिंग की।
वे मात्र पत्नी-पति नहीं थे, एग्नेस केवल एडिटर नहीं थीं। दोनों ने मिल ‘वर्कमाइस्टर हार्मोनीज’ (2000), ‘विजन्स ऑफ य़ूरोप’ (‘हंगरी प्रलॉग’ का हिस्सा, 2004), ‘द मैनफ्रॉम लंदन’ (2007) तथा ‘द ट्युरिन होर्स’ का निर्देशन किया। ‘द ट्युरिन होर्स’ ‘वर्कमाइस्टर हार्मोनीज’ तथा ‘द मैनफ्रॉम लंदन’ खूब सफल एवं कालजयी फिल्में हैं सिनेमा पढ़ने-पढ़ाने के लिए इनका उपयोग होता है। ‘वर्कमाइस्टर हार्मोनीज’ 21वीं सदी की महानफिल्मों में शामिल किया गया है।
असल में बेला टार के शॉट्स अक्सर दस मिनट और कई बार उससे भी अधिक लंबे होते। अत: एग्नेस को सेट पर उपस्थित रहना होता, वे बेला को सलाह देती रहतीं। इस तरह वे एडिटिंग रूम के बाहर भी बेला कोफिल्म बनाने में सहायता करतीं। फिल्म शूटिंग के दौरान वे वीडियोफीड को मोनिटर करतीं, समय के मुद्दे को संभालतीं, सेट पर ही एडिटिंग शुरू करतीं ताकि एडिटिंग रूम में कम समय लगे। पोस्ट प्रोडक्शन का खर्च बचे।
फिल्म के कथानक के समय की लय का अंदाजा लगाते हुए एग्नेस एडिटिंग करतीं। यही सेट पर उपस्थित रहना बाद में सह-निर्देशन में परिणत हुआ, ‘द ट्युरिन होर्स’ को जूरी का ग्रैंड पी पुरस्कार मिला।
अफसोस इतनी कुशल सिने-एडिटर को अब तक कोई पुरस्कार प्राप्त नहीं हुआ है। शायद कभी पुरस्कार प्रदान करने वालों को एग्नेस हरेनेस्की की सुध आए।
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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।