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रिपोर्ट: चीनी दुष्प्रचार की हकीकत, फ्रांस की जांच एजेंसियां भी खोल चुकी हैं हमारे इस पड़ोसी की पोल
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चीनी दुष्प्रचार की हकीकत
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अमर उजाला प्रिंट
विस्तार
वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में विभिन्न देशों द्वारा चलाए जा रहे दुष्प्रचार अभियानों की हकीकत किसी से छिपी नहीं है। अमेरिकी संसद द्वारा बनाई हुई सलाहकार संस्था यूएस-चाइना इकनॉमिक एंड सिक्योरिटी रिव्यू कमीशन ने हाल ही में अपनी जो नई रिपोर्ट जारी की है, वह वैसे तो खुद ही इस दुष्प्रचार का हिस्सा दिखती है, लेकिन इसमें चीन पर जो आरोप लगाए गए हैं, वे गौर करने लायक हैं, क्योंकि इससे पहले भी कई बार चीन पर ऐसे आरोप लगते रहे हैं।चीन पर आरोप लगाया गया है कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान वह एक बड़े मिथ्या प्रचार अभियान में लगा हुआ था, जिसका मकसद फ्रेंच विमान राफेल को बदनाम करके अपने जे-35 को बढ़ावा देना था। रिपोर्ट में बताया गया है कि चीन ने अपने रणनीतिक लक्ष्य पाने के लिए दबाव बनाने की चाल के तहत नकली सोशल मीडिया अकाउंट बनाए, जिनमें एआई से तैयार एयरक्राफ्ट क्रैश के वीडियो और तस्वीरों का इस्तेमाल करके उन्हें राफेल बताया गया। चीन ने यह हताश कदम इसलिए उठाया, क्योंकि गुणवत्ता और बिक्री के बाद खराब सेवा की वजह से चीनी रक्षा उत्पाद वैश्विक बाजार में विफल हो रहे थे, जबकि पश्चिमी उपकरणों को पसंद किया जा रहा था। नाइजीरिया ने चीन से एफ-7 फाइटर जेट खरीदे, पर कई क्रैश के बाद, उसने बाकी सात जेट चीन को लौटा दिए। बांग्लादेश चीनी टैंकों और उसकी जमीन से हवा में मार करने वाली एचक्यू-7 शॉर्ट रेंज मिसाइलों से खुश नहीं है। चीन में बने पांच विमान नेपाल वापस करना चाह रहा है, पर उसे मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
पाकिस्तान ने ऑपरेशन सिंंदूर में भारत के खिलाफ चीन और तुर्किये के हथियारों का इस्तेमाल किया। चीन के लिए ऑपरेशन सिंदूर उसके उपकरणों के लिए जीवंत परीक्षण माना जा रहा था। सफलता सुनिश्चित करने के लिए चीन ने पाकिस्तान को रियल टाइम जानकारी और लक्ष्य की सही जानकारी भी दी। फिर भी चीन की पीएल15ई मिसाइलें लक्ष्य तक नहीं पहुंच पाईं तथा पंजाब के खेतों में बिना कोई नुकसान पहुंचाए गिर गईं। एक मिसाइल तो सही-सलामत होने के बावजूद गिर गई। भारतीय रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) के इंजीनियरों ने मिसाइल की संरचना की जांच की है, जिसे बाद में भारतीय प्लेटफॉर्म में संगठित किया जाएगा। इसका डाटा दूसरे इच्छुक देशों के साथ भी साझा किया जाएगा, जिसमें चीन के कई दुश्मन देश भी शामिल हैं। कई देशों ने पहले ही इसके लिए भारत से संपर्क किया है।
चीन के एंटी-एयरक्राफ्ट सिस्टम, जिसमें जमीन से हवा में मार करने वाली उसकी मशहूर एचक्यू-9 और एचक्यू-16 मिसाइलें शामिल हैं, पाकिस्तानी एयरबेस को बचाने में नाकाम रहीं। ऐसा पहली बार नहीं हुआ है। वर्ष 2022 में, जब भारत ने गलती से पाकिस्तान में बिना हथियार वाली ब्रह्मोस मिसाइल दाग दी, तो उसका पता भी नहीं चला। इसी तरह पाकिस्तान में रखे चीनी लड़ाकू विमान और यूएवी (ड्रोन) भी फेल हो गए। तथ्य यह है कि पाकिस्तान एक भी भारतीय रणनीतिक लक्ष्य पर निशाना नहीं लगा सका, जबकि उसके सभी लक्ष्य क्षतिग्रस्त या नष्ट हो गए थे। यह पूरी तरह से चीनी सैन्य उपकरणों पर उनकी निर्भरता के कारण था। भारत ने सिर्फ 88 घंटों में पाकिस्तान को घुटनों पर ला दिया, जिससे उसके डीजीएमओ को संघर्ष विराम के लिए अपने भारतीय समकक्ष से बात करनी पड़ी।
बीती जुलाई में, फ्रेंच इंटेलिजेंस सर्विस ने पहले ही सूचना दे दी थी कि चीन राफेल को बदनाम करने के लिए अपने दूतावासों, खासकर दक्षिण पूर्व एशिया, में अपने डिफेंस तंत्र का इस्तेमाल कर रहा था। वह इंडोनेशिया को मनाना चाहता था, जिसने पहले ही चीन के पक्ष में 42 राफेल विमान के ऑर्डर रद्द कर दिए थे। लेकिन बाद में पूरा खेल ही उलट गया और इंडोनेशिया ने अपने राफेल के ऑर्डर बढ़ा दिए। इंडोनेशिया द्वारा राफेल का ऑर्डर रद्द करने से चीन को फायदा होता, क्योंकि दोनों के बीच दक्षिण चीन सागर में नटुना द्वीप को लेकर विवाद चल रहा है।
चीन का जे-35 हाल ही में सेवा में शामिल हुआ है, जिसे अमेरिकी एफ-35 और राफेल से कड़ी टक्कर मिल रही है। पाकिस्तान के अलावा किसी और देश ने इसे खरीदने में दिलचस्पी नहीं दिखाई है, इसलिए चीन में यह बेचैनी देखी जा रही है। दक्षिण पूर्व एशियाई देशों का राफेल की तरफ आकर्षित होना चीन के लिए एक बड़ा झटका होगा, क्योंकि वह एशियाई बाजार पर प्रभुत्व बनाना चाहता है।
ऑपरेशन सिंदूर चीन के लिए राफेल को बदनाम करने का एक मौका था। पाकिस्तान अपने लोगों को जीत दिखाने के लिए बेताब था। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत के खिलाफ दुष्प्रचार पाकिस्तान-चीन की मिली-जुली कोशिश थी। कई लोगों को पाकिस्तान का मीडिया कैंपेन याद होगा, जिसमें कहा गया था कि उसके एयर चीफ भारत के हमले की आशंका में कई दिनों तक जमीन पर पतले गद्दे पर सोए थे। उन्होंने जोर देकर दावा किया कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान कई राफेल गिराए गए, पर सच्चाई बाद में सामने आई कि यह सब महज दुष्प्रचार था। पाकिस्तान के मीडिया कैंपेन को चीनी हैंडल्स का सपोर्ट मिला, जो राफेल की नकली तस्वीरें और वीडियो दिखा रहे थे। भारत में कई चीनी हैंडल्स को प्रतिबंधित कर दिया गया था। दुनिया को चीनी उपकरणों के विफल होने का पता चलने पर उसके रक्षा उद्योग को राजस्व और उसकी सैन्य क्षमता को बड़ा नुकसान होता। ऐसे में उसके पास पश्चिमी उपकरणों को बदनाम करने के लिए नकली दावों का सहारा लेने के अलावा और कोई विकल्प नहीं था। उसका फेक न्यूज का खेल आज भी जारी है।
रणनीतिक लक्ष्य पाने के लिए दुश्मन को बदनाम करना दबाव बनाने की रणनीति का एक जरूरी हिस्सा है। यह युद्ध और शांति के दौरान निर्बाध चलता रहता है। यह उन देशों में कहीं ज्यादा होता है, जो सेना या एक पार्टी के नियंत्रण में होते हैं, जो लोकतंत्र के खिलाफ चलते हैं। पाकिस्तान और चीन करीबी साथी हैं और उन्होंने भारत के खिलाफ हाथ मिलाया है। वे भारतीय सेना को बदनाम करने की चाहे जितनी कोशिश करें, असलियत सामने आ ही जाएगी। उन्हें भारतीय सेना की ताकत का भी पता है और यह भी कि भारत कभी नहीं झुकेगा। चीन ने लद्दाख में और पाकिस्तान ने भारत के खिलाफ कई ऑपरेशन में यह देखा है। edit@amarujala.com