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मोदी और मैक्रों की बढ़ती नजदीकी: बदलती विश्व व्यवस्था में भारत-फ्रांस साझेदारी का नया अध्याय

अमर उजाला Published by: Devesh Tripathi Updated Mon, 15 Jun 2026 06:31 AM IST
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सार
आज जब दुनिया गहरे बदलावों से गुजरते हुए नए शक्ति संतुलन की ओर बढ़ रही है, तब फ्रांस, स्लोवाकिया और जी-7 को समेटे प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा एक बहुध्रुवीय और संवाद-आधारित विश्व व्यवस्था के निर्माण के लिहाज से महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।
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closeness between PM Modi and emmanuel macron new chapter in India France partnership changing global order
पीएम मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों - फोटो : ANI

विस्तार

ऐसे समय में, जब विश्व व्यवस्था गहरे बदलावों के दौर से गुजर रही है, तब प्रधानमंत्री मोदी की फ्रांस यात्रा और दोनों देशों की बढ़ती निकटता सिर्फ द्विपक्षीय संबंधों का विषय नहीं, बल्कि यह बदलती वैश्विक राजनीति में भारत व फ्रांस के साझा दृष्टिकोण का भी संकेत है। गौरतलब है कि 2014 के बाद से प्रधानमंत्री मोदी की यह सातवीं आधिकारिक फ्रांस यात्रा है। इससे पहले जब फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रों ने फरवरी में भारत का दौरा किया था, तब दोनों देश आपसी रिश्तों को खास वैश्विक रणनीतिक सहयोग का दर्जा देने पर सहमत हुए थे। दरअसल, दोनों देशों के संबंधों की खासियत ही यह रही है कि वे समय की कसौटी पर खरे उतरे हैं। 1976 में जब भारत की तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा लगाए गए आपातकाल को लेकर दुनिया भर में देश की आलोचना हो रही थी, तब वह फ्रांस के प्रधानमंत्री जैक्स शिराक ही थे, जो हमारे गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि बनने को राजी हुए थे। इसी तरह, 1998 में भी जब भारत के परमाणु परीक्षणों के बाद कई पश्चिमी देशों ने नई दिल्ली से दूरी बना ली थी, तब फ्रांस उन चुनिंदा देशों में से था, जिन्होंने भारत के साथ संवाद व सहयोग का रास्ता खुला रखा। जाहिर है कि ये घटनाएं दोनों देशों की व्यावहारिक सोच व दूरदर्शिता का सुबूत हैं, कि उन्होंने किस तरह से कूटनीतिक तौर पर इन रिश्तों की संवेदनशील प्रकृति को बनाए रखा। लिहाजा प्रधानमंत्री मोदी की इस यात्रा को सिर्फ एक औपचारिक राजनयिक कार्यक्रम के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, यह उस रणनीतिक साझेदारी को अधिक गहरा करने का अवसर भी है, जिसने पिछले तीन दशकों में लगातार विस्तार पाया है। मैक्रों का यह कहना अहम है कि भारत अनुसंधान, नवाचार और तकनीकी विकास के क्षेत्र में दुनिया का अगुआ बना हुआ है। इस संदर्भ में फ्रांस में आयोजित ‘भारत इनोवेट्स’ कार्यक्रम भी महत्वपूर्ण है, जिसका उद्देश्य भारत की उभरती नवाचार क्षमता, स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र और तकनीकी उपलब्धियों को वैश्विक मंच पर प्रदर्शित करना है। प्रधानमंत्री मोदी ने उचित ही इसे भारतीय युवा प्रतिभा और फ्रांस की विशेषज्ञता के बीच का पुल बताया है, जो नए अवसर पैदा करेगा। यह देखते हुए कि भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र है, तकनीकी रूप से उन्नत फ्रांस के साथ उसका जुड़ाव निवेश व व्यापार के लिहाज से ही नहीं, बल्कि दोनों देशों के युवाओं, शोधकर्ताओं और उद्यमियों के बीच सहयोग को बढ़ाने की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। आज जब दुनिया नए शक्ति संतुलन की ओर बढ़ रही है, तब फ्रांस, स्लोवाकिया और जी-7 को समेटे प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा एक बहुध्रुवीय और संवाद-आधारित विश्व व्यवस्था के निर्माण के लिहाज से महत्वपूर्ण सिद्ध हो सकती है।
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