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अंतरिक्ष को भेजा धरती का संदेश है नासा का वाॅयजर मिशन
सार
मनुष्य ने धरती पर तमाम खोजें कर पहाड़ों की जड़ी बूटियों से लेकर समुद्री सीप तक अपने हिस्से में कर लीं। यहां तक कि जमीन खोद कर खनिज तक निकाल लिए। यह सब कुछ जिज्ञासा के साथ ही शुरू हुआ होगा, मसलन धरती के भीतर क्या है? क्या पत्तों से भी स्वास्थ्य मिल सकता है? समुद्र की थाह पा लें तो क्या हाथ लगेगा?
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नासा वायजर
- फोटो : नासा
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विस्तार
ऐसे कितने प्रश्न मन में आए होंगे जिनके उत्तर मानव ने खोज लिए, कुछ के खोजने अब भी बाकी हैं। इन्हीं प्रयासों के बीच नासा ने अपने वाॅयजर मिशन अंतरिक्ष में भेजकर धरती के संदेश वहां भेजे। आइये जानते हैं नासा ने ऐसा क्यों किया ?
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प्रश्न तो जिज्ञासा का ही स्वरूप हैं और जिज्ञासा तो होती रहती है। फिर वे धरती से उठकर आसमान की ओर चल पड़ीं। हमने जानने की कोशिश की कि चांद कैसा दिखता होगा? क्या और भी कोई ग्रह होगा जहां हम जैसे लोग रहते होंगे? शनि, बृहस्पति और बाकी ग्रहों के बारे में जानने की हमने कोशिश की और यह भी सोचा कि दूसरे ग्रह पर अगर कोई प्राणी हैं जिन्हें हम एलियंस कहते हैं तो उन तक कोई संदेशा पहुंचाया जाए।
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लेकिन मानव स्वयं किसी स्पेस मशीन में बैठकर कोई संदेश ले जाए, यह तो अभी नामुमकिन है। अब जबकि हमें भारत देश के ही कश्मीर से कन्याकुमारी तक की यात्रा में ही लंबा वक्त लगता है तो सोचो धरती से आकाश की यात्रा में कितने साल लगेंगे। तो हमने एक मानव रहित यंत्र बनाया, नाम रखा गया वाॅयजर-1 और वाॅयजर-2.
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वाॅयजर-2 को 20 अगस्त 1977 को लॉन्च किया गया और 16 दिन बाद 5 सितम्बर 1977 को वोएजर-1 को अंतरिक्ष में भेजा गया लेकिन कभी न लौट आने के लिए। इनका उद्देश्य था कि अन्य ग्रहों की तस्वीरें लेकर हम तक पहुंचाएं ताकि अनुमान लगाया जा सके कि कहां जीवन विकसित हो सकता है।
गोल्डन रिकॉर्ड का यह है मंतव्य
इसमें एक गोल्डन रिकॉर्ड रखा गया, इस आशा के साथ कि अगर कोई एलियन है और वह वाॅयजर को पकड़ लेता है तो उसे धरती के बारे में बताया जा सके। इस गोल्डन रिकॉर्ड में पक्षियों की, हवा का आवाजें हैं। भिन्न तरह के संगीत हैं, तस्वीरें हैं। कई भाषाओं को रिकॉर्ड किया गया। कुल मिलाकर इसमें हर वह संभव वस्तु रखी गयी जो किसी को धरती और वहां रहने वाले प्राणियों की जानकारी दे सके।
मात्र एक बिंदु जैसी दिखी धरती, पर फसाद बड़े-बड़े
वाॅयजर के आज तक के इतिहास में सबसे विशेष है वह दिन है जब वाॅयजर-1 का कैमरा धरती की ओर घूमा और उसने वह तस्वीर हम तक पहुंचाई। वह इतनी दूर से ली हैं कि धरती किसी बिंदु के समान दिखाई देती है। वह बिंदु जिसके एक बहुत छोटे से हिस्से में हम रहते हैं। वही बिंदु जहां जमीन की लड़ाई है, धर्म के झगड़े हैं और भी न जाने क्या-क्या। वााॅयजर हमारे सौरमंडल की सीमा से बाहर जाकर हमें अलविदा कह चुका है, वह उन तमाम बातों को अलविदा कर चुका है, जो धरती के उस पार दूर आसमान में किसी काम की नहीं।
हम जैसा कोई नहीं मिला
हमारे सौरमंडल में वाॅयजर को हम जैसा कोई नहीं मिला था, उसे हमसे भिन्न भी ऐसा कोई नहीं मिला जो उसे लेकर हम तक पहुंच सके। सोचो धरती के इतने झगड़े तो किसी काम के नहीं। हां, प्रेम से शायद कुछ संभावनाएं बनें, उस गोल्डन रिकॉर्ड में भी धरती का प्रेम ही तो है आसमान के नाम।