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जीवन विज्ञान: कोशिकाओं में छिपा लंबी जिंदगी का रहस्य, जिस पर हैरान और उत्साहित है अध्येता

डाना जी स्मिथ, द न्यूयॉर्क टाइम्स Published by: Pavan Updated Sun, 05 Apr 2026 07:46 AM IST
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सार

माइटोकॉन्ड्रिया को कोशिकाओं का पावर हाउस यों ही नहीं कहा जाता। यह जागते और सोते वक्त भी हमारे शरीर को स्वस्थ बनाए रखने की जंग लड़ता रहता है। पर्याप्त नींद माइटोकॉन्ड्रिया की सफाई के लिए बेहद जरूरी है, क्योंकि सोते वक्त ही माइटोकॉन्ड्रिया क्षतिग्रस्त हुए हिस्से को हटा पाते हैं।

Mitochondria: The secret of long life hidden in cells, which has surprised and excited the scholars.
माइटोकॉन्ड्रिया - कोशिकाओं में छिपा लंबी जिंदगी का रहस्य - फोटो : FreePik
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विस्तार

पिछली गर्मियों में एक मशहूर व्यक्ति ने कहा था कि वह किसी व्यक्ति को देखकर बता सकते हैं कि उसे माइटोकॉन्ड्रिया संबंधी समस्याएं हैं। लंबी उम्र के लिए बाजार में उपलब्ध कई सप्लीमेंट्स के बारे में कहा जाता है कि वे माइटोकॉन्ड्रिया को बेहतर बनाते हैं। माइटोकॉन्ड्रिया का अध्ययन करने वाले वैज्ञानिक इससे हैरान होने के साथ उत्साहित भी हैं। आखिर माइटोकॉन्ड्रिया है क्या और क्या सचमुच उन्हें स्वस्थ बनाना और इस प्रक्रिया में अपनी जीवन-अवधि बढ़ाना संभव है?
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दरअसल, माइटोकॉन्ड्रिया कोशिका के शक्तिगृह (पावर हाउस) होते हैं। वे खाए गए भोजन को एडेनोसिन ट्राइफॉस्फेट (एटीपी) में बदलते हैं, जो कोशिकीय ऊर्जा का प्राथमिक रूप है। वैज्ञानिकों के अनुसार, माइटोकॉन्ड्रिया शरीर की दूसरी बुनियादी प्रक्रियाओं में भी शामिल होते हैं और प्रतिरक्षा तंत्र (इम्यून सिस्टम) के कामकाज में मदद करते हैं। ये ऐसे पेप्टाइड बनाते हैं, जो अंगों के बीच संदेश पहुंचाते हैं, और कोशिकाओं की साफ-सफाई के लिए भी जरूरी होते हैं।  
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उम्र बढ़ने के साथ, हमारी कोशिकाओं में माइटोकॉन्ड्रिया की संख्या और कार्यक्षमता कम होती जाती है। इसकी वजह यह है कि ऊर्जा बनाने की प्रक्रिया के दौरान, माइटोकॉन्ड्रिया एक विषैला सह-उत्पाद बनाते हैं, जिसे ‘रिएक्टिव ऑक्सीजन स्पीशीज’ (आरओएस) कहा जाता है। यह माइटोकॉन्ड्रिया और कोशिका के अन्य हिस्सों को नुकसान पहुंचा सकता है। उम्र बढ़ने के साथ आरओएस बनने की मात्रा भी बढ़ती जाती है। साथ ही, कोशिका का रीसाइक्लिंग सिस्टम (जो आरओएस से होने वाले नुकसान को ठीक करता और उसे हटाता है) कम असरदार हो जाता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि आपका व्यवहार माइटोकॉन्ड्रिया और आपकी सेहत पर असर डालता है। कसरत करने से माइटोकॉन्ड्रिया का काम बेहतर होता है। आहार भी इसमें एक प्रमुख कारक है, क्योंकि हम जो खाना खाते हैं, वह एटीपी में बदल जाता है। इसलिए, फाइबर से भरपूर कार्बोहाइड्रेट और अच्छी गुणवत्ता वाले वसायुक्त आहार को प्राथमिकता दें-जैसे फलियां, साबुत अनाज, एवोकैडो और मछली आदि। कुछ सूक्ष्म पोषक तत्व, विशेष रूप से विटामिन बी और एंटीऑक्सीडेंट भी महत्वपूर्ण हैं। पर्याप्त नींद (रात में सात से आठ घंटे) माइटोकॉन्ड्रिया की सफाई के लिए बेहद जरूरी है, क्योंकि सोते वक्त ही माइटोकॉन्ड्रिया क्षतिग्रस्त हुए हिस्से को हटा पाते हैं। -©The New York Times 2026
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