पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
फ्री ई-पेपर
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Columns ›   Opinion ›   e20-petrol-ethanol-blending-mileage-engine-performance-consumer-trust

भरोसे का सवाल: ई-20 पेट्रोल पर बहस, ऊर्जा आत्मनिर्भरता के साथ उपभोक्ताओं का विश्वास भी जरूरी

Mon, 06 Jul 2026 06:36 AM IST
Devesh Tripathi अमर उजाला
अमर उजाला Published by: Devesh Tripathi Updated Mon, 06 Jul 2026 06:36 AM IST
विज्ञापन
सार
ई-20 पेट्रोल को लेकर सभी संदेहों का निराकरण जरूरी है। अगर वाकई कोई गंभीर तकनीकी समस्या नहीं है, तो विरोध में हो रहे प्रचार अभियान का पूरी पारदर्शिता के साथ प्रतिकार होना चाहिए। और अगर कहीं कुछ चुनौतियां हैं, तो उन्हें स्वीकार कर समाधान प्रस्तुत करना चाहिए। सवाल जनता के भरोसे का है।
loader
e20-petrol-ethanol-blending-mileage-engine-performance-consumer-trust
E20 पेट्रोल डिस्पेंसर (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : AI

विस्तार

देश में पेट्रोल में 20 फीसदी इथेनॉल मिश्रण को लेकर मिल रही उपभोक्ताओं की शिकायतों के बीच ऑटोमोबाइल कंपनियों और विशेषज्ञों ने सरकार द्वारा आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में लोगों की चिंताएं दूर करने की जो कोशिश की, वह जरूरी भी थी, क्योंकि ई-20 पेट्रोल को लेकर सभी संदेहों को दूर होना ही चाहिए। यह इसलिए भी जरूरी है, क्योंकि ई-20 पेट्रोल से इंजन की कार्यक्षमता, माइलेज और पुराने वाहनों पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर उठ रहे सवाल लगातार बहस का विषय बने हुए हैं। अब तो सरकार, कंपनियों और ऑटोमोटिव रिसर्च ऐसोसिएशन ऑफ इंडिया ने भी यह स्वीकार कर लिया है कि इस ईंधन के उपयोग से वाहनों का माइलेज दो से छह फीसदी तक कम हो सकता है। दरअसल, ई-20 पेट्रोल को लागू करने के पीछे सरकार के कई उद्देश्य हैं, मसलन, कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करना, विदेशी मुद्रा की बचत करना, प्रदूषण घटाना और गन्ना व अन्य कृषि उत्पादों से जुड़े किसानों को अतिरिक्त आय का स्रोत उपलब्ध कराना। इन उद्देश्यों पर किसी को आपत्ति नहीं हो सकती। भारत जैसे ऊर्जा आयातक देश के लिए वैकल्पिक ईंधन की ओर बढ़ना समय की मांग भी है। लेकिन किसी भी नई व्यवस्था की कामयाबी केवल सरकार की सदिच्छा से नहीं, बल्कि लोगों के भरोसे से भी तय होती है। व्यावहारिक ढंग से देखें, तो उपभोक्ता सिर्फ पर्यावरणीय या राष्ट्रीय फायदे के लिए कोई नई व्यवस्था नहीं स्वीकारता। वह अपनी जेब, वाहन की सुरक्षा और भविष्य की लागत को भी देखता है। वाहन निर्माता कंपनियां यह दावा कर रही हैं कि नए मॉडल ई-20 के अनुरूप हैं, लेकिन देश में करोड़ों ऐसे दो और चार पहिया वाहन हैं, जिन्हें खासकर ई-20 ईंधन के लिए तैयार नहीं किया गया है। सोशल मीडिया ने इस संशय को और बढ़ाया है। ई-20 से इंजन खराब होने या माइलेज में भारी गिरावट के वायरल हो रहे कई वीडियो अतिरंजित या अपुष्ट हो सकते हैं, लेकिन जब आधिकारिक स्तर पर समय रहते वैज्ञानिक और तकनीकी तथ्यों के साथ उनका जवाब नहीं दिया जाता, तब अफवाहें भी सच का रूप लेने लगती हैं। अमेरिका, ब्राजील, कनाडा, जापान, थाईलैंड और कई यूरोपीय देशों में ई-20 पेट्रोल का उपयोग तो हो ही रहा है। ऐसे में, अगर ई-20 पेट्रोल में वाकई कोई गंभीर तकनीकी समस्या नहीं है, तो विरोध में हो रहे प्रचार अभियान का पूरी पारदर्शिता के साथ व्यवस्थित प्रतिकार होना चाहिए। और अगर कहीं कुछ चुनौतियां हैं, तो उन्हें स्वीकार कर समाधान प्रस्तुत करना चाहिए। जनता का भरोसा संवाद और जवाबदेही से बनता है। ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में बढ़ते देश के लिए यह भरोसा ही सबसे बड़ी पूंजी होनी चाहिए।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

Next Article

Followed