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थोड़ी-सी राहत: होर्मुज पर ईरान के साथियों को खतरा नहीं, भारत की एक बड़ी कूटनीतिक कामयाबी

अमर उजाला Published by: Pavan Updated Tue, 07 Apr 2026 07:52 AM IST
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सार
पश्चिम एशिया संकट के बीच भारत उन कुछ देशों में शामिल है, जिनके सर्वाधिक जहाज होर्मुज को सुरक्षित पार कर पाए हैं। यह निस्संदेह भारत के लिए थोड़ी राहत की बात है, लेकिन ऐसे संकट बार-बार हमें ऊर्जा सुरक्षा के मद्देनजर दीर्घकालिक व स्वावलंबी रणनीति अपनाने की जरूरत की याद दिलाते हैं।
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A little relief: Iran's allies on Hormuz are not threatened, a major diplomatic success for India
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव की छाया में भारत के नौवें जहाज का होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित पार होना देश में ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए किए जा रहे कूटनीतिक प्रयासों के प्रति भरोसा तो जगाता ही है, लाखों एलपीजी उपभोक्ताओं के लिए भी राहत देने वाली खबर है। गौरतलब है कि तेहरान द्वारा होर्मुज मार्ग से जहाजों की आवाजाही पर पूरी तरह से रोक लगाने के बाद से ही भारत अपने जहाजों के इस मार्ग से गुजरने को लेकर ईरान के साथ राजनयिक स्तर पर बातचीत कर रहा है।


ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची कह भी चुके हैं कि भारत जैसे तेहरान के मित्र देशों के लिए यह मार्ग खुला रहेगा। ऐसे संकट के समय में, जब अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में तेल की कीमतों में आग लगी हुई है, होर्मुज के जोखिम भरे रास्ते से तेल और गैस से भरे सबसे अधिक जहाज सुरक्षित निकालना भारत की एक बड़ी कूटनीतिक कामयाबी कही जा सकती है। यही नहीं, 2019 के बाद यह पहली बार है, जब भारत ने ईरान से तेल व एलपीजी आयात किया है, जिसका भुगतान अमेरिकी प्रतिबंधों से बचते हुए युआन/स्थानीय मुद्राओं में करके ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित की गई है।


होर्मुज समुद्री मार्ग की अहमियत इससे ही समझी जा सकती है कि भारत के कच्चे तेल के आयात का करीब 40 फीसदी, एलएनजी आयात का 50 फीसदी से अधिक और एलपीजी आयात का करीब 90 फीसदी हिस्सा इसी मार्ग से ही गुजरता था। भारत की सालाना एलपीजी खपत 3.3 करोड़ टन से अधिक है, जिसमें आयात पर निर्भरता 60 फीसदी है। पिछले कुछ समय में देश में गैस-तेल संकट के संदर्भ में विपक्षी दलों ने सरकार को घेरने की कोशिश की है, लेकिन सरकार ने बेहद तनावपूर्ण वैश्विक हालात में अमेरिका व इस्राइल के साथ ही ईरान के साथ भी संबंधों को साधते हुए अपनी बहुध्रुवीय विदेश नीति का ही परिचय दिया है।

ध्यान देने वाली बात है कि ईरान ने भी पश्चिम एशिया में जारी तनाव को कम करने में भारत की भूमिका को अहम बताया है। हालांकि, चुनौतियां अभी बाकी हैं। अगर अमेरिका व ईरान में जंग रोकने पर सहमति हो भी जाती है, तो ट्रंप की शैली को देखते हुए यह कहना मुश्किल है कि यह कितना टिकेगी। ऐसे में, भारत को अपनी ऊर्जा सुरक्षा के मद्देनजर दीर्घकालिक रणनीति अपनानी चाहिए। अच्छी बात है कि भारत ऊर्जा आयात में विविधीकरण को बढ़ावा दे रहा है। लेकिन, अब समय आ गया है कि स्वदेशी ऊर्जा उत्पादन को भी बढ़ावा मिले। आयात निर्भरता को कम करके ही वैश्विक भू-राजनीतिक जोखिमों के असर को सीमित किया जा सकता है।
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