फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Columns ›   Opinion ›   Collection and Indicators: GST collections rise amidst turbulence; a positive sign for the economy.

संग्रह और संकेत: उथल-पुथल के बीच जीएसटी जमा बढ़ा, अर्थव्यवस्था के लिए शुभ

Fri, 03 Jul 2026 08:26 AM IST
Pavan अमर उजाला
अमर उजाला Published by: Pavan Updated Fri, 03 Jul 2026 08:26 AM IST
विज्ञापन
Collection and Indicators: GST collections rise amidst turbulence; a positive sign for the economy.
संग्रह और संकेत - फोटो : अमर उजाला
ऐसे दौर में, जब भू-राजनीतिक तनाव, व्यापारिक अस्थिरता, ऊंची ब्याज दरें, आपूर्ति शृंखलाओं में रुकावटें और ऊर्जा कीमतों में उतार-चढ़ाव के चलते वैश्विक अर्थव्यवस्था अनिश्चितताओं के दौर से गुजर रही है, तब सरकारी आंकड़ों के अनुसार, जून में वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) संग्रह का पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में करीब 14 फीसदी बढ़ते हुए 1.95 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचना समग्र अर्थव्यवस्था के लिहाज से एक शुभ संकेत है।

loader

इसका सबसे उल्लेखनीय पहलू यह है कि कुल जीएसटी संग्रह में आयात से मिलने वाले राजस्व का योगदान एक वर्ष पहले की तुलना में 34.6 फीसदी अधिक हुआ है। कच्चे तेल, इलेक्ट्रॉनिक्स, मशीनरी, सोना और अन्य कई उत्पादों के बड़े पैमाने पर आयात ने सरकार को मिलने वाले राजस्व में खासी बढ़ोतरी की है। बेहतर कर संग्रह का अर्थ है कि सरकार के पास बुनियादी ढांचे, सामाजिक योजनाओं और पूंजीगत निवेश के लिए अधिक संसाधन उपलब्ध होंगे। यह राजकोषीय घाटे को नियंत्रित रखने में भी मददगार साबित हो सकता है।

जाहिर है कि इससे केंद्र व राज्यों की वित्तीय स्थिति को अल्पकालिक राहत जरूर मिली है, पर तस्वीर का दूसरा पक्ष उतना ही महत्वपूर्ण है। घरेलू लेनदेन से मिलने वाला राजस्व जून, 2025 की तुलना में बमुश्किल साढ़े छह फीसदी ही बढ़ा है। साफ है कि घरेलू बाजार में उपभोक्ता मांग अब भी अपेक्षित गति नहीं पकड़ सकी है। ग्रामीण क्षेत्रों में आय वृद्धि सीमित है, जबकि शहरी मध्यवर्ग महंगाई और रोजगार संबंधी अनिश्चितताओं से जूझ रहा है। चिंता की बात यह भी है कि निजी निवेश अब भी पूरी क्षमता से आगे नहीं बढ़ सका है।

अगर जीएसटी संग्रह का प्रमुख आधार आयातित वस्तुएं बन रही हैं, तो यह इस बात का संकेत भी है कि घरेलू उत्पादन की तुलना में विदेशी उत्पादों की हिस्सेदारी बढ़ रही है। यह प्रवृत्ति लंबे समय में देश के विनिर्माण क्षेत्र के लिए चिंता का विषय बन सकती है। उल्लेखनीय है कि जून के आंकड़े भी विनिर्माण गतिविधियों की रफ्तार धीमी होने की ओर ही इशारा कर रहे हैं। हालांकि, समग्र रूप से देखें, तो जून का रिकॉर्ड जीएसटी संग्रह उत्साहवर्धक ही है। पश्चिम एशिया में जैसे-जैसे शांति का माहौल कायम होता जाएगा, देश की अर्थव्यवस्था पर उसका सकारात्मक असर भी दिखेगा।

हालांकि, कमजोर मानसून एक समस्या बना हुआ है। वाणिज्यिक सिलिंडर का सस्ता होना राहतपूर्ण है, फिर भी महंगाई पर नजर रखनी होगी। कुल मिलाकर, वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए परिदृश्य सकारात्मक ही नजर आ रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

Next Article

Followed