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दूसरा पहलू: धरती पर पेड़-पौधे कब और कैसे आए, पौधों की कहानी पानी से शुरू होती है
एरिन पॉटर
Published by: Pavan
Updated Thu, 02 Apr 2026 08:29 AM IST
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सार
लगभग 50 करोड़ वर्ष पहले तक पृथ्वी की सतह बंजर चट्टानों और मिट्टी से ढकी हुई थी। न पेड़ थे, न घास और न ही फूल। वैज्ञानिकों का मानना है कि करीब 47 करोड़ वर्ष पहले पौधे हरे शैवाल से विकसित हुए। ये उथले जल में, या समुद्री किनारों पर उगते थे। धीरे-धीरे पौधों की जड़ें चट्टानों को तोड़ने लगीं और उनसे निकलने वाले खनिजों ने बंजर मिट्टी को उपजाऊ बनाया। फिर 36 करोड़ वर्ष पहले विशाल जंगल उग आए। इसके बाद बीजों का विकास हुआ।
धरती पर पेड़-पौधे कब और कैसे आए
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
डायनासोरों के पृथ्वी पर आने से बहुत पहले, धरती आज जैसी नहीं थी। लगभग 50 करोड़ वर्ष पहले तक पृथ्वी की सतह का अधिकांश हिस्सा बंजर चट्टानों और सूखी मिट्टी से ढका हुआ था। न पेड़ थे, न घास और न ही फूल। जीवन लगभग पूरी तरह से महासागरों तक ही सीमित था। फिर एक अद्भुत घटना घटी और धरती पर पौधों का जन्म हुआ, जिसने इस ग्रह की दिशा ही बदल दी।
पौधों की कहानी पानी से शुरू होती है। शुरुआती पौधे बहुत छोटे और हरे जीव जैसे थे, जिन्हें हम आज शैवाल (एल्गी) के रूप में जानते हैं। ये सूर्य के प्रकाश, पानी और कार्बन डाइऑक्साइड की मदद से अपना भोजन स्वयं बनाते हैं। इस प्रक्रिया को प्रकाश संश्लेषण कहा जाता है।
वैज्ञानिकों का मानना है कि लगभग 47 करोड़ वर्ष पहले वास्तविक पौधे हरे शैवाल से विकसित हुए। ये शुरुआती पौधे उथले जल में, या समुद्र के किनारों पर उगते थे, जहां कभी पानी में डूबे रहते और कभी हवा के संपर्क में आते। यही परिस्थितियां उन्हें धीरे-धीरे जमीन पर जीवन के लिए तैयार करती रहीं। पर जमीन पर उन्हें कई कठिन सवालों का सामना करना पड़ा-जैसे सूखने से कैसे बचें? सीधे कैसे खड़े रहें? और सूखी मिट्टी से पानी व पोषक तत्व कैसे प्राप्त करें? इनसे निपटने के लिए पौधों ने कई महत्वपूर्ण बदलाव किए।
उन्होंने अपने ऊपर मोम जैसी परत (क्यूटिकल) विकसित की, जिससे पानी का नुकसान कम हुआ। मजबूत कोशिका दीवारें बनीं, जिससे वे सीधे खड़े रह सके। साथ ही, जड़ जैसे सरल ढांचे (राइजॉइड्स) विकसित हुए, जो उन्हें जमीन से जोड़ते और पानी व खनिजों को अवशोषित करने में मदद करते। धीरे-धीरे पौधों की जड़ें चट्टानों को तोड़ने लगीं और उनसे निकलने वाले खनिजों ने बंजर मिट्टी को उपजाऊ बनाया। पौधों ने वातावरण में ऑक्सीजन भी बढ़ाई, जिससे हवा शुद्ध हुई और सांस लेना आसान हुआ। लगभग 42 करोड़ वर्ष पहले पौधों में संवहनी ऊतक (वेस्कुलर टिशू) विकसित हुए, ऐसी छोटी-छोटी नलिकाएं, जो पानी और पोषक तत्वों को पूरे पौधे में पहुंचाती थीं। इससे पौधे लंबे व मजबूत बने।
इसके बाद हुआ बीजों का विकास। लगभग 38 करोड़ वर्ष पहले। बीजों ने पौधों के भ्रूणों को सुरक्षा दी और उन्हें कठोर परिस्थितियों में भी जीवित रहने में मदद की। फिर करीब 14 करोड़ वर्ष पहले फूलों वाले पौधों (एंजियोस्पर्म) का उदय हुआ। फूलों ने कीड़ों और पक्षियों को आकर्षित किया, जिससे परागण आसान हुआ। आज हम जो पेड़, घास, फल और सब्जियां देखते हैं, वे इसी विकास की देन हैं। और इस परिवर्तन के असली नायक हैं पौधे। - द कन्वर्सेशन
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पौधों की कहानी पानी से शुरू होती है। शुरुआती पौधे बहुत छोटे और हरे जीव जैसे थे, जिन्हें हम आज शैवाल (एल्गी) के रूप में जानते हैं। ये सूर्य के प्रकाश, पानी और कार्बन डाइऑक्साइड की मदद से अपना भोजन स्वयं बनाते हैं। इस प्रक्रिया को प्रकाश संश्लेषण कहा जाता है।
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वैज्ञानिकों का मानना है कि लगभग 47 करोड़ वर्ष पहले वास्तविक पौधे हरे शैवाल से विकसित हुए। ये शुरुआती पौधे उथले जल में, या समुद्र के किनारों पर उगते थे, जहां कभी पानी में डूबे रहते और कभी हवा के संपर्क में आते। यही परिस्थितियां उन्हें धीरे-धीरे जमीन पर जीवन के लिए तैयार करती रहीं। पर जमीन पर उन्हें कई कठिन सवालों का सामना करना पड़ा-जैसे सूखने से कैसे बचें? सीधे कैसे खड़े रहें? और सूखी मिट्टी से पानी व पोषक तत्व कैसे प्राप्त करें? इनसे निपटने के लिए पौधों ने कई महत्वपूर्ण बदलाव किए।
उन्होंने अपने ऊपर मोम जैसी परत (क्यूटिकल) विकसित की, जिससे पानी का नुकसान कम हुआ। मजबूत कोशिका दीवारें बनीं, जिससे वे सीधे खड़े रह सके। साथ ही, जड़ जैसे सरल ढांचे (राइजॉइड्स) विकसित हुए, जो उन्हें जमीन से जोड़ते और पानी व खनिजों को अवशोषित करने में मदद करते। धीरे-धीरे पौधों की जड़ें चट्टानों को तोड़ने लगीं और उनसे निकलने वाले खनिजों ने बंजर मिट्टी को उपजाऊ बनाया। पौधों ने वातावरण में ऑक्सीजन भी बढ़ाई, जिससे हवा शुद्ध हुई और सांस लेना आसान हुआ। लगभग 42 करोड़ वर्ष पहले पौधों में संवहनी ऊतक (वेस्कुलर टिशू) विकसित हुए, ऐसी छोटी-छोटी नलिकाएं, जो पानी और पोषक तत्वों को पूरे पौधे में पहुंचाती थीं। इससे पौधे लंबे व मजबूत बने।
इसके बाद हुआ बीजों का विकास। लगभग 38 करोड़ वर्ष पहले। बीजों ने पौधों के भ्रूणों को सुरक्षा दी और उन्हें कठोर परिस्थितियों में भी जीवित रहने में मदद की। फिर करीब 14 करोड़ वर्ष पहले फूलों वाले पौधों (एंजियोस्पर्म) का उदय हुआ। फूलों ने कीड़ों और पक्षियों को आकर्षित किया, जिससे परागण आसान हुआ। आज हम जो पेड़, घास, फल और सब्जियां देखते हैं, वे इसी विकास की देन हैं। और इस परिवर्तन के असली नायक हैं पौधे। - द कन्वर्सेशन