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आग कैसी होती है: जलता घर, टूटती उम्मीदें और बचती जिंदगी

अंजलि सुई, द न्यूयॉर्क टाइम्स Published by: Devesh Tripathi Updated Sun, 14 Jun 2026 05:42 AM IST
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सार
आज हर दूसरे दिन कहीं न कहीं आग लगने की निराशाजनक खबरें सुनाई दे ही जाती हैं। लेकिन, कुछ कहानियां ऐसी होती हैं, जो भुलाए नहीं भूलतीं। हांगकांग में वह आग ऐसी ही थी, जो वहां दशकों में नहीं देखी गई थी। विलियम ली उस वक्त सो रहे थे, जब उनकी पत्नी ने फोन पर बताया कि आग लग गई है। उसके बाद दो घंटे तक उनके साथ जो कुछ हुआ, वह यह समझने के लिए काफी है कि आग लगने का अनुभव असल में होता क्या है।
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आग कैसी होती है? - फोटो : अमर उजाला प्रिंट

विस्तार

उस दोपहर, जब विलियम ली की इमारत में आग लगी, तो उन्हें इसका जरा भी अंदाजा नहीं था। उनके अपार्टमेंट के अंदर न तो कोई फायर अलार्म बजा और न ही धुएं की कोई गंध आई। उन्हें अपनी पत्नी के फोन से आग लगने का पता चला, जो बाहर काम कर रही थीं। उन्होंने कहा, ‘तुम्हें वहां से निकलना होगा।’ चालीस वर्षीय विलियम ली, जन्म से ही वांग फुक कोर्ट कॉम्प्लेक्स में रह रहे हैं। उन्हें इस इमारत का चप्पा-चप्पा मालूम था, पर यहां से निकलना बिल्कुल भी आसान नहीं था। ली और उनके दो पड़ोसी जमीन से दो मंजिल ऊपर अपने अपार्टमेंट में दो घंटे से अधिक समय तक फंसे रहे, जिसके बाद अग्निशमन दस्ते ने उन्हें बचाया।


विलियम ली ने फेसबुक पर अपनी आपबीती साझा की है। उनकी इस पोस्ट ने हजारों लोगों को प्रभावित किया है। जब उन्हें अस्पताल से छुट्टी मिली, तो उन्होंने उस दो घंटे के भयावह मंजर के बारे में कुछ इस तरह बताया-उस दिन मेरी छुट्टी थी। तबीयत ठीक नहीं होने के कारण मैं घर पर ही था। दोपहर तीन बजकर दो मिनट पर मेरी पत्नी का फोन आया। वह ज्यादा घबराई हुई नहीं थी; उसने बस इतना कहा, ‘आग लगी है, तुम्हें वहां से निकलना होगा।’ मुझे नहीं लगा कि मामला बहुत गंभीर है। न तो कोई फायर अलार्म बजा था और न ही मुझे धुएं की गंध आ रही थी। मुझे कपड़े बदलने और अपार्टमेंट से निकलने की तैयारी करने में कुछ मिनट लगे। जब मैंने दरवाजा खोला, तो धुआं अचानक अंदर आ गया। मैंने झट से दरवाजा बंद कर दिया और पत्नी को वापस फोन करके बताया कि मैं बाहर नहीं निकल सकता। यह सुनते ही वह बेतहाशा रोने लगी। उसे लगा कि शायद मैं मर जाऊंगा।


सबसे पहले मैंने कुछ तौलिये लेकर दरवाजे से नीचे की खाली जगहों को बंद करने का फैसला लिया, जिससे धुआं अंदर आ रहा था। मैं घर में कुछ चीजें ढूंढते हुए बदहवास इधर-उधर घूम रहा था, तभी मुझे गलियारे से आवाजें सुनाई दीं। मैंने गीले कपड़े से अपना मुंह ढका और तेजी से बाहर निकला। एक मिनट बाद ही, मेरे गले में जलन होने लगी और मेरी आंखों से आंसू बहने लगे। गलियारे में घुप अंधेरा था। मैंने अपने फोन की फ्लैशलाइट जलाने की कोशिश की, लेकिन उससे कोई फर्क नहीं पड़ा। मैं आवाजों की तरफ बढ़ा, तो मुझे करीब 60 साल की उम्र का एक जोड़ा मिला। किसी तरह दीवार के सहारे रास्ता टटोलते हुए, मैं उन्हें धुएं के बीच से अपने अपार्टमेंट तक लेकर आया। फिर मैंने अपने अपार्टमेंट का डिजिटल कोड डाला और दरवाजा बंद कर दिया। मैंने उनसे पूछा, ‘आप लोग वहां क्यों थे? क्या गलियारे में कुछ और लोग भी फंसे हैं?’ उन्होंने बताया कि उनके फ्लैट की खिड़की में आग लग गई थी, इसलिए वे तेजी से गलियारे की तरफ भागे। वहां उन्होंने एक घरेलू सहायिका को उस बुजुर्ग महिला को पुकारते हुए सुना, जिनकी वह देखभाल कर रही थी। फिर अचानक वह आवाज बंद हो गई।

मुझे इस इमारत की संरचना के बारे में अच्छी तरह से पता है। हर मंजिल पर सीढ़ियों के दो सेट हैं। एक लॉबी की तरफ जाता है और दूसरा पीछे की तरफ बनी है। पीछे का दरवाजा आमतौर पर बंद रहता था। मेरी पत्नी, जो उस समय इमारत के सामने खड़ी थी, ने बताया कि लॉबी में पहले ही आग लग चुकी थी। मेरे दोस्तों ने मुझे पुलिस को फोन करने के लिए कहा। मैंने 999 पर फोन किया और उन्होंने अग्निशमन दस्ते से मेरी बात करवाई। मैंने उन्हें बताया कि मैं किस फ्लोर और किस फ्लैट में हूं। उन्होंने कहा, ‘ठीक है, हम आपको बचाने के लिए किसी को भेजते हैं।’ लेकिन, आशंकाओं से मेरा जी घबरा रहा था। अग्निशमन दस्ते के एक व्यक्ति ने मुझसे नीचे ही रहने और अपनी ऊर्जा बचाने के लिए कहा। पर, जब आग की लपटें तेजी से आपकी तरफ बढ़ रही हों, तो धैर्य और ऊर्जा बचाना कितना मुश्किल हो सकता है, यह वही समझ सकता है, जिस पर बीती हो। हमने अग्निशमन दस्ते की तरफ हाथ हिलाया, लेकिन बेहद अंधेरा होने की वजह से वे हमें देख नहीं पाए।

शुरू में हम शांत थे। मैंने फोन पर उस बुजुर्ग जोड़े की बेटी से बात की और उसे भरोसा दिलाने की कोशिश की। मैंने कहा, ‘हम बचने का कोई न कोई रास्ता निकाल लेंगे। हमें कुछ नहीं होगा, भरोसा रखो।’ लेकिन, अब मुझे धुएं और किसी चीज के जलने की तेज बदबू आने लगी। मेरे बेडरूम में बैठा वह बुजुर्ग जोड़ा बाहर आकर बोला, ‘खिड़की के आसपास लगे पॉलीस्टाइरीन फोम में आग लग गई है।’ उस पल मुझे सच में लगा कि मैं मर सकता हूं। मेरे बेडरूम में तीन गद्दे और बहुत सारे कंबल थे। मुझे पता था कि अगर खिड़कियां टूटीं, तो आग तेजी से फैल जाएगी। मैंने अपने दोस्तों को व्हाट्सएप पर फोन और मैसेज करके अलविदा कहना शुरू कर दिया। मैंने उनसे कहा कि वे मेरे परिवार का ध्यान रखें।

फिर, हमने अग्निशमन दस्ते का ध्यान खींचने के लिए अपनी लाइटें जलाईं-बुझाईं। मैंने उस खिड़की की ओर इशारा किया, जिसमें आग लगी थी। उन्होंने तुरंत पानी की बौछारों का रुख उस खिड़की की ओर किया और आग बुझा दी। शुरू में, उन्हें हमारे फ्लैट तक फायर लैडर (आग बुझाने वाली सीढ़ी) पहुंचाने में मुश्किल हुई, क्योंकि रास्ते में मचान थी और ऊपर की मंजिलों से मलबा गिर रहा था। शाम पांच बजे के बाद, वे हमारी खिड़की तक पहुंच पाए। उस महिला ने मुझे पहले जाने के लिए कहा, पर मैंने उनसे कहा, ‘नहीं, आप पहले जाइए।’ पहले उन्हें बचाया गया और फिर उनके पति को। कुछ मिनटों तक मैं अपार्टमेंट में अकेला इंतजार कर रहा था। माहौल बहुत उदास था और एक-एक पल भारी लग रहा था। मैं सब कुछ ले जाना चाहता था, लेकिन कुछ भी नहीं ले जा सका, क्योंकि खिड़की बहुत संकरी थी-बस इतनी जगह थी कि एक व्यक्ति तिरछा होकर बाहर निकल सके।

मैंने अपनी पत्नी की घड़ी और कुछ पैसे लिए तथा उन्हें अपने बैग में डाल लिया। फिर मैं जल्दी से निकलकर उतरने वाली सीढ़ी पर चढ़ गया। जब मैं सीढ़ी पर था, तो मुझे लगा जैसे समय ठहर गया हो। अपने घर को पीछे जलते हुए छोड़ने का मुझे दुख था। आग बुझाने वाले पानी की बौछारों से मैं पूरी तरह भीग गया था और मुझे बहुत ठंड भी लग रही थी। मेरी सारी चीजें धीरे-धीरे राख में बदल रही थीं और मेरे मन में कई तरह की भावनाएं उमड़ रही थीं।

जब मैं जमीन पर उतरा, तो अग्निशमन दस्ते के एक व्यक्ति ने मुझे स्पोर्ट्स ड्रिंक पीने को दी। सभी रास्ते बंद थे, इसलिए एंबुलेंस हमारे पास तक नहीं आ पा रही थी। अग्निशामकों ने कहा कि हम खुद पैदल बाहर निकल सकते हैं। उस बुजुर्ग जोड़े और मैंने एक-दूसरे के फोन नंबर लिए और अलग हो गए। फिर, मैं अपने परिवार से मिला। मेरे बच्चे रो रहे थे, क्योंकि उनके सारे खिलौने जल गए थे। लेकिन, हमें संतोष था कि अंतत: मेरी जान बच गई।
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