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चुनावी रणनीति के शिल्पकार: अमित शाह का संगठन कौशल और उत्तर प्रदेश भाजपा की अगली चुनावी चुनौती
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पीएम मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह
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अमर उजाला प्रिंट
विस्तार
भारतीय जनतंत्र की राजनीति में अनेक प्रकार के नेतृत्व उभरे हैं। जनतंत्र की राजनीति में व्यावहारिक स्तर पर नेतृत्व के तीन आधारभूत तत्व माने गए हैं–जन गोलबंदी के गुण और चमत्कारिक क्षमता, प्रभावी संवाद शक्ति और गहन विकास दृष्टि। भारतीय जनतंत्र इस मामले में धनी रहा है, क्योंकि उसके पास अनेक स्तरों पर उपर्युक्त गुणों से लैस नेता उभरते रहे हैं। महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू, बाबा साहेब आंबेडकर, सरदार पटेल, राम मनोहर लोहिया, जयप्रकाश नारायण, इंदिरा गांधी, अटल बिहारी वाजपेयी जैसे अनेक नेता देश व समाज को अपने नेतृत्व से लाभान्वित करते रहे हैं।आज के समय में वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारतीय जनतंत्र, विकास और राष्ट्रनिर्माण की राजनीति को अपने नेतृत्व के गुणों से अत्यंत ऊंचाई पर ला खड़ा किया है। उन्होंने ऐसी लोकप्रियता हासिल की है, जिसने दुनिया के बड़े नेताओं को भी हैरान कर दिया है। विकास की अपनी दृष्टि एवं उसके कार्यान्वयन की शक्ति से उन्होंने भारत को विकसित बनाने की दिशा में काफी आगे बढ़ाया है। उन्होंने अपनी पार्टी को तो महान सफलताएं दिलाई ही हैं, अपने साथ एक सक्षम नेतृत्व टोली भी खड़ी की है। देश स्तर पर उनकी टीम में अमित शाह, निर्मला सीतारमण, एस. जयशंकर, नितिन गडकरी, राजनाथ सिंह, धर्मेंद्र प्रधान जैसे नेताओं के अलावा राज्य स्तर पर योगी आदित्यनाथ, हिमंत बिस्वा सरमा, शुभेंदु अधिकारी जैसे अनेक लोकप्रिय नेता हैं, जो विकास दृष्टि और लोकप्रियता का बेहतर समन्वय स्थापित करते हैं।
समकालीन नेतृत्व में गृहमंत्री अमित शाह का उभार लक्ष्य करने योग्य है। एक घटना का यहां जिक्र करना चाहूंगा। 2017 में उत्तर प्रदेश का चुनाव था। चुनाव परिणाम क्या होगा, इस पर काफी अस्पष्टता थी। हमलोग अपने क्षेत्रीय अध्ययन के दौरान देख रहे थे कि अमित शाह शहरों, बस्तियों और गांवों में घूम रहे थे। वह प्रदेश के दूरस्थ क्षेत्रों में जाकर अनेक जातियों के जाति सम्मेलनों में भाग ले रहे थे। अभी वोट का दिन दूर था और वह सैकड़ों जाति सम्मेलनों का उद्धाटन या संबोधन कर चुके थे। वह पूरे उत्तर प्रदेश चुनाव को अपने ढंग से क्राफ्ट कर रहे थे। संगठन, संघ, भाजपा के बीच बेहतर संवाद वह स्थापित कर ही चुके थे। जब चुनाव परिणाम आया, तो भाजपा को बड़ी विजय मिली।
जाति भाव, हिंदुत्व बोध और विकास चेतना के बीच वह आधार तल पर एक प्रभावी संबंध लगातार रचते जा रहे थे। 2019 के संसदीय चुनाव में भी भाजपा को उत्तर प्रदेश में बड़ी विजय मिली। उसके बाद तो भाजपा लगातार प्रायः (कुछ को छोड़कर) संसदीय और राज्यों के विधानसभा चुनावों में विजयी होती रही है। इनमें से कई विजयों के सांगठनिक शिल्पकार और रणनीतिकार अमित शाह ही माने गए हैं। प्रधानमंत्री मोदी के विजन और कार्यों के आधार तल पर प्रसारित हो रहे असर को राजनीतिक प्रभाव में बदल कर बूथ तक पहुंचाने की प्रक्रिया के वह कुशल शिल्पकार बनकर उभरे हैं। किसी भी समाज में नए-नए अंतर्विरोध उभरते हैं। बदलते समय में अंतर्विरोधों के स्वरूप भी बदलते हैं, वह राजनीतिज्ञ लोकप्रिय जन गोलबंदी करने में सफल होता है, जिसमें समाज के बदलते मुख्य अंतर्विरोधों और उनसे सृजित हो रहे भावों की गहरी समझदारी होती है। मुझे लगता है कि अमित शाह में भारतीय समाज के बन-बिगड़ रहे अंतर्विरोधों की गहरी समझ है। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव अभियान को उन्होंने जिस तरह से गति दी, उससे यह साफ जाहिर होता है। सामाजिक संरचनाओं की संश्लिष्टता, हिंदुत्व बोध और विकास की लोकप्रिय चाहत-तीनों को जोड़कर उसे संगठन के रसायन में प्रवाहित कर वह उसे जन चर्चा का हिस्सा बना देते हैं। प्रधानमंत्री मोदी के विजन और परिकल्पनाओं को वह अत्यंत साफ और सरल ढंग से जनता को समझाते हैं।
उत्तर प्रदेश में 2027 में फिर से विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। इस बीच उत्तर प्रदेश के समाज में कई बदलाव आए हैं। जनाकांक्षाओं में भी नए परिवर्तन आए हैं। लाभार्थी चेतना और चाहतों में महत्वपूर्ण बदलाव भी देखा जा रहा है। उत्तर प्रदेश में सामाजिक अंतर्विरोधों के स्वरूप भी बदले हैं। नई चुनौतियां खड़ी हुई हैं। ऐसे में देखना है कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार के प्रदर्शन को आधार बनाते हुए शाह की सांगठनिक रणनीति आगामी चुनाव में भाजपा के चुनावी विमर्श को क्या रूप देती है। उत्तर प्रदेश में आगामी चुनाव में भाजपा की चुनौती है कि कैसे वह अपने आधार वोटों को बचाए रखते हुए उनमें नए-नए सामाजिक समूहों को जोड़ती है।