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नीयत और सवाल: पाकिस्तान की धमकी को गहराई से समझा जाए, समय के मद्देनजर
अमर उजाला
Published by: Pavan
Updated Mon, 06 Apr 2026 07:27 AM IST
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नीयत और सवाल
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विस्तार
पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने भारत को एक बार फिर जो गीदड़भभकी दी है, उससे पड़ोसी मुल्क की नीयत का ही पता चलता है। ऑपरेशन सिंदूर के समय से ख्वाजा आसिफ अपने बड़बोलेपन का परिचय कई बार दे चुके हैं, लेकिन इस बार कोलकाता तक पहुंचने की धमकी देने के निहितार्थ ज्यादा गंभीर व गहरे हैं।यह धमकी भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के उस कड़े संदेश के ठीक बाद आई है, जिसमें उन्होंने पाकिस्तान के किसी भी दुस्साहस का अभूतपूर्व और निर्णायक जवाब देने की चेतावनी दी थी। ध्यान देने वाली बात है कि कोलकाता (पश्चिम बंगाल) देश के पूर्वी हिस्से में स्थित है, जो पाकिस्तान के साथ कोई सीधी सीमा साझा नहीं करता। इसे लक्ष्य बनाना साफ तौर पर इंगित करता है कि पाकिस्तान अब सीमा पर सीमित संघर्ष नहीं, बल्कि भारत के सुदूर क्षेत्रों में अस्थिरता फैलाने का सपना देख रहा है। यह वही ख्वाजा आसिफ हैं, जिन्होंने हाल ही में भारत पर अफगानिस्तान की तालिबान सरकार के साथ मिलकर पाकिस्तान के खिलाफ साजिशें रचने का आरोप लगाया था।
दरअसल, यह पाकिस्तान की परंपरागत नीति रही है कि वह आतंकवाद को बढ़ावा देता है और फिर खुद पीड़ित होने का ढोंग भी रचता है। दूसरी ओर, ख्वाजा के बयान का समय भी कम महत्वपूर्ण नहीं है। पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव की घोषणा के बाद राज्य की तृणमूल सरकार तेजी से गोलबंदी कर रही है। हाल ही में, मालदा में भीड़ द्वारा न्यायिक अधिकारियों के घेराव की घटना के बाद खुद सर्वोच्च न्यायालय ने पश्चिम बंगाल को राजनीतिक दृष्टि से सर्वाधिक ध्रुवीकृत राज्य बताया है।
ऐसे में, बाहरी खतरे का संदर्भ राजनीतिक विमर्श को अधिक तीखा बना सकता है। जब पाकिस्तान का रक्षा मंत्री कोलकाता का नाम लेता है, तो इसे संयोग नहीं, बल्कि गहरे अर्थों में देखा जाना चाहिए। बंगाल का क्षेत्र विभाजन, सांप्रदायिक हिंसा और खासकर नोआखाली की त्रासदी जैसे अध्यायों से गुजरा है। ऐसे में जाहिर है कि कोलकाता का जिक्र वर्तमान राजनीति तक सीमित न होकर इतिहास की संवेदनशील परतों को भी छूता है। आश्चर्य नहीं, अगर पाकिस्तान, भारत की आंतरिक राजनीति को भुनाकर पूर्वी मोर्चे पर अशांति फैलाना चाहता हो।
पाकिस्तान की यह रणनीति कोई नई नहीं है। वह जानता है कि भारत से पूर्ण युद्ध में उसकी हार तय है। आर्थिक तौर पर भी उसकी हालत किसी से छिपी नहीं है, इसलिए वह ऐसे हथकंडे अपनाता है। अमेरिकी कांग्रेस की पिछले ही महीने जारी रिपोर्ट में पाकिस्तान को आतंकवाद का गढ़ बताया गया है। ऐसा देश अगर अपनी जनता को भुखमरी और अराजकता में झोंककर भारत को डराने का स्वांग रचता है, तो यह उसकी हताशा, दिवालियेपन और सैन्य असमर्थता को छिपाने की कोशिश ही है।