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चांद के पार: आर्टेमिस-2 सिर्फ चंद्रमा तक पहुंचने की कहानी नहीं; यह मानवता की अटूट जिज्ञासा का प्रतीक भी
अमर उजाला
Published by: Pavan
Updated Wed, 08 Apr 2026 08:30 AM IST
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आर्टेमिस-2
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अमर उजाला
विस्तार
मानव सभ्यता के इतिहास में एक बार फिर चंद्रमा की कक्षा में मनुष्य की उपस्थित दर्ज हो गई है और अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा का आर्टेमिस-2 मिशन इस दिशा में निर्णायक साबित हुआ है। मिशन का मूल उद्देश्य चार अंतरिक्ष यात्रियों को चंद्रमा की कक्षा तक ले जाकर सुरक्षित पृथ्वी तक वापस लाना है। अपोलो अभियान के बाद यह पहला ऐसा प्रयास है, जिसमें मनुष्य चंद्रमा के इतने करीब पहुंचा है।हालांकि, इस मिशन में चंद्रमा पर उतरने की कोई योजना नहीं है, लेकिन यह भविष्य के आर्टेमिस-3 मिशन के लिए मार्ग जरूर प्रशस्त करेगा। आर्टेमिस-2 मिशन इस मायने में भी ऐतिहासिक है कि इसने पिछले 50 वर्षों में पृथ्वी से मनुष्य द्वारा तय की कई सबसे लंबी दूरी का नया रिकॉर्ड बनाया है। चार अंतरिक्ष यात्रियों के साथ ओरियन अंतरिक्ष यान चंद्रमा के सूदूर हिस्से के पास से गुजरते हुए पृथ्वी से करीब दो लाख 52 हजार 752 मील की दूरी तक पहुंचा, जिससे 1970 में अपोलो-13 अभियान में बना दो लाख 48 हजार 655 मील का रिकॉर्ड टूट गया है।
जाहिर है कि आर्टेमिस-2 महज एक उड़ान नहीं, बल्कि ‘अज्ञात’ अंतरिक्ष में ‘ज्ञात’ की सीमा को कुछ और बढ़ाने का मानवीय प्रयास है। हालांकि, इस अभियान में कोई भारतीय अंतरिक्ष यात्री शामिल नहीं था, लेकिन आर्टेमिस-2 की कामयाबी इसरो के रोडमैप को ताकत ही देगी। अभियान से प्राप्त होने वाला उच्च स्तरीय तकनीकी डाटा इसरो के गगनयान मिशन जैसे महत्वपूर्ण मिशनों के लिए निस्संदेह उपयोगी साबित होगा। अंतरिक्ष क्षेत्र में राष्ट्रों के बीच सहयोग को प्रगाढ़ बनाने के लिए 2020 में संपन्न आर्टेमिस समझौते पर हस्ताक्षर कर 2023 में भारत भी इसका सदस्य बन चुका है।
गौरतलब है कि यह समझौता बाह्य अंतरिक्ष के क्षेत्र में अन्वेषण और उपयोग को बेहतर बनाने के लिए सिद्धांतों, दिशानिर्देशों और सर्वोत्तम प्रथाओं का एक व्यावहारिक समूह है। जाहिर है, आर्टेमिस-2 अभियान में भारत महज पर्यवेक्षक नहीं, बल्कि एक हितधारक की भूमिका में भी है। आगामी आर्टेमिस मिशनों के तहत चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर अंतरिक्ष यात्रियों को उतारने की नासा की योजना है।
ऐसे में, चंद्रयान-3 का चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर सफलतापूर्वक उतरने का अनुभव इसरो को निस्संदेह ऐसे अभियानों के लिए एक प्रमुख भागीदार के रूप में स्थापित करेगा। लगभग आधी सदी बाद मनुष्य को चंद्रमा तक ले जाने वाला नासा का यह अभियान अंतरिक्ष अन्वेषण के इतिहास में एक नई इबारत लिख सकता है, जो सिर्फ चंद्रमा तक पहुंचने की कहानी नही हैं, बल्कि मानवता की उस अटूट जिज्ञासा का भी प्रतीक है, जो हमें नई सीमाओं को पार करने के लिए प्रेरित करती है।